Site icon अग्नि आलोक

भाजयुमो की न्याय यात्रा को देखते हुए करौली में कर्फ्यू की ढील में कटौती

Share

एस पी मित्तल, अजमेर

राजस्थान में विधानसभा के चुनाव अगले वर्ष नवंबर में होने है। यानी चुनाव में अपनी डेढ़ वर्ष से भी ज्यादा का समय शेष है, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अभी से ही कांग्रेस की हार का बहाना ढूंढ लिया है। 2 अप्रैल को हिन्दू नववर्ष के अवसर पर करौली में जो हिंसा हुई, उसके संदर्भ में गहलोत कई बार कह चुके हैं कि भाजपा और हिन्दूवादी संगठन वोटों का ध्रुवीकरण करने में लग गए हैं ताकि विधानसभा का चुनाव जीता जा सके। गहलोत ने करौली हिंसा के लिए भाजपा और हिन्दूवादी संगठनों को जिम्मेदार ठहराया है। यदि कोई संगठन हिंसा कर रहा है तो दोषियों के खिलाफ कार्यवाही करने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है। सवाल उठता है कि ध्रुवीकरण करने वालों के विरुद्ध प्रदेश के गृहमंत्री होने के नाते अशोक गहलोत कार्यवाही क्यों नहीं करते? करौली हिंसा के बाद गहलोत सरकार ने धार्मिक जुलूसों एवं कार्यक्रमों को लेकर जो पाबंदियां लगाई है, उससे लोगों में ज्यादा नाराजगी है। लोगों का कहना है कि हिन्दुओं के धार्मिक समारोहों को नियंत्रित करने के लिए गहलोत सरकार ने पाबंदियां लगाई है। आमतौर पर सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक समारोह के बैनर फ्लैक्स झंडियां आदि सामग्री लगाई जाती है, लेकिन गहलोत सरकार ने इस पर भी रोक लगा दी है। कांग्रेस की तुष्टीकरण की नीतियों से लोगों में पहले ही नाराजगी थी, लेकिन हिन्दू पर्वों के अप्रैल माह में ताजा पाबंदियों से नाराजगी बढ़ गई है। संभवत: इस नाराजगी को भांपते हुए ही मुख्यमंत्री गहलोत ने अभी से ही हार का बहाना ढूंढ लिया है। ताकि जब अगले वर्ष कांग्रेस की हार हो तो गहलोत कह सके कि उन्होंने तो डेढ़ वर्ष पहले ही बता दिया था। गहलोत हार का कोई भी बहाना बनाएं, लेकिन यह सही है कि अशोक गहलोत के मुख्यमंत्री रहते प्रदेश में कांग्रेस की कभी जीत नहीं हुई। वर्ष 2003 में जब गहलोत के नेतृत्व में चुनाव लड़ा तो कांग्रेस को 200 में से 52 सीटें मिली। 2013 में जब गहलोत के मुख्यमंत्री रहते कांग्रेस ने चुनाव लड़ा तब मात्र 21 सीटें मिलीं। 2023 में होने वाले तीसरी बार के चुनाव का परिणाम अभी सामने नहीं आया है, लेकिन अशोक गहलोत ने डेढ़ वर्ष पहले अपनी ओर से कांग्रेस की हार का कारण बता दिया है।

कर्फ्यू की ढील में कटौती:
करौली में हालात सामान्य हो रहे हैं। इसलिए 12 अप्रैल को प्रशासन ने कर्फ्यू में 9 घंटे की ढील दी। यानी दिनभर बाजार खुले रहे और आवागमन आसानी से होता रहा। लेकिन 13 अप्रैल को प्रशासन ने कर्फ्यू की ढील में कटौती कर दी। 13 अप्रैल को सुबह 6 बजे से 10 बजे तक ही कर्फ्यू में ढील दी गई, यानी मात्र चार घंटे लोगों के रखने गए। असल में 13 अप्रैल को भाजयुमो ने करौली में न्याय निकालने की घोषणा की थी। इसके लिए भाजयुमो के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजस्वी सूर्या भाजपा सांसद व अभिनेता रवि किशन आदि करौली पहुंच भी गए। इन दोनों नेताओं के साथ भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया, युवा मोर्चे के प्रदेशाध्यक्ष हिमांशु शर्मा आदि भी साथ रहे। लेकिन कर्फ्यू के कारण न्याय यात्रा पर प्रतिकूल असर पड़ा। जयपुर पहुंचने पर तेजस्वी सूर्या ने कहा कि एक समय में बिहार में जिस तरह लालू प्रसाद का जंगल राज था, वैसे ही आज राजस्थान में अशोक गहलोत का जंगल राज है। सूर्या ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की तुष्टीकरण की नीति के चलते करौली में दोषी व्यक्तियों को बचाया जा रहा है। जिन घरों से शोभायात्रा पर पत्थर फेंके गए उनके मालिकों के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं हो रही, उल्टे जो हिन्दू पत्थरबाजी में घायल हुए उन्हें ही मुल्जिम बना लिया गया है। सूर्या ने कहा कि राजस्थान की जनता अशोक गहलोत के इस शासन को देख रही है। आने वाले चुनावों में गहलोत को अपने जंगलराज के बारे में पता चल जाएगा।
q

Exit mobile version