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अरबों रुपए के घोटाले की जांच में कोरोना बना रोड़ा

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जल संसाधन विभाग में अधिकारियों की मिलीभगत से हुए करोड़ों रुपए के घोटाले
भोपाल।
 भोपाल – कोरोना संक्रमण फैलने की वजह से कार्यालयों में कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ है। यही वजह है कि जांच एजेंसियों द्वारा विभिन्न घोटालों में कई जा रही जांच के काम भी लगभग ठप हो गए हैं। इसमें जल संसाधन विभाग में हुए अरबों रुपए के ई-टेंडरिंग घोटाला अहम है। इसमें ईओडब्ल्यू द्वारा एक और नया मामला दर्ज किया गया है।
जिसमें तीन हजार तीन सौ करोड़ रुपए से अधिक के टेंडरों में 877 करोड़ रुपए का अधिक भुगतान टेंडर डॉक्यूमेंट में स्वीकृति से तीन वर्ष पहले का है। दरअसल इस पूरे मामले में जल संसाधन विभाग के अफसरों की मिलीभगत सामने आई है। यही वजह है कि ईओडब्ल्यू ने नई प्राथमिकी दर्ज कर इसकी जांच शुरू की है। हालांकि देश के साथ ही प्रदेश में कोरोना की दूसरी लहर के बढ़ते प्रकोप के कारण जांच में पेंच आ गया है। वही अब ऐसी स्थिति में ईओडब्ल्यू में जल संसाधन विभाग को पत्र लिखकर संबंधित पूरे दस्तावेज मांगे है
फोरेंसिक जांच रिपोर्ट आएगी पता नहीं
दूसरी ओर ईओडब्ल्यू को तीन हजार करोड़ के ई-टेंडरिंग में हुई टेम्परिंग मामले में अभी तक सीईआरटी की रिपोर्ट आने का इंतजार है। हालांकि यह रिपोर्ट कब आएगी किसी को कोई पता नहीं है। इस घोटाले में पांच विभाग जल निगम, पीडब्ल्यूडी, एमपीआरडीसी, जल संसाधन और पीआईयू के टेंडर घोटालों की जांच के अलावा ईओडब्ल्यू ने एनवीडीए और एग्रीकल्चर के 75 हजार करोड रुपए से अधिक के 32 टेंडर घोटाले शामिल हैं। इसमें प्रोक्योरमेंट पोर्टल की हार्डडिस्क को फॉरेंसिक जांच के लिए सीईआरटी को भेजा हुआ है। इनकी टेक्निकल रिपोर्ट आने के बाद ईओडब्ल्यू इन मामलों में अलग से कार्यवाही करेगा।
उल्लेखनीय है कि जल निगम को छोड़कर अन्य चारों विभागों में स्थानांतरित अफसरों के स्थान पर आए दूसरे अफसर पूर्व अफसरों के डिजिटल सिग्नेचर के माध्यम से टेंडर जारी करते रहे। जांच में साक्ष्यों के आधार पर इनकी पुष्टि हो चुकी है। इन मामलों में उक्त विभागों के ओपन अथॉरिटी अफसरों को नामजद किया गया है। यदि हैदराबाद की सीईआरटी लैब की रिपोर्ट में टेंपरिंग सामने आती है तो उक्त अफसरों के खिलाफ न्यायालय में चालान पेश किया जाएगा।
यह है निर्माण कार्य की स्थिति
पिछले वर्ष दिसम्बर माह तक के भुगतान और काम की स्थिति पर नजर डालें तो गोंड़ बांध में मेंटेना कंस्ट्रक्शन लिमिटेड को 750 करोड रुपए की अनुबंध राशि के बदले  243.95 करोड़ का भुगतान किया गया जबकि बांध और नहर का काम शून्य है। निरगुढ़ बांध में एसएन पांडे कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड एंड रेडब्रिज इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड को 69.66 करोड़ रुपए के बदले 30.39 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया। वहीं बांध का काम 60 व नहर का काम पांच प्रतिशत ही हुआ है। इसी तरह गोगरी बांध में करण डेवलपमेंट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड ग्वालियर को 241 करोड रुपए के अनुबंध राशि के बदले 258.43 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया गया जबकि बांध का काम 90 प्रतिशत और नहर का काम पचास प्रतिशत ही हुआ है।
बर्धा बांध में करण डेवलपमेंट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड ग्वालियर को 119.1 करोड रुपए की अनुबंधित राशि के बदले 41.42 करोड़ रुपये का भुगतान किया जबकि बांध काम 90 फीसदी और नहर का काम दस प्रतिशत ही हो पाया है। इसी तरह सातानगर बांध एलसीजी प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड गुजरात को 277.18 करोड़ की राशि के बदले 152.24 करोड रुपए का भुगतान किया गया जबकि बांध और नहर का काम पचास-पचास प्रतिशत ही हुआ है।https://googleads.g.doubleclick.net/pagead/ads?client=ca-pub-3145509372542302&output=html&h=280&adk=1433559594&adf=278242722&pi=t.aa~a.435853155~i.15~rp.1&w=900&fwrn=4&fwrnh=100&lmt=1618304624&num_ads=1&rafmt=1&armr=3&sem=mc&pwprc=6995881272&psa=1&ad_type=text_image&format=900×280&url=https%3A%2F%2Fwww.bichhu.com%2Fbreaking-news%2Fcorona-became-a-hurdle-in-the-investigation-of-billions-of-rupees-scam%2F&flash=0&fwr=0&pra=3&rh=200&rw=900&rpe=1&resp_fmts=3&wgl=1&fa=27&adsid=ChEI8ILVgwYQgsj-ysyC6vjoARI5AH0NTreSo5rAuF4LJjEOzY1hgBSqKfnVktgM01um6L0kjl9wQHaGvFsi5S8RelyGw3-hMM7wK4_O&uach=WyJXaW5kb3dzIiwiNi4xIiwieDg2IiwiIiwiODkuMC40Mzg5LjExNCIsW11d&dt=1618308617671&bpp=20&bdt=3247&idt=20&shv=r20210407&cbv=r20190131&ptt=9&saldr=aa&abxe=1&cookie=ID%3D5c1b3a8f889cdfbb-22fe6f63eec6000f%3AT%3D1617237935%3ART%3D1617237935%3AS%3DALNI_MZQQiM3f2QZcY5TFL3Z7v2a5xQtfA&prev_fmts=728×90%2C728x90%2C0x0&nras=2&correlator=3238250421792&frm=20&pv=1&ga_vid=20318418.1617237934&ga_sid=1618308616&ga_hid=2143207160&ga_fc=0&u_tz=330&u_his=9&u_java=0&u_h=768&u_w=1366&u_ah=728&u_aw=1366&u_cd=24&u_nplug=3&u_nmime=4&adx=70&ady=1775&biw=1349&bih=625&scr_x=0&scr_y=0&eid=21067214%2C44735931%2C44740079&oid=3&pvsid=2839272753892902&pem=1&ref=https%3A%2F%2Fwww.bichhu.com%2F&eae=0&fc=384&brdim=0%2C0%2C0%2C0%2C1366%2C0%2C1366%2C728%2C1366%2C625&vis=1&rsz=%7C%7Cs%7C&abl=NS&fu=128&bc=31&jar=2021-04-13-10&ifi=4&uci=a!4&btvi=1&fsb=1&xpc=SquxhCrId7&p=https%3A//www.bichhu.com&dtd=43
हनोता बांध के फलौदी कंस्ट्रक्शन एंड इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड को 584.67 करोड़ की अनुबंधित राशि के बदले 27.23 करोड़ रुपए का भुगतान हुआ। वहीं इसमें नहर व बांध का काम शून्य प्रतिशत ही है। बंडा बांध में फलोदी कंस्ट्रक्शन एवं इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड को 1296 करोड़ की अनुबंधित राशि के बदले 224.1 करोड़ का भुगतान हुआ जबकि काम कुछ भी नहीं हुआ है।
ये थी विभाग की परियोजनाएं
उल्लेखनीय है कि जल संसाधन विभाग को अगस्त 2018 से फरवरी 2019 के बीच कुल सात परियोजनाओं के टर्नकी आधार पर बांध एवं प्रेशराइज्ड वाइप नहर प्रणाली निर्माण पर 3333 करोड़ रुपए की स्वीकृति मिली थी। बांधों का निर्माण व जलाशयों से जल्द उद्वहन कर निश्चित क्षेत्र में पंप हाउस, प्रेशराइज्ड, पाइप लाइन से जल प्रदाय किया जाना था। रीवा जिले के गंगा कहार के मुख्य अभियंता द्वारा शासन के संज्ञान में यह जानकारी लाई गई कि गोंड वृहद परियोजना के लिए मई 2019 को शासन की ओर से भुगतान की शर्तों को शिथिल कर दिया गया है।
निविदा शर्तों को विलोपित करने का आदेश जारी
खास बात यह है कि इसमें टेंडर की शर्तों को शिथिल करने संबंधी निर्देश शासन स्तर से जारी नहीं किए गए। बल्कि तत्कालीन प्रमुख अभियंता ने शासन का अनुमोदन प्राप्त किए बिना ही शर्त को विलोपित करने संबंधी आदेश अपने स्तर से सभी मुख्य अभियंताओं को जारी कर दिया था। गौरतलब है कि निविदा प्रपत्रों के भुगतान शेड्यूल में उल्लेखित शर्तों को विलोपित करने संबंधी आदेश जल संसाधन विभाग के तत्कालीन प्रमुख अभियंता द्वारा अपने स्तर से 27 मई 2019 को जारी किया था।

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