कमलनाथ सरकार काे गिराने वाले कांग्रेस के दलबदलू नेता घर वापसी करना चाहते हैं। यह दावा नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ. गोविंद सिंह का है। गुरुवार को भोपाल में मीडिया से बात करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा- ज्यादातर लोग स्वार्थवश गए थे। रुपयों के लिए गए भाजपा में शामिल हुए इन नेताओं काे पूरे रुपए नहीं मिले, ताे इधर आने की फिराक में हैं। पीठ में छुरा घोंपने वालों के लिए पार्टी में जगह नहीं है। हमें वफादार कार्यकर्ता चाहिए, 100 गद्दारों की जरूरत नहीं है।
क्या कहा- नेता प्रतिपक्ष ने
‘कांग्रेस छोड़कर जो लोग भाजपा में गए हैं, उनके नाम तो नहीं बताऊंगा, लेकिन मुझे पिछले हफ्ते तीन-चार विधायकों ने कहा है कि हमें वापस बुला लो… हमसे गलती हो गई। हमने पूछा- तुम्हें कितने पैसे मिले थे, तो वे बोले-18-18 करोड़ रुपए। बाकी रुपए सिंधिया जी ने कहा था- दे देंगे… अब दे ही नहीं रहे। कांग्रेस के सभी वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता देश में एकता का काम कर रहे हैं। भाजपा ने भाईचारे में जो विघ्न डाला है, उसे खत्म करने के लिए राहुल गांधी 5500 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर रहे हैं। भारत जोड़ो यात्रा से भाजपा सरकार का सफाया होगा। सिंह ने कहा- कमलनाथ जी ने आदिवासी विधायकों, नेताओं के साथ चर्चा की है। अकेले जयस मुद्दा नहीं हैं। सभी आदिवासी संगठनों के साथ लेकर कांग्रेस पार्टी चुनाव लड़ेगी।’
कुलस्ते के बयान पर बोले- देर आए, दुरुस्त आए
डॉ. गोविंद सिंह ने कहा कि केंद्रीय मंत्री फग्गन कुलस्ते देर आए, दुरुस्त आए। पढ़े-लिखे इंजीनियर, पीएचडी होल्डर, डॉक्टर आज रोजी-रोटी के लिए परेशान हो रहे हैं। वो असहाय होकर रोजगार न मिलने के कारण सुसाइड कर रहे हैं। कुलस्ते जी को धन्यवाद देता हूं। कम से कम उन्होंने सच्चाई को स्वीकार किया। वे सरकार पर ऐसा दबाव डालें कि ज्यादा से ज्यादा सरकारी नौकरियां मिलें। भाजपा सरकार में नौकरियां खत्म हो रही हैं। जिस बच्चे को लाखों की जमीन बेचकर कर्ज लेकर पढ़ाया कि बुढ़ापे में बेटा नौकरी करके सहारा बनेगा, लेकिन पढ़े लिखे बच्चे दिन-रात नौकरी की तलाश में भटक कर सुसाइड कर रहे हैं। मप्र में बेरोजगारी के हालात सबसे ज्यादा खराब है।
सैंया भए कोतवाल, तो डर काहे का
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि ‘जब सैंया भए कोतवाल तो डर काहे का..’ वे उमा भारती के रिश्तेदार हैं। सीएम कहते हैं कि माफियाओं को जमीन में गाड़ देंगे, सूली पर लटका देंगे, लेकिन प्रदेश में जो भाजपा और आरएसएस के समर्थक गुंडे माफिया हैं, उनमें से किसी पर भी कार्रवाई नहीं हो रही। अधिकारी-कर्मचारी पीटे जा रहे हैं। सही काम करने पर अधिकारियों पर हमले हो रहे हैं। भाजपा नेताओं के संरक्षण में गुंडे-माफिया पनप रहे हैं।
पीईबी का नाम बदलने से कुछ नहीं होगा
पीईबी का नाम बदलने पर नेता प्रतिपक्ष ने कहा- पहले व्यापमं में भ्रष्टाचार कर मुंह काला करवाया। इसके बाद पीईबी किया, फिर उसमें भी घोटाला हुआ। नाम बदलने से घोटाले नहीं रुकने वाले।
सिंधिया के साथ गए थे 22 विधायक, फिर लाइन लग गई
मार्च 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ 22 विधायकों के भाजपा में शामिल होने से कमलनाथ सरकार गिर गई थी। सत्ता परिवर्तन के बाद कुछ और विधायकों ने भाजपा जॉइन की। इनके साथ कार्यकर्ता भी दूसरी पार्टी में गए। – नेपानगर विधायक सुमित्रा देवी कास्डेकर – सचिन बिरला, बड़वाह – प्रद्धुम्न लोधी, बड़ामलहरा – राहुल लोधी, दमोह – पूर्व विधायक अरुणोदय चौबे।
इन 22 विधायकों ने दिया था इस्तीफा
1- प्रदुम्न सिंह तोमर
2- रघुराज कंसाना
3- कमलेश जाटव
4- रक्षा सरोनिया
5- जजपाल सिंह जज्जी
6- इमरती देवी
7- प्रभुराम चौधरी
8- तुलसी सिलावट
9- सुरेश धाकड़
10- महेंद्र सिंह सिसोदिया
11- ओपी एस भदौरिया
12- रणवीर जाटव
13- गिरराज दंडोतिया
14- जसवंत जाटव
15- गोविंद राजपूत
16- हरदीप डंग
17- मुन्ना लाल गोयल
18- ब्रिजेंद्र यादव
19- इमरती देवी
20-बिसाहू लाल सिंह
21-ऐदल सिंह कसाना
22- मनोज चौधरी
सिंधिया के साथ बीजेपी में शामिल होने वाले विधायकों की मार्च 2020 की तस्वीर

