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*मध्य प्रदेश समाचार:इंदौर में CM डॉ. मोहन यादव करेंगे ‘ग्रोथ कॉन्क्लेव 2025’ का शुभारंभ,उज्जैन सिंहस्थ 2028 में बिना रुकावट बिजली देने की तैयारी,अशोकनगर में 51 जेसीबी, 61 ट्रक और 5 हाइड्रा क्रेन…कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारी को आज तक नहीं नसीब हुई कलेक्टरी*

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इंदौर में CM डॉ. मोहन यादव करेंगे ‘ग्रोथ कॉन्क्लेव 2025’ का शुभारंभ

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 11 जुलाई को इंदौर में ‘मध्यप्रदेश ग्रोथ कॉन्क्लेव 2025’ का शुभारंभ करेंगे। आयोजन में 1500 से अधिक निवेशक भाग लेंगे। शहरी विकास, तकनीक, ई-वाहन, अफोर्डेबल हाउसिंग और स्मार्ट सिटी जैसे विषयों पर चर्चा होगी। कॉन्क्लेव में निवेश अवसरों और भविष्य की योजनाओं का प्रदर्शन होगा।

 मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 11 जुलाई को इंदौर स्थित ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित ‘मध्यप्रदेश ग्रोथ कॉन्क्लेव 2025 – सिटीज ऑफ टुमॉरो’ का शुभारंभ करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कॉन्क्लेव में होटल, पर्यटन, रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों के प्रमुख निवेशकों से संवाद करेंगे। यह आयोजन प्रदेश में शहरी विकास के ब्लूप्रिंट और भविष्य की योजनाओं पर केंद्रित रहेगा।

‘सिटीज ऑफ टुमॉरो’ में जुटेंगे 1500+ निवेशक

इस उच्च स्तरीय आयोजन में देश के 1500 से अधिक निवेशकों, उद्योगपतियों, कॉर्पोरेट प्रतिनिधियों की सहभागिता होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव दोपहर 1:30 बजे कॉन्क्लेव स्थल पर पहुंचकर एक्जीबिशन का अवलोकन करेंगे, उसके बाद विशिष्ट अतिथियों के साथ बैठक करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव दोपहर 3 बजे दीप प्रज्ज्वलन के साथ कॉन्क्लेव का शुभारंभ करेंगे।

कई संस्थाओं की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी

कॉन्क्लेव में नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय और नगरीय प्रशासन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे। आयोजन में क्रेडाई, नगर निगम, आईडीए, स्मार्ट सिटी, हाउसिंग बोर्ड, मैट्रो, हुडको, एलआईसी सहित कई संस्थाओं की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी।

तकनीकी सत्रों का आयोजन

कॉन्क्लेव में चार तकनीकी-सत्र आयोजित होंगे, जिनमें ‘शहरी उत्कृष्टता के लिए आधिनिक तकनीक, विकास के केंद्र के रूप में शहर, भविष्य के लिए सतत हरित शहरीकरण और भविष्य के शहरों की यातायात व्यववस्था’ जैसे विषयों पर विशेषज्ञ सहभागिता करेंगे।

निवेश अवसरों पर आधारित लघु फिल्मों का प्रदर्शन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव कॉन्क्लेव में MP लॉकर, ET अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन समिट 2025 ब्रोशर का विमोचन, एमओयू साइनिंग और ‘सौगात’ का उद्घाटन एवं अनावरण करेंगे। वह निवेशकों को प्रशस्ति-पत्र भी भेंट करेंगे। इसके साथ ही मध्यप्रदेश के शहरीकरण में निवेश अवसरों पर आधारित लघु फिल्मों का प्रदर्शन भी किया जायेगा।शहरीकरण में निवेश के अवसर

प्रदेश में मेट्रो, ई-बस, मल्टीमॉडल हब, अफोर्डेबल हाउसिंग, वॉटरफ्रंट डेवेलपमेंट, सीवेज नेटवर्क, ई-गवर्नेंस, स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन, स्मार्ट रोड्स जैसे क्षेत्रों में निवेश की असीम संभावनाएँ हैं। प्रदेश में अफोर्डेबल हाउसिंग में 8 लाख 32 हजार से अधिक किफायती आवास तैयार किये जा चुके हैं और 10 लाख से अधिक नए आवासों पर कार्य चल रहा है, जिनमें लगभग ₹50,000 करोड़ का निवेश संभावित है। रियल इस्टेट की योजनाओं के क्रियान्वयन के लिये प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण मानव संसाधन उपलब्ध हैं। पाईपलाइन वॉटर सप्लाई कवरेज की सुविधा और शतप्रतिशत शहरी क्षेत्र सीवरेज सिस्टम उपलब्ध है। नगरीय क्षेत्रों में स्थानीय निकायों में 23 सेवाएं ऑनलाइन डिजिटल प्लेटफार्म पर उपलब्ध कराई गई हैं।

सेन्ट्रलाइज पोर्टल के माध्यम से मंजूरी

नगरीय निकायों में सेन्ट्रलाइज पोर्टल के माध्यम से मंजूरी दी जा रही है। प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी 17 हजार 230 योजनाएं क्रियान्वित की जा रही है। शहरी क्षेत्रों में स्वच्छ पर्यावरण के लिये 2 हजार 800 करोड़ और वॉटर फ्रंट से संबंधित डेवलपमेंट में 2 हजार करोड़ रूपये की परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। प्रदेश में शहरी क्षेत्रों में सुगम परिवहन व्यवस्था के विस्तार के लिये 21 हजार करोड़ रूपये की परियोजनाएं संचालित हैं। वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने और पेट्रोलियम ईंधन के कार्बन फुट-फ्रंट रोकने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रदेश के बड़े शहरों में 552 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू किया जा रहा है। प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित करने के लिए इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी-2025 लागू की गई है।

शहरी परिवर्तन की ओर तेजी से अग्रसर

इंदौर में आयोजित यह ग्रोथ कॉन्क्लेव न केवल प्रदेश की शहरी योजनाओं को रफ्तार देगा, बल्कि निवेशकों को एक मजबूत और विश्वसनीय मंच भी प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की नेतृत्व में प्रदेश शहरी परिवर्तन की ओर तेज़ी से अग्रसर है।

पावर ट्रांसमिशन सिस्टम पर मोहन सरकार खर्च करेगी 185 करोड़

सिंहस्थ कुंभ 2028 में निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए मोहन सरकार ने मेगा प्लान बनाया है। इसके लिए 185 करोड़ खर्च करेगी। इसके साथ ही पूरे प्रदेश में बिजली आपूर्ति सिस्टम को मजबूत करने के लिए 5163 करोड़ की योजना बनाई गई है। उज्जैन में सबस्टेशन, ट्रांसफार्मर और लाइन नेटवर्क को अपग्रेड किया जाएगा।

मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में साल 2028 में सिंहस्थ कुंभ होना है। इस कुंभ मेले की तैयारियां बिजली कंपनी में भी शुरू हो गई है। कुंभ मेले में बिजली व्यवस्था को बेहतर बनाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए सरकार 185 करोड़ रुपये खर्च करेगी। पूरे राज्य में बिजली सप्लाई को दुरुस्त करने के लिए सरकार ने एक योजना बनाई है। इस योजना पर 5163 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसमें सिंहस्थ मेले से जुड़े काम भी शामिल हैं।

दरअसल, राज्य सरकार पूरे प्रदेश में बिजली व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर काम करने जा रही है। सरकार ने 2025-26 से लेकर 2029-30 तक के लिए एक योजना बनाई है। इस योजना पर कुल 5163 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इस योजना में सिंहस्थ-2028 के लिए 185 करोड़ रुपये का काम भी शामिल है।

उज्जैन में बिजली से जुड़े ये काम होंगे

शहर में 185 करोड़ में होने वाले काम के तहत 132 केवी के दो सब पावर स्टेशन के अलावा 122 केवी सब स्टेशन का विस्तारीकरण किया जाएगा। एक्स्ट्रा ट्रांसफार्मर लगाए जाएंगे। रिमोट से संचालित होने वाले सब स्टेशन, मेला क्षेत्र में 600 किमी में बिजली की नई लाइनें डाली जाएगी।

अन्य राज्यों में बिजली व्यवस्था होगी मजबूत

मुरैना संभागीय मुख्यालय और ग्वालियर शहर के उत्तरी भाग में लगातार बिजली सप्लाई के लिए नए सबस्टेशन बनाए जाएंगे। इन सबस्टेशनों को बनाने में 1015 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके साथ ही, नई ईएचवी (एक्स्ट्रा हाई वोल्टेज) लाइनों के लिए 54 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। ईएचवी लाइनें बिजली को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने का काम करती हैं।

51 जेसीबी, 61 ट्रक और 5 हाइड्रा क्रेन… अशोकनगर में उमड़ा आस्था का जनसैलाब, रत्न वृष्टि से किया गया स्वागत

अशोकनगर में जैन संत सुधा सागर जी महाराज के आगमन पर गुरु पूर्णिमा का पर्व अभूतपूर्व उत्साह के साथ मनाया गया। शहर में 51 जेसीबी और 61 ट्रकों से रत्नवृष्टि की गई, जिससे सड़कों पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। राजस्थान, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों से आए भक्तों ने 121 चांदी की थालियों से महाराज जी के पैर धोए।

अशोकनगर  जिले में जैन समाज के बड़े संत सुधा सागर जी महाराज के आगमन पर शहर में अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर हुए इस कार्यक्रम में कई रिकॉर्ड टूटे। महाराज जी की अगवानी में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ा। 51 जेसीबी, 61 ट्रक और 5 हाइड्रा क्रेन से रत्नवृष्टि की गई। चल समारोह 2 किलोमीटर लंबा था, जिससे शहर की कई सड़कें जाम हो गईं। देश भर से श्रद्धालु अशोकनगर पहुंचे थे।

गुरुवार को गुरु पूर्णिमा पर जैन मुनि सुधा सागर जी महाराज चातुर्मास के लिए अशोकनगर पहुंचे। उनके स्वागत में जैन समाज के साथ सर्व समाज ने भी भव्य आयोजन किया। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों से जैन श्रद्धालु अशोकनगर आए। चल समारोह में 45 से अधिक संगठनों ने झांकियां प्रस्तुत कीं। सिख समाज के लोग भी ट्रैक्टर और बुलेट वाहनों के साथ शामिल हुए। पूरे शहर को गुरुदेव के स्वागत के लिए सजाया गया था।

121 चांदी की थालियों में पैर धुला गया

चल समारोह के दौरान सड़कों पर भारी भीड़ के कारण कई रास्ते जाम हो गए। लोग घंटों तक फंसे रहे। मुनि संघ के आसपास पुलिस ने सुरक्षा घेरा बनाया। कलेक्टर आदित्य सिंह और पुलिस अधीक्षक विनीत कुमार जैन भी चल समारोह में कई किलोमीटर तक पैदल चले। गुरु के स्वागत में 51 जेसीबी, 61 ट्रक और 5 हाइड्रा क्रेन से रत्न वृष्टि की गई। आधा किलोमीटर का रैंप बनाकर 121 चांदी की थालियों से पाद प्रक्षालन किया गया। यह पूरे चल समारोह में चर्चा का विषय रहा।

कलेक्टर ने क्या कहा?

कलेक्टर आदित्य सिंह और एसपी विनीत कुमार जैन भी व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौजूद रहे। उन्होंने श्रद्धालुओं के साथ पैदल चलकर व्यवस्था का जायजा लिया। चल समारोह में शामिल एक श्रद्धालु ने बताया, “हमने ऐसा भव्य आयोजन पहले कभी नहीं देखा। गुरुदेव का आशीर्वाद पाकर हम धन्य हो गए।” एक अन्य श्रद्धालु ने कहा, “यह अद्भुत अनुभव था। पूरा शहर भक्तिमय हो गया था।” शहर के लोगों ने भी इस आयोजन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उन्होंने सड़कों को साफ रखा और श्रद्धालुओं के लिए पानी की व्यवस्था की।

भ्रष्टाचार: MP के अफसरों ने एक घंटे में खा लिए 14 किलो ड्रायफ्रूट्स, छह लीटर दूध की चाय में डाली पांच KG चीनी

मध्य प्रदेश में नित नए भ्रष्टाचार के मामले सामने आ रहे हैं। हाल ही में सामने आए ऑइल पेंट घोटाले की चर्चा रुक भी नहीं सकी अब नया मामला सामने आ गया। मामला शहडोल का है। शहडोल के भदवाही ग्राम में जल गंगा अभियान के कार्यक्रम में अधिकारियों ने ड्रायफ्रूट्स व चाय पर जनता के पैसे से खर्च किया। फर्जी बिलिंग में काजू समेत अन्य सामान की कीमतें बढ़ाकर दर्शाई गईं। 14 किलो ड्रायफ्रूट्स व 6 लीटर दूध की चाय पर 19,000 रुपये खर्च हुए।

जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत आयोजित एक कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के आला अधिकारियों के द्वारा की गई अनियमितताओं का मामला प्रकाश में आया है। शहडोल के गोहपारू ब्लॉक के भदवाही ग्राम पंचायत में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान, अधिकारियों ने मात्र एक घंटे में 14 किलो ड्रायफ्रूट्स का सेवन कर लिया, जिसका खर्च जनता के पैसों से उठाया गया। इस कार्यक्रम में कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ, एसडीएम और अन्य कई आला अधिकारी शामिल हुए थे। इन अधिकारियों ने 5 किलो काजू, 6 किलो बादाम और 3 किलो किसमिस खाकर एक अनोखा रिकॉर्ड बनाया। इसके अलावा, उन्होंने 6 लीटर दूध में 5 किलो शक्कर मिलाकर चाय का भी सेवन किया। इस आयोजन का आयोजन भदवाही ग्राम पंचायत द्वारा किया गया था, जिसके लिए दी गई राशि का भुगतान विवादित बिलों के माध्यम से किया गया है।

जल गंगा संवर्धन अभियान क्या है?
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में जल गंगा संवर्धन अभियान का उद्देश्य गांवों में जल संरचनाओं की सफाई करना है। इस अभियान के तहत सरकार ने गांवों में कुएं, तालाब और नदियों की सफाई का कार्य शुरू किया है। हाल ही में मुख्यमंत्री ने इस अभियान की प्रगति की जानकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दी थी।

भदवाही में क्या हुआ?
भदवाही ग्राम पंचायत में जल चौपाल का आयोजन किया गया, जिसमें अधिकारी और ग्रामीण दोनों शामिल हुए। पता चला है कि इस आयोजन में सर्व किया गया भोजन खिचड़े, पूड़ी और सब्जी के रूप में था, जबकि अधिकारियों के नाम पर जो बिल जारी किए गए उसमें ड्रायफ्रूट्स का खर्च दिखाया गया। यह भी चर्चा है कि अधिकारियों के आगमन के लिए ग्राम पंचायत ने उचित व्यवस्था की थी, लेकिन यह सब सरकारी धन के दुरुपयोग की कहानी बयां करता है।

फर्जी बिलिंग का मामला
सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, 13 किलो ड्रायफ्रूट्स के लिए 19,010 रुपये का भुगतान किया गया, जिसमें अन्य सामग्री जैसे 30 किलो नमकीन और 20 पैकेट बिस्कुट का भी खर्च शामिल है। इस मामले में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि काजू की कीमत में भारी अंतर देखा गया है। एक किलो काजू 1000 रुपये में खरीदा गया, जबकि उसी दिन एक अन्य विक्रेता से काजू 600 रुपये प्रति किलो में उपलब्ध था। मुद्रिका सिंह, प्रभारी जिला पंचायत सीईओ ने कहा  कार्यक्रम में मैं खुद मौजूद था, लेकिन मुझे जानकारी नहीं है पता करता हूं।

महाकाल सवारी 2025:नगर भ्रमण का हर स्वरूप होगा खास, जानें कब किस रूप में दर्शन देंगे महाकाल

ज्जैन की महाकाल सवारी 2025 में महाकाल हर बार की तरह इस बार भी नगर भ्रमण पर निकलकर अलग-अलग रूपों में भक्तों को दर्शन देंगे। सावन-भादौ माह में बाबा महाकाल की सवारी निकलेगी। इसके लिए प्रशासन और महाकालेश्वर मंदिर समिति नें सारी तैयारी पूरी कर ली है। महाकाल की ये सवारी इस बार 14 जुलाई से लेकर 18 अगस्त तक हर सोमवार को निकाली जाएगी।

महाकाली सवारी 2025 में बाबा महाकाल के छह स्वरूप होंगे। 18 अगस्त को अंतिम राजसी सवारी श्री सप्तधान मुखारविंद स्वरूप में निकाली जाएगी, जिसमें बाबा का राजसी शृंगार किया जाएगा। सभी सवारियां श्रद्धा और उत्साह के साथ निकाली जाएंगी।

श्री मनमहेश।

प्रथम सवारी: भगवान श्री महाकालेश्वर 14 जुलाई को पालकी में श्री मनमहेश रूप में विराजित होंगे। जो भक्तों के मन को मोह ले वह स्वरूप श्री मनमहेश का होता है। इनके दर्शन करने से भक्तों के मन को शीतलता प्राप्त होती है।

श्री चंद्रमोलेश्वर। –

द्वितीय सवारी: 21 जुलाई पालकी में श्री चंद्रमोलेश्वर। शिव के मस्तक पर जो चंद्रमा विराजमान है। वह स्वरूप चंद्रमोलेश्वर कहलाता है। इस स्वरूप के दर्शन करने से चंद्र संबंधित दोष का निवारण होता है। 

गरुड़ रथ पर श्री शिव तांडव

तृतीय सवारी: 28 जुलाई गरुड़ रथ पर श्री शिव तांडव। यह बाबा महाकाल का मस्ताना स्वरूप है, जिसके दर्शन करने मात्र से जीवन में खुशियां ही खुशियां आती हैं। 

श्री उमा महेश।

चतुर्थ सवारी: चार अगस्त नंदी रथ पर श्री उमा महेश। यह बाबा महाकाल और मां पार्वती का एक ऐसा स्वरूप है, जिनके दर्शन करने से पति-पत्नी के जीवन में श्रद्धा और विश्वास बढ़ता है।

श्री होलकर स्टेट।

पंचम सवारी: 11 अगस्त  रथ पर श्री होलकर स्टेट। यह बाबा महाकाल का ऐसा स्वरूप है, जिसमें बाबा महाकाल अपने भक्तों को भक्त के रूप में ही दर्शन देते हैं।

श्री सप्तधान मुखारविंद।

अंतिम राजसी सवारी: 18 अगस्त रथ पर श्री सप्तधान मुखारविंद के रूप में भगवान विराजित होंगे। मनुष्य के जीवन का चक्र पूरे सात दिनों का होता है। इस स्वरूप में धान के माध्यम से बाबा महाकाल का शृंगार किया जाता है और भक्त बाबा महाकाल के राजसी स्वरूप के दर्शन कर अपने आपको धन्य महसूस करते हैं।

90 के बाद अब नेपानगर का 86 डिग्री वाला ब्रिज चर्चा में, दो साल पहले शुरू हुए पुल पर हो रहे हादसे

बीते दिनों मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के ऐशबाग में बने 90 डिग्री वाले ब्रिज की पूरे देश में चर्चा रही। इसके बाद अब प्रदेश के ही बुरहानपुर जिले के नेपानगर में बने 86 डिग्री वाले ओवरब्रिज की भी सुरक्षा व्यवस्था पर स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं। करीब दो साल पहले जनता के लिए खोले गए इस ब्रिज पर अब तक दो हादसे हो चुके हैं, जिसमें एक मौत भी हुई थी। इसके बाद से इस पर जालियां लगाने का काम फाइलों में अटका पड़ा है। हालांकि फरवरी माह में हुए हादसे के बाद स्थानीय नगर पालिका अध्यक्ष भारती पाटील ने भी इंजीनियरों के साथ इस रेलवे ओवरब्रिज का निरीक्षण किया था। इसके बाद ही ब्रिज पर सुरक्षा जालियां लगाने का निर्णय लिया गया था। हालांकि स्थानीय कांग्रेस नेता जगमीत सिंह जोली का कहना है कि 90 और 86 डिग्री में कोई बड़ा अंतर नहीं है। ऐसे में क्या जिला प्रशासन अब भी यहां कोई बड़ा हादसा होने का इंतजार कर रहा है।

नेपानगर के 86 डिग्री ओवरब्रिज पर दो हादसे हो चुके हैं, जिसमें एक मौत हुई। सुरक्षा जालियां लगाने का निर्णय फरवरी में हुआ था, लेकिन अब तक फाइलों में अटका है। कांग्रेस नेता ने तकनीकी जांच की मांग की है, जबकि नगर पालिका को इंदौर से स्वीकृति का इंतजार है। 

बुरहानपुर जिले के नेपानगर में साल 2015-16 में आंबेडकर चौराहा से लेकर संजय नगर तक ओवरब्रिज बनाने को लेकर तत्कालीन विधायक राजेंद्र दादू ने स्वीकृति कराई थी। उस समय इसकी लागत करीब 34 करोड़ रुपये आंकी गई थी। यह ब्रिज सेतु निगम और रेलवे के सहयोग से बनाया जाना था। हालांकि रेलवे प्रशासन द्वारा काम में देरी से इस ब्रिज का निर्माण कार्य बीच-बीच में कई बार बंद भी रहा। आखिरकार करीब 7 वर्षों बाद साल 2023 में यह बन कर पूरा हुआ। लेकिन तब तक इसकी लागत करीब 4 करोड़ रुपए से अधिक होकर 38 करोड़ हो चुकी थी। इधर करीब दो साल पहले इस 16 मीटर चौड़े ओवरब्रिज के शुरू होते ही यहां के मातापुर बाजार के रेलवे क्रॉसिंग गेट को आवागमन के लिए पूरी तरह से बंद कर दिया गया।

90 और 86 डिग्री में कोई बड़ा अंतर नहीं
इस ब्रिज को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी के ग्रामीण अध्यक्ष जगमीत सिंह जोली ने बताया कि ब्रिज से आवागमन शुरू होने के बाद से बीते दो साल में अब तक यहां दो बाइक सवारों के साथ हादसे हो चुके हैं। पहले हादसे में बाइक से जा रहा युवक गिरकर गंभीर रूप से घायल हुआ था। इसके बाद अभी फरवरी माह में ही एक युवक की ब्रिज की 40 फीट की उंचाई से गिरने से मौत हुई थी। ये हादसे ब्रिज के 86 डिग्री के मोड़ से बने होने के चलते ही हो रहे हैं। जब भोपाल के 90 डिग्री के ब्रिज में सुधार किया जा सकता है, तो यहां भी 90 और 86 डिग्री में कोई ज्यादा बड़ा अंतर नहीं है। इसकी भी टेक्निकल जांच होनी चाहिए। यहां शायद ऐसा लगता है कि, जिला प्रशासन कोई बड़ा हादसा होने का इंतजार कर रहा है।

86 डिग्री है यह ब्रिज
इधर सेतु निगम की मानें तो, उनके इंजीनियर अरुण गंगराड़े के अनुसार नेपानगर में बनाया गया रेलवे ओवरब्रिज 86 डिग्री का है। इसकी चौड़ाई और गोलाई भी अधिक है। और बीते दो साल में इस पर अब तक सिर्फ दो हादसों के मामले सामने आए हैं। हालांकि इसके बावजूद उन्होंने नगर पालिका को ब्रिज पर सुरक्षा जालियां लगाने की अनुमति दी हुई है। वहीं नगर पालिका इंजीनियर के अनुसार सुरक्षा जालियों को लेकर इंदौर से टेक्निकल स्वीकृति का इंतजार किया जा रहा है।

13-14 साल की वरिष्ठता वाले कई आईएएस अधिकारियों को आज तक नहीं नसीब हुई कलेक्टरी

मध्य प्रदेश के प्रशासकीय क्षेत्र में इसे विसंगति ही कहा जाएगा कि जिन आईएएस अधिकारियों की वरिष्ठता 13-14 साल हो गई है, उन्हें आज तक कलेक्टरी नसीब नहीं हो पाई है। इनमें से तीन 2011 बैच की महिला आईएएस अधिकारी हैं। इन्हें 14 साल बाद भी अभी तक एक भी जिले का कलेक्टर नहीं बनाया गया है। ये महिला अधिकारी हैं- प्रीति जैन, सरिता बाला ओम प्रजापति और उषा परमार। इसके अलावा 2010 बैच के चंद्रशेखर वालींबे अगले 4-5 माह में सुपर टाइम स्कैल में आ जाएंगे, लेकिन इसे उनका दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि उन्हें पूरे आईएएस के जीवनकाल में एक भी जिले की कलेक्टरी करने का अवसर नहीं मिला है। यह अपने आप में एक बिरला उदाहरण है। 

मध्यप्रदेश में कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारी, विशेषकर 2011 और 2012 बैच के प्रमोटी अधिकारी, अब तक कलेक्टर नहीं बन पाए हैं। इनमें तीन महिला अधिकारी भी शामिल हैं। वहीं कुछ समकक्ष अधिकारी तीन-चार जिलों में कलेक्टर रह चुके हैं।

2011 बैच के अन्य अधिकारी जो कभी कलेक्टर नहीं बन पाए उनमें हरि सिंह मीणा, गिरीश शर्मा और वीरेंद्र कुमार शामिल हैं। इसी प्रकार 2012 बैच के संतोष कुमार वर्मा, दिनेश कुमार मौर्य, राजेश कुमार ओगारे और भारती जाटव ओगारे को सरकार ने कभी कलेक्टर बनाना उचित नहीं समझा। ये सभी प्रमोटी आईएएस अधिकारी हैं, लेकिन इन्हीं आईएएस बैच के एक दो ऐसे भी प्रमोटी अधिकारी हैं, जो इस दौरान तीन से चार जिलों के कलेक्टर रह चुके हैं।

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दिल्ली में आवासीय आयुक्त, भोपाल में भी दो बड़े विभागों की जिम्मेदारी
मध्य प्रदेश सरकार में मध्य प्रदेश से जुड़े शासकीय कार्यों के संपर्क और समन्वय के लिए दिल्ली स्थित मध्य प्रदेश भवन में आवासीय आयुक्त का पद है। इस पद पर वर्तमान में 1994 बैच की आईएएस अधिकारी रश्मि अरुण शमी को मध्य प्रदेश शासन के दो महत्वपूर्ण दायित्व और दिल्ली के ही एक अन्य दायित्व के साथ-साथ इस पद का अतिरिक्त दायित्व दिल्ली में सौंप रखा है। राज्य शासन द्वारा 12 मार्च को जारी आदेश के अनुसार रश्मि मध्य प्रदेश शासन में महिला और बाल विकास और खाद्य नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण जैसे बड़े और महत्वपूर्ण विभाग की अपर मुख्य सचिव के साथ ही दिल्ली में विशेष आयुक्त समन्वय और आवासीय आयुक्त मध्यप्रदेश भवन के अतिरिक्त प्रभार में हैं। यहां यह बताना उचित होगा कि दिल्ली के इन दोनों पदों पर भी हमेशा अलग-अलग अधिकारी ही रहे हैं। प्रशासकीय गलियारों में इस बात को लेकर बड़ी चर्चा है कि भोपाल के दो बड़े विभागों का दायित्व होने से वे दिल्ली के दो दायित्वों का काम कैसे देख पाती होंगी। बता दें, कि इसके पहले आवासीय आयुक्त पद पर एक ही वरिष्ठ आईएएस अधिकारी नियुक्त किए जाते रहे हैं।

एमपी में सत्ता और संगठन के समन्वय की जोरदार शुरुआत 
हेमंत खंडेलवाल के भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद यह संदेश साफ तौर पर गया है कि अब मध्य प्रदेश भाजपा में मुख्यमंत्री मोहन यादव शिखर पर हैं और सत्ता और संगठन के बीच बेहतर तालमेल स्थापित हो गया है। इसकी शुरुआत अगले दिन ही देखने को मिली जब मुख्यमंत्री ने सभी भाजपा विधायकों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बात की तभी भाजपा अध्यक्ष खंडेलवाल ने कहा कि अब आपको सत्ता और संगठन का समन्वय शिखर पर दिखाई देगा। दूसरा उदाहरण देखने को तब मिला जब मुख्यमंत्री अपने साथ हेमंत खंडेलवाल को लेकर दिल्ली गए और वहां भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ-साथ पार्टी के वरिष्ठ नेता अमित शाह, राजनाथ सिंह और कई केंद्रीय मंत्रियों से खंडेलवाल के साथ मिले। इसके जरिए यह संदेश देने की कोशिश हुई कि अब सत्ता और संगठन में बेहतर समन्वय स्थापित है।

…इसलिए रुकी थी निगम, मंडलों में जनप्रतिनिधियों की नियुक्तियां 
मध्य प्रदेश में मोहन यादव सरकार को बने डेढ़ साल से भी ज्यादा समय हो चुका है, लेकिन अभी भी निगम, मंडलों, आयोगों, प्राधिकरणों आदि में जन प्रतिनिधियों की नियुक्ति नहीं हो पाई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इसके पीछे का जो सबसे बड़ा कारण था, वह भाजपा के नए अध्यक्ष की प्रतीक्षा थी। बताया गया है कि अगर इसके पहले इन पदों पर मनोनयन किया जाता तो उसमें मोहन यादव के बजाय तत्कालीन अध्यक्ष वीडी शर्मा के समर्थकों को ज्यादा जगह देनी पड़ती और डॉ. मोहन यादव शायद इस बात को समझ गए थे, इसीलिए उन्होंने कभी भी इस ओर ज्यादा ध्यान नहीं दिया, लेकिन अब स्थितियां बदल गई हैं। हेमंत खंडेलवाल के अध्यक्ष बन जाने से डॉ. मोहन यादव को कोई दिक्कत नहीं होगी। बताया तो यहां तक जा रहा है कि निगम मंडलों के साथ ही स्थानीय निकायों में एल्डरमैन और विकास प्राधिकरणों में नियुक्त की हलचल भी तेज हो गई है और राजनीतिक दृष्टि से ऐसे नामों को फाइनल किया जा रहा है जो उपयोगी साबित हो सकते हैं। इसलिए कहा जा सकता है कि जनप्रतिनिधियों के लिए खुश होने का समय आ गया है। बस थोड़ा और इंतजार कीजिए….

मुख्यमंत्री कार्यालय को चुस्त दुरुस्त करने में जुटे एसीएस नीरज मंडलोई 
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नए अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई सीएम कार्यालय को चुस्त दुरुस्त करने में जुट गए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय के सभी अधिकारियों की एक बैठक में निर्देश दिए मुख्यमंत्री की घोषणाओं, समाधान ऑनलाइन सहित मुख्यमंत्री के प्राथमिकता वाले कार्यक्रमों में और तत्परता लाई जाए। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मंडलोई अब अपने हिसाब से सीएमओ में कुछ अधिकारियों को हटाकर नए अधिकारियों को ला सकते हैं।

11 दिनों से देश में कोई वित्त सचिव नहीं 
शायद पहली बार ऐसा हो रहा है जब देश में 11 दिन से कोई वित्त सचिव नहीं है। संसद का मानसून सत्र 21 जुलाई से शुरू हो रहा है। 30 जून 2025 को वित्त सचिव अजय सेठ की सेवा निवृत्ति के बाद वित्त मंत्रालय अनिश्चितता की स्थिति में है। परंपरा के अनुसार वित्त मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले 6 विभागों राजस्व, आर्थिक मामले, व्यय, निवेश, सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन, वित्तीय सेवाएं और सार्वजनिक उद्यम में से सबसे वरिष्ठ सचिव को आमतौर पर केंद्रीय वित्त सचिव नियुक्त किया जाता है। वर्तमान में सबसे वरिष्ठ सचिव के मोसेस चालई हैं, जो मणिपुर कैडर के 1990 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और आदिवासी समुदाय से आते हैं। देर होने का कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 2 जुलाई से 5 देश की लंबी यात्रा मानी जा रही है। मोदी गुरुवार को विदेश यात्रा से भारत आ चुके हैं। माना जा रहा है कि अब आजकल में नए वित्त सचिव की घोषणा हो जाएगी।

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