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*CJI सूर्यकांत ने देसी अंदाज में समझाया…. क्या है संविधान का मूल ढांचा?*

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सीजेआई सूर्यकांत ने संविधान के ‘मूल ढांचे’ को खाट की रस्सी जैसा बताया है. उन्होंने कहा कि जैसे रस्सी खाट को संतुलन देती है, वैसे ही बेसिक स्ट्रक्चर लोकतंत्र को टूटने से बचाता है. यह सिद्धांत संसद को संविधान की आत्मा बदलने से रोकता है. सीजेआई ने कहा कि इसमें न ज्यादा सख्ती होनी चाहिए और न ज्यादा ढील. आखिर, भारतीय संविधान का ‘मूल ढांचा’ है क्या?

खाट के जरिए समझिए संविधान का गणित

सीजेआई सूर्यकांत ने अपनी बात समझाने के लिए हरियाणा की पारंपरिक खाट का उदाहरण लिया. उन्होंने कहा कि अगर मुझे इस संतुलन को समझाना हो. तो मैं अपने घर की साधारण चीज खाट का उदाहरण लूंगा. खाट का जो फ्रेम होता है वह संविधान का टेक्स्ट है. खाट के चार पाये देश की संस्थाएं हैं. जैसे कि कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका. लेकिन असली खेल उस रस्सी का है जिससे खाट बुनी जाती है.

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