Site icon अग्नि आलोक

*कफ सिरप कांड: जांच का निचोड़, Coldrif Syrup में जानलेवा घातक केमिकल*

Share

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में कफ सिरप पीने से बच्चों की मौत पर केंद्र सरकार ने राज्यसभा में जवाब दिया है. केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की ओर से संसद में बताया कि जिस Coldrif Syrup का सेवन बच्चों ने किया था, उसमें घातक केमिकल(DEG) की मात्रा 46.28% पाई गई. यह मात्रा जानलेवा होती है और किसी भी दवा में इसकी मौजूदगी पूरी तरह प्रतिबंधित है.

जांच में क्या पाया गया?
केंद्र सरकार ने कहा कि मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में बच्चों की मौत की एक श्रृंखला की रिपोर्ट मिलने पर एक महामारी विज्ञानी, एक सूक्ष्म जीव विज्ञानी, एक कीट विज्ञानी और राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी), राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (एनआईवी) और केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) के औषधि निरीक्षकों सहित विशेषज्ञों की एक केंद्रीय टीम ने क्रमशः छिंदवाड़ा और नागपुर का दौरा किया और मध्य प्रदेश राज्य अधिकारियों के साथ समन्वय में रिपोर्ट किए गए मामलों और मौतों की विस्तृत जांच की.

प्रभावित बच्चों द्वारा कथित तौर पर सेवन की गई कुल 19 दवाओं के नमूने, इलाज करने वाले निजी चिकित्सकों और आस-पास के खुदरा स्टोरों से परीक्षण के लिए एकत्र किए गए. इन 19 नमूनों के रासायनिक विश्लेषण से पता चला कि 15 नमूने मानक गुणवत्ता के थे, जबकि 4 नमूनों को मानक गुणवत्ता (एनएसक्यू) के नहीं घोषित किया गया.

डाइएथिलीन ग्लाइकॉल की मात्रा 46.28%
परीक्षण रिपोर्ट के अनुसार, तमिलनाडु के कांचीपुरम स्थित मेसर्स श्रीसन फार्मास्युटिकल द्वारा निर्मित और मृत बच्चों द्वारा सेवन किए गए सिरप कोल्ड्रिफ (बी.नं. एसआर-13) में डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (डीईजी) की मात्रा 46.28% w/v पाई गई.

मेसर्स श्रीसन फार्मास्युटिकल्स के परिसर का निरीक्षण किया गया. अस्वास्थ्यकर भंडारण स्थितियों सहित कई गंभीर और प्रमुख अच्छे विनिर्माण व्यवहार (जीएमपी) उल्लंघन पाए गए. निर्माता के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई का मामला सीडीएससीओ द्वारा तमिलनाडु राज्य सरकार के समक्ष उठाया गया. वहीं राज्य औषधि नियंत्रक, तमिलनाडु ने विनिर्माण लाइसेंस रद्द कर दिया.

प्रतिबंध लगाने और वापस मंगाने का आदेश
इसके अलावा, घटना के बाद, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, ओडिशा और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी, जिन्हें आपत्तिजनक कफ सिरप की आपूर्ति की गई थी, ने तत्काल प्रतिबंध लगाने और उसे वापस मंगाने का आदेश दिया. इसके अलावा, तीन अक्टूबर 2025 को सभी राज्य/संघ राज्य क्षेत्र के स्वास्थ्य विभागों और स्वास्थ्य सेवा सुविधाओं को बाल चिकित्सा कफ सिरप के तर्कसंगत उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए एक परामर्श जारी किया गया है.

साथ ही औषधि नियंत्रक (भारत) ने सात अक्टूबर 2025 को सभी राज्य/संघ राज्य क्षेत्र औषधि नियंत्रकों को औषधि नियम, 1945 के तहत परीक्षण आवश्यकताओं का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया, और 27 अक्टूबर को उन्हें नकली और घटिया दवाओं के खिलाफ कड़ी सतर्कता बनाए रखने और औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के तहत त्वरित कार्रवाई करने का निर्देश दिया.

राज्य प्राधिकरणों के समन्वय में 700 से अधिक कफ सिरप निर्माताओं का गहन ऑडिट किया गया है. केंद्रीय और राज्य औषधि नियामकों द्वारा सिरप के निर्माण की बाज़ार निगरानी और नमूने भी बढ़ाए गए हैं.

राज्यों को एडवाइजरी और सख्त निर्देश
3 अक्टूबर 2025: बच्चों में कफ सिरप के ‘रैशनल यूज़’ पर राज्यों को एडवाइजरी जारी.
7 अक्टूबर 2025: सभी राज्य ड्रग कंट्रोलरों को टेस्टिंग नियमों का कड़ाई से पालन कराने का निर्देश.
27 अक्टूबर 2025: नकली और घटिया दवाओं पर हाई अलर्ट और तुरंत कार्रवाई के आदेश.
इंडियन फार्माकोपिया कमिशन ने IP 2022 में संशोधन कर दिया है. अब सिर्फ कच्चे माल नहीं बल्कि तैयार सिरप (finished product) की भी DEG और EG की अनिवार्य टेस्टिंग होगी.

Exit mobile version