नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को हुई जूता उछालने वाली घटना पर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी आर गवई की मां कमलाताई गवई ने सख्त प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस घटना को ‘संविधान पर हमला’ और देश में ‘अराजकता फैलाने की कोशिश’ बताया है। यह CJI की मां की इस हमले के बाद पहली सार्वजनिक प्रतिक्रिया है। यह घटना तब हुई जब सीजेआई गवई की अगुवाई वाली बेंच में केस की सुनवाई चल रही थी। तभी एक वकील ने एक जूता उछालने को कोशिश की। सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उस वकील को बाहर निकाला।
बाद में उस आरोपी की पहचान वकील राकेश किशोर के रूप में हुई। जब उसे कोर्ट रूम से ले जाया जााया जा रहा था, तब किशोर चिल्लाया, ‘सनातन का अपमान नहीं सहेंगे’। वह खजुराहो विष्णु मूर्ति बहाली मामले की सुनवाई के दौरान की गई टिप्पणियों का जिक्र कर रहा था।

‘लोकतांत्रिक संस्थानों की गरिमा की रक्षा करनी चाहिए।’
मंगलवार को अमरावती में पत्रकारों से बात करते हुए कमलाताई ने कहा, ‘ऐसे काम अराजकता फैलाते हैं। हर नागरिक को अपनी असहमति व्यक्त करने का अधिकार है, लेकिन किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है। हमें अपने लोकतांत्रिक संस्थानों की गरिमा की रक्षा करनी चाहिए।’
‘यह सिर्फ एक व्यक्तिगत हमला नहीं है…’
उन्होंने संयम और आपसी सम्मान का आह्वान करते हुए कहा, ‘यह सिर्फ एक व्यक्तिगत हमला नहीं है, बल्कि एक जहरीली विचारधारा का हिस्सा है जिसे फैलने से पहले रोका जाना चाहिए। ऐसी घटनाएं हमारे संविधान का अपमान करती हैं और हमारे राष्ट्र को शर्मिंदा करती हैं। जो कोई भी संविधान के खिलाफ काम करता है, उसे कड़ी सजा मिलनी चाहिए।’
‘किसी को भी अव्यवस्था फैलाने का अधिकार नहीं’
डॉ. बी.आर. अंबेडकर के दृष्टिकोण में अपना विश्वास दोहराते हुए कमलाताई ने कहा, ‘बाबासाहेब अंबेडकर ने हमें ‘जीओ और जीने दो’ के सिद्धांत पर आधारित एक समावेशी संविधान दिया है। किसी को भी अव्यवस्था फैलाने का अधिकार नहीं है। मैं लोगों से आग्रह करती हूं कि वे अपने मुद्दों को शांतिपूर्वक और संवैधानिक माध्यमों से हल करें।’ यह बयान कुछ ही दिनों बाद आया है जब कमलाताई ने दलित समूहों की ओर से विरोध के बाद अमरावती में आरएसएस शताब्दी समारोह में शामिल होने का निमंत्रण ठुकरा दिया था।