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डिलि‍मिटेशन का प्‍लान !मगर चाबी तो अख‍िलेश के पास

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टीएमसी में टूट के बीच चंद्रबाबू नायडू ने खुलकर बताया क‍ि एनडीए के अंदर इस वक्‍त क्‍या चल रहा है. उन्‍होंने कहा- बीजेपी के नेतृत्‍व वाला एनडीए एक बार फ‍िर डिलि‍मिटेशन बिल संसद में पेश करेगा. यह आज की जरूरत है और हम चाहते हैं क‍ि इसे जल्‍द से जल्‍द पास कराया जाए, ताक‍ि संसद में मह‍िलाओं को आरक्षण द‍िया जा सके. उन्‍होंने व‍िपक्ष पर गलत जानकारी शेयर करने और हंगामा करने का आरोप जड़ द‍िया. सवाल ये क‍ि क्‍या सरकार इसे पास करा पाएगी? उसके पास क‍ितने नंबर हैं. टीएमसी में टूट के बाद 20 सांसद म‍िल गए, डीएमके साथ दे सकता है और उद्धव के 7 सांसद आ भी जाएं तो क्‍या दो त‍िहाई बहुमत जुट जाएगा? चाबी तो अभी भी अख‍िलेश यादव के हाथ में होगी.

डिलि‍मिटेशन ब‍िल पास कराने के ल‍िए संव‍िधान में 131वां संशोधन करना होगा. इसका मकसद लोकसभा की मौजूदा सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 तक करना है. इसके बाद 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन होगा और सीटों की संख्‍या बढ़कर 850 तक हो जाएंगी. यानी इतने सांसद तब चुने जाएंगे. इसी में 33 फीसदी सीटें मह‍िलाओं को आरक्षण देना है. बीजेपी इसे क‍िसी भी कीमत पर पास कराना चाहती है. लेकिन इस ब‍िल को पास कराने के लिए सरकार दो त‍िहाई बहुमत चाह‍िए. ये नंबर अभी सरकार के पास नहीं हैं.

दो ति‍हाई बहुमत के ल‍िए क‍ितने सांसद चाह‍िए?

लोकसभा में अभी तीन सीटें खाली हैं, संख्‍या बनती है 540… अगर सभी सदस्‍य मतदान करें तो दो-तिहाई बहुमत के ल‍िए चाह‍िए 360 वोट… जो क‍ि सरकार के पास अभी नहीं है. राज्यसभा में कुल सदस्य संख्या 245 है, जहां दो-तिहाई बहुमत के लिए 164 वोट चाहिए.

संसद में नंबर का गण‍ित क्‍या कह रहा?

  1. बीजेपी के पास 240, टीडीपी के 16, जेडीयू के 12, श‍िवसेना श‍िंदे गुट के 7 और च‍िराग की पार्टी के 5 सांसदों को म‍िला दें तो एनडीए के पास अभी 293 सांसद हैं.
  2. अब अगर इसमें टीएमसी के बागी गुट से आए 20 सांसद भी जोड़ दें. एनडीए के पास आंकड़ा बढ़कर 313 हो जाएगा. लेकिन यह अभी भी दो त‍िहाई बहुमत से काफी कम है.
  3. खेल यहीं से शुरू होता है. क्‍योंक‍ि डीएमके कांग्रेस से नाराज है. वह एक-आध संशोधन कराकर या तो ब‍िल का समर्थन कर सकती है या सदन से वॉकआउट कर सकती है. डीएमके के पास इस वक्‍त 22 सांसद हैं. अगर वह समर्थन करती है तो एनडीए के पास वोटों की संख्‍या 335 तक पहुंच जाएगी.इसके बाद उद्धव ठाकरे की पार्टी का नंबर आता है. दावा क‍िया जा रहा है क‍ि उनके 7 सांसद श‍िंदे गुट के साथ आ सकते हैं. अगर ऐसा हुआ तो ये 7 सांसद भी ब‍िल पर सरकार को समर्थन दे सकते हैं. इससे नंबर पहुंच जाएगा 342…
  4. अब हम उन 5 सांसदों को भी जोड़ दें, ज‍िन्‍होंने अप्रैल में बिल पेश होने के दौरान एनडीए को सपोर्ट क‍िया था तो यह नंबर बढ़कर 347 तक पहुंच जाएगा. इसके बाद भी सरकार दो त‍िहाई बहुमत वाले आंकड़े से दूर नजर आती है.

राज्यसभा का गण‍ित क्‍या कह रहा?

राज्यसभा में फिलहाल NDA के पास करीब 149 सांसद हैं. सदन में दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा 164 माना जाता है. 18 जून को 10 राज्यों की 25 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होने हैं, जिनके बाद NDA की संख्या बढ़ने की संभावना है. हालांकि, मौजूदा स्थिति में NDA अभी भी दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े से करीब 15 सांसद दूर है. यानी चुनावों में बेहतर प्रदर्शन के बाद भी उसे पूर्ण संवैधानिक बहुमत हासिल करने के लिए कुछ अतिरिक्त दलों या निर्दलीय सदस्यों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है.

यहीं पर अखि‍लेश यादव की जरूरत

समाजवादी पार्टी के 37 सांसद हैं. अगर इन्‍हें जोड़ ल‍िया जाए तो यह संख्‍या 384 तक पहुंच जाती है, यानी बहुमत के पार. लेकिन अख‍िलेश यादव प‍िछली बार इस ब‍िल का जमकर व‍िरोध कर चुके हैं. वे इसे मह‍िला व‍िरोधी भी बता चुके हैं. ऐसे में इस बिल पर सरकार का साथ देना उनके ल‍िए आसान नहीं होगा. लेकिन ये हो सकता है क‍ि कुछ गेम प्‍लान बन जाए और उनकी पार्टी के सांसद हंगामा करके सदन से वॉकआउट कर जाएं. अगर ऐसा क‍िया तो कांग्रेस नाराज हो सकती है, क्‍योंक‍ि कांग्रेस इसका जबरदस्‍त व‍िरोध कर रही है. अगले साल यूपी में व‍िधानसभा चुनाव होने हैं, और अख‍िलेश चाहेंगे क‍ि वे क‍िसी ऐसे व‍िवाद में न पड़ें, ज‍िससे कोई वोटर नाराज हो. मह‍िलाओं का वोट बहुत मायने रखता है. इसल‍िए अख‍िलेश के रुख पर सबकी नजर होगी.

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