वरिष्ठ कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने रविवार को पार्टी के विदेश मामलों के विभाग (DFC) के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। हालांकि वे कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य बने रहेंगे। उन्होंने यह कदम इसलिए उठाया ताकि विभाग का पुनर्गठन आसानी से हो सके और युवा नेताओं को मौका मिल सके।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने रविवार को पार्टी के विदेश मामलों के विभाग (DFC) के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। हालांकि वे कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य बने रहेंगे। उन्होंने यह कदम इसलिए उठाया ताकि विभाग का पुनर्गठन आसानी से हो सके और युवा नेताओं को मौका मिल सके। आनंद शर्मा उन जी-23 नेताओं में शामिल थे जिन्होंने कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ आवाज उठाई थी। उनका इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब पार्टी पहले से ही कई चुनौतियों का सामना कर रही है।
आनंद शर्मा ने लगभग दस साल तक DFC का नेतृत्व किया। उन्होंने कांग्रेस के विदेश संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने केंद्रीय मंत्री के रूप में भी काम किया है। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को लिखे अपने इस्तीफे में कहा कि वे चाहते हैं कि समिति का पुनर्गठन हो ताकि युवा नेताओं को शामिल किया जा सके, इससे विभाग का काम सुचारू रूप से चलता रहेगा।
आनंद शर्मा ने कहा कि वे पार्टी नेतृत्व के आभारी हैं जिन्होंने उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी। उन्होंने कहा कि वे DFC के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे रहे हैं ताकि इसका पुनर्गठन हो सके। आनंद शर्मा कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) के सदस्य हैं। वे अंतरराष्ट्रीय मामलों में पार्टी के प्रमुख चेहरे रहे हैं। इस्तीफा देने के बाद भी वे कांग्रेस के सदस्य बने रहेंगे। शर्मा ने बताया कि पिछले कुछ दशकों में DFC ने दुनिया भर में समान विचारधारा वाले दलों के साथ संबंध बनाए और उन्हें मजबूत किया है। ये दल लोकतंत्र, समानता और मानवाधिकारों के मूल्यों को साझा करते हैं।

