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उज्जैन हादसे के मृतकों को 1 करोड़ का मुआवज़ा और गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज़ करने की माँग

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उज्जैन के नागझिरी की बिंदल पोहा फैक्टरी में बॉयलर फटने से लगी भीषण आग में तीन महिलाओं के जिंदा जलने और एक पुरुष के 70%  से अधिक झुलस जाने की घटना पर एस.यू.सी.आई(कम्युनिस्ट) के राज्य सचिव कॉम प्रताप सामल ने गहरी पीड़ा और क्षोभ व्यक्त किया है।

समाचार माध्यमों से प्राप्त जानकारी के आधार पर फैक्ट्री में 15-16 महिला पुरुष बायलर पर काम कर रहे थे। बॉयलर फटा और 3 महिलाओं समेत 4 मज़दूर प्लांट से निकल न पाने के कारण ज़िंदा जल गए।

कॉम. सामल ने रोष व्यक्त करते हुए कहा है कि दरअसल ये निरीह लाचार मज़दूर, मालिकों के मुनाफ़े की भूख और शिवराज सरकार की नीतियों की भट्टी में ज़िंदा जले हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार  मालिकों के बेरोकटोक मुनाफे को सुनिश्चित करने के लिए इस कदर तुली हुई है कि इस के रास्ते में मज़दूरों की न्यूनतम सुरक्षा के लिए होने वाले थोड़े बहुत खर्च को बचाने की मालिकों की लालची प्रवृत्ति को खुला बढ़ावा देने में भी उसने कोई शर्म नहीं की है। सरकार ने अत्यंत निर्लज्जता से कोविड काल में ही यह घोषणा कर दी थी, कि प्रदेश में तीन साल के लिए सभी श्रम कानून निलंबित रहेंगे। कोई भी लेबर इंस्पेक्टर कारखानों में जाँच के लिए खुद नहीं जा सकेगा।

परिणाम स्वरूप कारखानों में फैक्ट्री एक्ट, श्रम कानूनों का धड़ल्ले से उल्लंघन हो रहा है।

कारखाना मालिक किसी भी निरीक्षण के डर से बेखौफ होकर मुनाफे की बेरहम लूट में लगे हुए हैं,और इसमें सबसे ज्यादा जोखिम पर है, मज़दूरों की सुरक्षा।

उन्होंने ज़ोर देते हुए कहा है कि ये हादसा नहीं, हत्या है।

और ऐसे समय पर जब प्रदेश में तीन महिलाओं को आपराधिक लापरवाही के चलते ज़िंदा जला दिया गया हो,तब प्रदेश के मुखिया एक ट्वीट से अपनी कर्तव्य की इतिश्री कर निर्लज्जता से उत्सव मनाने में लगे हुए हैं।

उन्होंने इस हादसे के लिए सीधे तौर पर ज़िम्मेदार फैक्टरी मालिक सहित सुरक्षा नियमों के उल्लंघन में मिलीभगत करने वाले अफसरों पर तत्काल गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज करने और मृतकों को 1-1 करोड़, एवं घायलों को 50-50 लाख का मुआवज़ा दिए जाने की मांग की है।

उन्होंने राज्य सरकार से ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए तत्काल सभी कारखानों में निरीक्षण करवाने और कमी पाए जाने पर दंडात्मक कार्यवाही की मांग की है और प्रदेश के मेहनतकश लोगों से मुनाफे के भूखे भेड़ियों से सरकारी मिलीभगत के खिलाफ ज़ोरदार जनांदोलन छेड़कर सभी श्रम कानूनों की बहाली के लिए अविराम संघर्ष करने का आह्वान किया है।

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