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तेलंगाना निकाय चुनावों में कांग्रेस को 5 नगर निगम और 81 नगरपालिकाओं में मिली जीत

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तेलंगाना में कांग्रेस ने पांच नगर निगमों में मेयर पद जीत लिए हैं, जबकि भाजपा और भाकपा ने एक-एक निगम में जीत हासिल की. इसके अलावा कांग्रेस ने 81 नगरपालिकाओं में अध्यक्ष पद पर कब्जा किया. कांग्रेस को 66 नगरपालिकाओं में स्पष्ट बहुमत मिला था, जबकि 18 अन्य नगरपालिकाओं में उसे अन्य दलों और निर्दलियों के समर्थन से अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद हासिल हुए. दिलचस्प बात यह रही कि दो नगरपालिकाओं में कांग्रेस को भाजपा का समर्थन मिला.

तेलंगाना में सत्तारूढ़ कांग्रेस ने हाल ही में हुए चुनावों में सात नगर निगमों में से पांच में मेयर पद जीते, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने एक-एक नगर निगम में जीत हासिल की. कांग्रेस ने नगरपालिकाओं में अपना दबदबा कायम किया और 81 नगरपालिकाओं में अध्यक्ष का पद हासिल किया. तेलंगाना में 11 फरवरी को 116 नगरपालिकाओं और सात नगर निगमों के लिए हुए चुनावों के बाद सोमवार को राज्य भर में नगर निकायों के प्रमुखों के पदों के लिए चुनाव हुए.

मुख्य विपक्षी दल भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) ने 18 नगरपालिकाओं में अध्यक्ष पद हासिल किए, जबकि भाजपा ने एक नगरपालिका में जीत दर्ज की. निर्दलीय उम्मीदवारों ने चार और एआईएफबी (ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक) ने एक सीट जीती.

नगर निगमों की बात करें तो महबूबनगर, मंचेरियल, नलगोंडा और रामागुंडम नगर निगमों में कांग्रेस ने मेयर और डिप्टी मेयर दोनों पदों पर कब्जा किया. कोठागुडेम नगर निगम में कांग्रेस की सहयोगी सीपीआई के मूड गणेश मेयर चुने गए, जबकि कांग्रेस की एस. ललिता कुमार डिप्टी मेयर बनीं. यहां 60 सदस्यीय निगम में कांग्रेस और सीपीआई को 22-22 सीटें मिली थीं.

निजामाबाद नगर निगम में कांग्रेस की के. उमा रानी को एआईएमआईएम के समर्थन से मेयर चुना गया, जबकि एआईएमआईएम की सलमा तहसीन डिप्टी मेयर बनीं. इससे कांग्रेस भाजपा को रोकने में सफल रही, जो सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी. हालांकि, करीमनगर नगर निगम में कांग्रेस भाजपा को नहीं रोक सकी. 66 सदस्यीय निगम में 30 सीटें जीतने वाली भाजपा ने निर्दलियों के समर्थन से मेयर और डिप्टी मेयर पद हासिल कर लिया.

आदिलाबाद नगरपालिका में निर्दलीय पार्षद बंदारी अनुशा अध्यक्ष चुनी गईं, जबकि एआईएमआईएम के मोहम्मद रोहित उपाध्यक्ष बने. यहां भाजपा 21 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी थी, जबकि कांग्रेस को 11, बीआरएस और एआईएमआईएम को छह-छह सीटें मिली थीं. पांच निर्दलीय भी चुने गए थे. भैंसा नगरपालिका में भी अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों पदों पर निर्दलीयों की जीत हुई.

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