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5 से 8 एकड़ पर विकसित नहीं कर पाएंगे कॉलोनी; 400 से ज्यादा प्रोजेक्ट पर असर

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इंदौर

नगरीय प्रशासन विभाग के एक नोटिफिकेशन ने इंदौर के रियल एस्टेट से जुड़े छोटे डेवलपर, कॉलोनाइजर और छोटे किसानों के लिए परेशानी खड़ी कर दी है। नोटिफिकेशन के मुताबिक अब कॉलोनी विकास की अनुमति के लिए 4 हेक्टेयर (करीब 10 एकड़) जमीन होना आवश्यक है।

यह नियम अगले मास्टर प्लान आने यानी करीब सालभर तक प्रभावी रहेंगे। इस नोटिफिकेशन से 100 से ज्यादा छोटे किसान, बिल्डर और डेवलपर के 400 से ज्यादा प्रोजेक्ट प्रभावित होंगे। विभाग के प्रमुख सचिव मनीष सिंह द्वारा जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक कॉलोनी विकास के लिए यदि कोई अनुमति मांगी जाती है तो यह जमीन कम से कम 4 हेक्टेयर होना चाहिए। पीएसपी (सार्वजनिक और अर्द्धसार्वजनिक) लैंडयूज के प्रोजेक्ट के लिए भूमि विकास नियम 2012 लागू होंगे।

फॉर्म हाउस बनाने वालों के लिए रास्ते खोले

फॉर्म हाउस की अनुमति भी इसी अधिनियम में दी जा सकेगी। गोडाउन या लॉजिस्टिक की परमिशन के लिए कम से कम दो एकड़ जमीन अनिवार्य है। शर्त यह है कि एप्रोच रोड 18 मीटर चौड़ी हो और अधिकतम निर्मित क्षेत्र 40 प्रतिशत ही मान्य होगा।

शासन की मंशा- जमीनों का लैंडयूज प्रभावित न हो

क्रेडाई मेंबर संदीप श्रीवास्तव का कहना है कि सरकार की मंशा है कि नया मास्टर प्लान लागू हो तब तक जमीनों का लैंडयूज न बिगड़ेे। इससे छोटे किसान, जमीन मालिक या डेवलपर का मामला तो अटक ही गया है। उन्हें अब प्लान आने तक इंतजार ही करना होगा। वे 9 एकड़ तक की जमीन का भी कोई उपयोग तब तक नहीं कर सकते, जब तक कि आसपास का जमीन मालिक उनके साथ पार्टनर न बने।

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