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मेयर और मालिनी में फिर दिखी प्रतिस्पर्धा

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वैसे तो चार नंबर क्षेत्र में राजनीति किस स्तर की होती है, यह किसी से छुपा नहीं है…खासकर भाजपा के उन कार्यकर्ताओं से तो कतई नहीं जो इस राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का शिकार हुए हैं या कह सकते हैं कि प्रतिस्पर्धा को करीब से जानते हैं” खासकर चार नंबर की राजनीति से जुड़े नेता और कार्यकर्ता तो यहां की राजनीति से भलीभांति परिचित हैं” लेकिन हाल ही में नगरीय निकाय चुनाव के बाद शुरू हुई ये नई राजनीतिक प्रतिस्पर्धा मालिनी और मेयर के बीच कई मोर्चों पर नजर आती रही है,ऐसी ही एक प्रतिस्पर्धा सोमवार को देर शाम चार नंबर के ही एक प्रमुख मार्ग फूठी-कोठी चौराहे पर भी देखने को मिली जहां मालिनी तो शिवराज के साथ नजर आई लेकिन मेयर पीछे -पीछे चलते रहे यह नजारा जिसने भी अपनी आंखों से देखा वह अचंभित रह गया कि आखिर यह राजनीति का कैसा चेहरा है, जहां शहर के प्रथम नागरिक राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का शिकार होकर एक आम कार्यकर्ता की भाती असहाय होकर पीछे-पीछे चल रहे हैं” खैर जो भी हुआ अच्छा नहीं हुआ देखकर दुख भी हुआ ,और दर्द भी और यह सिर्फ सीएम के आगमन तक ही सीमित नहीं रहा मंच पर ही मेयर का स्वागत सत्कार के दौरान सबसे आखरी में स्वागत के लिए नाम पुकारना ही काफी कुछ बयां कर गया लेकिन यह कोई पहली बार नहीं है इससे पहले भी कई मोर्चों पर मेयर और मालिनी के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा जगजाहिर हो चुकी है’ हां वह बात अलग है कि दोनों ही एक दूसरे के विरोध में कभी कुछ नहीं कहते क्योंकि पार्टी भारतीय जनता पार्टी है… जहां आपसी गुटबाजी हो या फिर प्रतिस्पर्धा की लड़ाई उसे सार्वजनिक रूप से लड़ने की मनाही है क्योंकि इससे नुकसान पार्टी को तो होगा ही लेकिन इस तरह जगजाहिर कर विवाद को जनता के सामने लाने वाले नेताओं पर भी गाज गिरेगी शायद इसीलिए मालिनी और मेयर कभी खुलकर एक दूसरे के विरोध में कुछ नहीं कहते लेकिन कई मोर्चों पर इन दोनों ही चार नंबर के बड़े नेताओं के बीच प्रतिस्पर्धा राजनीतिक रूप से कई मंचों पर नजर आती रही है… फिलहाल तो यह कहना भी गलत नहीं होगा कि फूटी कोठी के फ्लाईओवर ब्रिज के उद्घाटन के मौके पर मेयर अंदर से फूट-फूटकर रोए होंगे… अब आप सोच रहे होंगे कि आंसू तो दिखे नहीं तो आपको बता दे कि आंतरिक आंसू थे जो राजनीतिक रूप से जरूर दिखते नहीं है लेकिन अंदर ही अंदर बहते रहते हैं..! कहते हैं राजनीति में जो दिखता है वह होता नहीं है और जो होता है वह दिखता नहीं है कुछ इसी तरह के हालात फ्लाईओवर बीच के उद्घाटन के मौके पर नजर आए, जिसमें दोनों ही नेता श्रेय लेने को लेकर संघर्ष करते दिखे हां यह बात जरूर सही है… कि मेयर ने जरूर मंच पर अपनी बात बेबाकी से रखी लेकिन मालिनी ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी इसीलिए यह कहना मुश्किल है कि इस पूरी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा में आखिर जीत किसकी हुई है, फिलहाल चुनाव की तैयारियां भी जोर पकड़ रही है ऐसे में मेयर और मालिनी के बीच जारी यह प्रतिस्पर्धा कहां जाकर रुकती है यह भी देखने वाली बात होगी लेकिन इन दोनों ही नेताओं के बीच जारी वर्चस्व की लड़ाई के बीच आखिर फायदा किसको मिलता है यह भी देखने वाली बात होगी…!

*¶ गफलत में दिखे राकेश जैन, फूठ सकता है,ठिकरा*

एमआईसी मेंबर और वार्ड क्रमांक 85 से पार्षद राकेश जैन ने इस पूरे आयोजन की जिम्मेदारी संभाल रखी थी, तभी तो वे आयोजन खत्म होने के बाद भी अंत तक मौके पर डटे रहे” ऐसे में इन दोनों ही बड़े नेताओं के बीच प्रतिस्पर्धा का ठीकरा उनपर फूट सकता है… क्योंकि उनके जिम्मे ही आयोजन की पूरी जिम्मेदारी थी इसके साथ ही वे विधायक मालिनी के खासे – खास भी माने जाते हैं” जिसके चलते उनपर भी इस मामले पर मेयर नाराज हो सकते हैं? फिलहाल तो सिर्फ इसके कयास ही लगाए जा सकते हैं लेकिन अगर मेयर ने मालिनी के खास राकेश को अगर इस प्रतिस्पर्धा में अपनी राजनीतिक जमीन बनाए रखने के लिए एकपक्षीय फायदा पहुंचाने का जिम्मेदार माना तो राकेश के लिए मुश्किल तो खड़ी हो ही सकती हैं..!

*¶ एमआईसी और पार्षद बनने के बाद पहली बार इतने बड़े आयोजन की जिम्मेदारी*

वैसे तो राकेश जैन राजनीतिक तौर पर कह सकते हैं कि राजनीतिक आयोजनों व उनकी देखरेख को लेकर अनुभवी माने जाते हैं लेकिन यह पहली दफा है जब राकेश जैन पार्षद के साथ ही एमआईसी मेंबर बनने के बाद इतने बड़े स्तर के आयोजन की जिम्मेदारी संभाल रहे थे… खासकर तब जब एक म्यान में दो तलवार हैं, एक मालिनी और दूसरी मेयर फिलहाल राकेश के लिए इन दोनों ही तलवारों की धार के पास जाना किसी खतरे से खाली नहीं है क्योंकि एक तरफ कुआ है तो दूसरी तरफ राकेश के लिए खाई है..! ऐसे मैं राकेश के बारे में कहा जाता है, कि वे अपने आप को सेफ रखने के लिए दो तरफा राजनीति खेलते हैं” जिसमें वे माहिर होने के साथ-साथ मंजे हुए भी हैं…!

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