मंत्री के निर्देशों पर भारी पड़ रहे हैं भ्रष्टाचारी
Ramswaroop Mantri
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किसानों के धान खरीदी के 5 करोड़ 72 लाख का भुगतान नहीं किए जाने के बाद भी गेट पास बनवाकर निकासी करवा दी गई थी भोपाल। मप्र में सरकार किसी की भी हो , लेकिन भ्रष्टाचारी हमेशा उस पर भारी पड़ते रहते हैं। ऐसा ही कुछ है कृषि विभाग के तहत आने वाले मंडी बोर्ड का। इस बोर्ड में 27 मामलों की फाइलें गड़बड़ी करने वालों पर कार्रवाई का इंतजार सालों से कर रही हैं। खास बात यह है कि इस मामले में विभागीय मंत्री द्वारा आदेश दिए जाने के बाद भी कोई कार्रवई अधिकारियों द्वारा नहीं की जा रही है। इससे यह तो सिद्ध हो गया है कि सरकार पर वे भारी पड़ रहे हैं। प्रदेश के 258 बड़ी मंडियों में पद अफसरों द्वारा आने पद का दुरुपयोग कर बडेÞ पैमाने पर गड़बड़झाला किया गया था। इसकी मिली शिकायतों की जांच कराई गई तो लगभग 27 मामलों में गड़बड़ी की शिकायतें सही पाई गईं। इनकी जांच रिपोर्ट कार्रवाई की अनुशंसा करने के साथ मंडी बोर्ड संचालक के कार्यालय को सौंप दी गई थीं। इसके बाद भी अब तक उन फाइलों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। खास बात यह है कि इनमें से कई मामलों में तो बीते छह साल से कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है। यही नहीं गड़बड़ी करने वालों को इसके बाद भी उनके मनमाफिक जगहों पर पदस्थापना जरुर दी जाती रही है। प्रदेश में बीते साल भाजपा की सरकार बनी तो कमल पटेल को कृषि विभाग की कमान सौंपी गई। उन्होंने विभाग का कामकाज संभालने के बाद ऐसे मामलों में तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए थे। यही नहीं इन मामलों में गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा द्वारा भी मीडिया के सामने कार्रवाई करने का भरोसा दिलाते हुए दावा किया गया था कि बेवजह देरी पर संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब भी किया जाएगा। यह है गड़बड़ी पर कार्रवाई नहीं होने की बानगी भोपाल की करोद मंडी में 2014 में प्लॉटों की नीलामी में आर्थिक क्षति की जांच मंडी बोर्ड के अपर संचालक अमर सिंह सिंगर और गौरव की जांच समिति ने सही पाने के बाद तत्कालीन सचिव योगेश नागर सहित अन्य के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की थी , लेकिन इस मामले में अब तक कुछ भी नहीं हुआ। इसी तरह से भोपाल और रायसेन सहित कई जिलों के किसानों से धान खरीदी के बाद 5करोड़ 72 लाख का भुगतान नहीं किए जाने के बाद भी धान का गेटपास बनवाकर उसकी निकासी करवाने वाले तत्कालीन सचिव प्रदीप मलिक पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। यही नहीं पिपरिया मंडी में किसानों से खरीदी गई अच्छी मूंग की बोरियों को बदल कर खराब मंूग की बोरियां रख दी गई थीं। इस मामले का खुलासा एसडीएम के छापे में होने के बाद भी लीपापोती कर मामले को दफन कर दिया गया।