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ग्रेडिंग और गुणवत्ता के नाम पर किसानो से 256 करोड़ रुपए लूटने की साजिश: माकपा

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भोपाल। सरकारी खरीद केन्द्रों पर अगले महीने से गेहूं की खरीदी शुरू हो रही है और प्रदेश सरकार ने इस बार खरीदी में किसानो के 256 करोड़ रुपए एक निजी कंपनी की तिजोरी में डालने की व्यवस्था कर दी है। यह गेहूं की ग्रेडिँग और गुणवत्ता के बहाने किसानों को लूटने की साजिश का हिस्सा है।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट  पार्टी के राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने उक्त बयान जारी करते हुए कहा है कि मंडी व्यवस्था और उसके बाद गोदामों में होने वाले सारे भ्रष्टाचार का दोष भी किसानो के मत्थे मड़ कर किसानो की इस लूट के लिए सरकार ने खरीदी केंद्रों  पर ग्रेडिंग और गुणवत्ता मापने के लिए निजी कंपनियों से टेंडर आमंत्रित किए हैं। इसके तहत एक क्विंटल गेहूं की ग्रेंडिंग के लिए किसानो को 20 रुपए देना होगा। अनुमान है कि इस वर्ष किसानो से 128 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जाएगा। इस तरह 256 करोड़ किसानो से लूट कर संबंधित कं नी की तिजोरी को भरा जाएगा।
माकपा नेता ने कहा है कि इससे सिर्फ किसानो की लूट ही नहीं बढ़ेगी बल्कि सरकार की ओर से एक और बिचोलिआ तैयार कर दिया है, जो उक्त फीस के अलावा भी किसानों से वसूली करेगा। ग्रेंडिंग और क्वालिटी निर्धाीिरत करते समय वह कं नी किसानो से सौदेबाजी करेगी। अच्छी क्वालिटी और जल्दी तुलाई का झांसा देकर किसानो से और भी वसूली की जाएगी। 
जसविंदर सिंह ने कहा है कि यह मंडियों के निजीकरण करने की साजिश का भी हिस्सा है जिसके खिलाफ किसानो ने सवा साल तक ऐतिहासिक संघर्ष कर मोदी सरकार को  पीछे हटने के लिए बाध्य किया है।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट  पार्टी ने किसानो की लूट को बढ़ावा देने वाली इस व्यवस्था को लागू नहीं करने की मांग की है।

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