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छावनी अनाज मंडी में सोयाबीन के कम भाव को लेकर फिर विवाद,किसानों ने 3 घंटे मंडी में नीलामी रुकवाई

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समर्थन मूल्य से नीचे नीलामी शुरू करने से मंडी कर्मचारियों के प्रति किसानों ने जताया आक्रोष*

 *इंदौर। छावनी अनाज मंडी में  किसानों को तोल  और मौल में लूटने की कोशिशों के खिलाफ किसानों की विरोध की प्रवृत्ति  बढ़ती जा रही है । आज भी सुबह जब सोयाबीन की नीलामी शुरू हुई और मंडी कर्मचारियों ने समर्थन मूल्य से दो तिहाई भाव में नीलामी शुरू की तो किसानों ने आपत्ति की ।सोयाबीन का समर्थन मूल्य ₹4200 प्रति कुंतल है जबकि मंडी समिति के नीलाम करता कर्मचारी ने ₹3000 से बोली शुरू की । इस पर किसानों ने आपत्ति ली उनका कहना था कि समर्थन मूल्य से बोली शुरू की जाना चाहिए, फिर व्यापारी कुछ भी बोली लगाएं।*

उक्त जानकारी देते हुए संयुक्त किसान मोर्चा के संयोजक रामस्वरूप मंत्री और महासचिव बबलू जाधव ने बताया कि  मंडी अधिनियम में भी  स्पष्ट रूप से  समर्थन मूल्य से ही बोली शुरू किए जाने का प्रावधान  है  लेकिन  मंडी कर्मचारी  लगातार व्यापारियों से मिलीभगत कर इसका उल्लंघन कर रहे हैं और किसानों का माल ओने पौने दामों पर बिकवा रहे हैं। दुधिया के किसान मनोज गुर्जर और  उपस्थित अन्य न्किसानों का कहना था कि मंडी के नीलाम करता कर्मचारी व्यापारियों से इशारे इशारे में कुछ तय करते हैं और फिर कम भाव से बोली शुरू करते हैं । इसे लेकर आज के किसानों ने विरोध जताया करीब 2000 बोरी सोयाबीन की आवक थी। कई गाड़ियां लाइन में खड़ी थी और जब नीलामी शुरू की गई तो किसानों ने आपत्ति लेते हुए अपना माल नीलाम ना करने का फैसला किया । जिसके चलते करीब 3 घंटे मंडी में नीलामी बंद रही।

  संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने बताया कि आखिरकार में मंडी सचिव के हस्तक्षेप के बाद फिर से नीलामी शुरू हुई मंडी सचिव नरेश परमार ने नीलाम कर रहे कर्मचारी को शो कॉज नोटिस दिया है। इस विरोध के चलते जो सोयाबीन ₹3800 में बिक रहा था वह बाद में ₹4000 प्रति क्विंटल में बिका। हालांकि यह भाव भी समर्थन मूल्य से कम है , इस तरह से आने वाले दिनों में जब मंडी में आवक बढ़ेगी तो विरोध के स्वर ज्यादा उठेंगे  । किसान मोर्चा ने कहां है कि मंडी प्रशासन को अपने मंडी कर्मचारियों पर व्यापारी से मिलीभगत के जो आरोप लग रहे हैं उस पर ध्यान देते हुए सख्त कार्यवाही करना चाहिए।

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