बारामती में शरद पवार और उनके पोते पार्थ-जय पवार के बीच हुई 90 मिनट की गोपनीय बैठक ने महाराष्ट्र की सियासत में हलचल मचा दी है. अजित पवार के निधन के बाद इस मुलाकात के कई मायने निकाले जा रहे हैं. कयास लगाए जा रहे हैं कि यह बैठक एनसीपी के दोनों गुटों के संभावित विलय या 2026 में होने वाले राज्यसभा चुनावों में पार्थ पवार की दावेदारी को लेकर हो सकती है.
महाराष्ट्र की राजनीति इस वक्त एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां हर मुलाकात एक नया समीकरण बना रही है. बुधवार को बारामती स्थित ‘विद्या प्रतिष्ठान’ के परिसर में जब शरद पवार और उनके पोते पार्थ व जय पवार एक बंद कमरे में मिले, तो कयासों का बाजार गर्म हो गया. लगभग डेढ़ घंटे तक चली इस गुपचुप चर्चा ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या अजित पवार के निधन के बाद अब एनसीपी के दोनों गुटों के विलय का समय आ गया है? या फिर यह सिर्फ एक पारिवारिक संवेदना की मुलाकात थी?
पार्थ पवार की बड़ी छलांग: राज्यसभा पर टिकी नजर?
राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा पार्थ पवार की राजनीतिक महत्वाकांक्षा को लेकर है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पार्थ की नजर अपनी मां सुनेत्रा पवार की वर्तमान राज्यसभा सीट पर नहीं है, क्योंकि उसका कार्यकाल केवल 2028 तक का आंशिक हिस्सा ही है. पार्थ पवार की नजर अप्रैल 2026 में खाली होने वाली उन 7 राज्यसभा सीटों पर है, जो पूरे छह साल का कार्यकाल देंगी. सबसे दिलचस्प बात यह है कि इनमें से एक सीट खुद शरद पवार की है. सवाल यह है कि क्या शरद पवार अपनी विरासत के तौर पर यह सीट पार्थ को सौंपने के लिए तैयार होंगे?
राज्यसभा चुनाव 2026 का गणित: क्या कहता है आंकड़ा?
महाराष्ट्र से राज्यसभा पहुंचने के लिए एक उम्मीदवार को कम से कम 37 विधायकों के वोटों की जरूरत होती है. वर्तमान में एनसीपी (अजित गुट) के पास 41 विधायक हैं, जो पार्थ पवार को आसानी से संसद भेजने के लिए पर्याप्त हैं.
कोटा = कुल विधायक/खाली सीटें + 1) + 1
यदि 2026 में 7 सीटें खाली होती हैं, तो 288 विधायकों के हिसाब से यह संख्या 37 बैठती है. महायुति गठबंधन (बीजेपी, शिवसेना, एनसीपी) की मजबूत स्थिति को देखते हुए पार्थ के लिए छह साल का कार्यकाल हासिल करना गणितीय रूप से बहुत आसान लग रहा है.
दिवंगत NCP प्रमुख अजित पवार की पत्नी और राज्यसभा सांसद सुनेत्रा पवार ने 31 जनवरी, 2026 को मुंबई के लोक भवन में राज्य की पहली महिला उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की. (PTI फोटो)
विलय पर शरद पवार के स्टैंड को लेकर सस्पेंस बरकरार
हालांकि शरद पवार ने प्रेस वार्ता में साफ कहा कि फिलहाल उनका ध्यान परिवार को दुख से उबारने पर है और राजनीतिक फैसलों या विलय के बारे में कोई चर्चा नहीं हुई है. उन्होंने सुनेत्रा पवार के उपमुख्यमंत्री बनने पर खुशी भी जाहिर की और कहा कि ‘हमारा परिवार एक साथ है’. लेकिन राजनीतिक पंडित इसे ‘तूफान से पहले की शांति’ मान रहे हैं. यदि 12 फरवरी को विलय की बात सच साबित होती है, जैसा कि पहले दावा किया गया था, तो महाराष्ट्र की राजनीति का सबसे बड़ा ‘यू-टर्न’ देखने को मिल सकता है.
राजनीति के साथ-साथ शरद पवार ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर भी चिंता जताई. उन्होंने आगाह किया कि अगर अमेरिका भारत में कृषि उत्पादों का निर्यात बढ़ाता है, तो इससे भारतीय किसानों को भारी नुकसान हो सकता है. उन्होंने राहुल गांधी के संसद में दिए बयानों और पूर्व आर्मी चीफ जनरल नरवणे की बातों पर भी चर्चा की जरूरत बताई.

