इंदौर/ बैतूल. मध्य प्रदेश में लापरवाह स्वास्थ्य व्यवस्था के कारण बैतूल में जहरीले कफ सिरप कांड में तीसरी और इंदौर दूषित जल त्रासदी में 32वीं मौत हो गई है. जानकारी के अनुसार बैतूल जिले के आमला ब्लॉक के टीकाबर्री गांव के हर्ष यदुवंशी की मौत नागपुर AIIMS में हो गई, जो कोल्ड्रिफ कफ सिरप से जुड़े कांड में तीसरी मौत है. दूसरी ओर इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से अनीता कुशवाह (65) की मौत के बाद कुल मौतें 32 हो गई हैं. एक महीने से अस्पताल में जिंदगी-मौत की जंग लड़ रही अनीता की हालत किडनी फेलियर और कार्डियक अरेस्ट से बिगड़ी. ये मौतें न केवल व्यक्तिगत त्रासदी हैं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की विफलता का प्रमाण हैं, जहां बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं.बैतूल के टीकाबर्री गांव के हर्ष यदुवंशी की नागपुर AIIMS में मौत हो गई, जो कोल्ड्रिफ कफ सिरप से प्रभावित तीसरा मामला है. उसका तीन महीने से इलाज चल रहा था. इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से अनीता कुशवाह (65) की मौत के बाद यहां अब तक कुल 32 मौतें हो चुकी हैं. अब तक 3500 से ज्यादा लोग बीमार हुए थे, जिसमें से 450 ठीक हुए. तीन मरीज अभी गंभीर हैं.
जहरीले कोल्ड्रिफ कफ सिरप में डायथाइलीन ग्लाइकोल (DEG) की उच्च मात्रा पाई गई, जो इंडस्ट्रियल सॉल्वेंट है और किडनी फेलियर का कारण बनता है. छिंदवाड़ा में सबसे ज्यादा 26 मौतें हुईं, जहां परासिया के डॉ प्रवीण सोनी ने हर्ष को यह सिरप दिया था. बैतूल में पहले दो बच्चों की मौत के बाद हर्ष सबसे लंबे समय तक जिंदगी की जंग लड़ा, लेकिन अंत में हार गए. उनका पोस्टमार्टम नागपुर AIIMS में हुआ. विशेषज्ञों का कहना है कि DEG जैसी मिलावट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समस्या है, और भारत में भी सख्त नियम जरूरी हैं.
इंदौर भागीरथपुरा दूषित जल त्रासदी में 32वीं मौत, अभी भी 3 लोगों की हालत नाजुक
इंदौर में भागीरथपुरा के पानी में बैक्टीरिया और टॉक्सिन्स पाए गए, जिससे डायरिया, उल्टी और डिहाइड्रेशन हुआ. 28 दिसंबर से अनीता की तबीयत अचानक बिगड़ी, कई अस्पतालों में इलाज चला, लेकिन वेंटिलेटर पर उनका निधन हो गया. परिवार वालों की मानें तो अनीता दूषित जल त्रासदी के पहले तक बिलकुल स्वस्थ थीं. उल्टी दस्त के कारण उनकी हालत बिगड़ी तो उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था. हालत कुछ ठीक हुई तो उन्हें परिवार वाले घर ले आए थे, लेकिन दोबारा उनकी तबीयत बिगड़ी और उन्हें दूसरी बार अस्तपाल में भर्ती कराना पड़ा. इस बार उनकी नाजुक हालत के कारण उन्हें अरबिंदो से बॉम्बे हॉस्पिटल रेफर किया गया था. यहां उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया लेकिन बचाया नहीं जा सका. इंदौर दूषित जल त्रासदी के कारण 3500 से ज्यादा लोग प्रभावित हुए. इनमें से करीब 450 ठीक हो चुके हैं. हालांकि अभी भी तीन मरीज गंभीर हैं.

