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चुनाव खत्म होते ही डेरा प्रमुख राम रहीम21 दिन बाद जेल पहुंचा; क्या वोट जुटाने भर का चेहरा है बाबा?

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नई दिल्ली

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम 21 दिन की फरलो खत्म होने के बाद वापस रोहतक की सुनारिया जेल पहुंच चुका है। इन 21 दिनों के दौरान राम रहीम का ज्यादातर समय गुरुग्राम के नाम चर्चा घर के अंदर ही बीता। राम रहीम को पंजाब चुनाव के दौरान फरलो मिलने के कारण इस फैसले पर सवाल भी उठे। चर्चा रही कि हरियाणा की भाजपा सरकार ने पंजाब चुनाव में डेरे के 40 लाख समर्थकों की वोट के लालच में राम रहीम पर राहत की बरसात की।

बहरहाल, इस दौरान राम रहीम से किन-किन लोग मिला, क्या आगे भी उसे ऐसी सहूलियत मिलती रहेगी और इस बार मिली छूट से क्या बड़े संकेत गए, ऐसे तमाम सवालों को लेकर दैनिक भास्कर ने पड़ताल की।

राम रहीम को 21 दिनों की मोहलत मिलने से कौन से 10 सवाल उठे, आइए आपको बताते हैं…

गुरुग्राम के सेक्टर 50 में स्थित नाम चर्चा घर में 21 दिनों तक कैद रहा राम रहीम। सिक्योरिटी इतनी सख्त थी कि छत को टेंट से घेरकर रखा गया था ।

क्या कोई नहीं मिला राम रहीम से?
8 फरवरी को गुरुग्राम के सेक्टर-50 स्थित नाम चर्चा घर में राम रहीम से केवल उसके बेटे, बहू और परिवार के लोगों के अलावा हनीप्रीत ने ही मुलाकात की।

हालांकि, इसे भी गुपचुप ही रखा गया है। किसी ने पुष्टि नहीं की। वहीं, परिवार से बाहर के किसी सदस्य ने भी आज तक ये नहीं कहा कि वह राम रहीम से मिला। इसकी भी पुष्टि नहीं हुई कि राम रहीम ने डेरा या अपने फॉलोअर्स के लिए ही किसी तरह का संदेश जारी किया। इन सवालों के जवाब अब तक नहीं मिले कि राम रहीम से कोई बाहरी शख्स मिला या नहीं।

तो वो कौन थे जो काफिले में आते थे?
राम रहीम के गुरुग्राम के ठिकाने पर फरीदाबाद, गुरुग्राम, दिल्ली, पंजाब के नंबरों वाली गाड़ियों का काफिला आता-जाता रहा। इनमें स्कॉर्पियो, इनोवा, फॉर्च्यूनर जैसी गाड़ियां शामिल रहती थीं, जिनके शीशों पर काली फिल्म चढ़ी होती थी। इनके आते ही नाम चर्चा घर का गेट खुलता और ये अंदर समा जाती थीं। गाड़ियों के भीतर कौन बैठा है, ये कोई भांप भी नहीं सकता था।

अब हरियाणा के पंचायत चुनाव में मिलेगी फरलो?
कहा जा रहा है कि जिस तरह से इस बार बाबा राम रहीम को फरलो मिली, उससे आगे के लिए भी राह खुल गई है। बड़ी वजह ये है कि हरियाणा में पंचायत चुनाव होने वाले हैं। डेरे के फॉलोअर्स का इन चुनावों में भी बड़ा रोल रहेगा। डेरे का प्रभाव हरियाणा में भी उतना ही है, जितना पंजाब में। इसका भी भाजपा सरकार को फायदा मिल सकता है।

राम रहीम के गुरुग्राम स्थित नाम चर्चा घर में रहने के दौरान आसपास सख्त पहरा था।

किसके डायरेक्शन पर चला राम रहीम?
कानून के जानकारों की मानें तो राम रहीम ने फरलो के किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं किया। इस वजह से राम रहीम ने समय-समय पर जेल से बाहर आने की राह तैयार कर ली है। आगे भी वह कानूनी दांवपेच का इस्तेमाल कर बाहर आने की कोशिश करता रहेगा। इसके सबूत हरियाणा सरकार की तरफ से हाईकोर्ट में दाखिल एफिडेविट में भी नजर आए। एफिडेविट में सरकार ने कहा था कि राम रहीम पेशेवर अपराधी नहीं है।

राम रहीम से परिवार भी क्यों रहा दूर-दूर?
21 दिन की फरलो पर 8 फरवरी को रोहतक की सुनारिया जेल से बाहर आने के बाद राम रहीम गुड़गांव स्थित अपने नाम चर्चा घर पहुंचा। उसी दिन परिवार के लोगों ने उससे मुलाकात की। दो दिन बाद उसकी मुंहबोली बेटी हनीप्रीत भी मिलने पहुंची।

इसके बाद परिवार के लोगों ने भी शायद ही कभी गुरुग्राम के नाम चर्चा घर का रुख किया। हनीप्रीत भी दोबारा मिलने नहीं पहुंची। इससे सवाल उठे कि क्या राम रहीम को लेकर परिवार में अब पहले जैसी दिलचस्पी नहीं रही या ये सब पहले से तैयार प्लान के तहत किया गया।

पंजाब चुनाव की तारीख नजदीक आने की वजह से डेरा की पॉलिटिकल विंग सक्रिय हो चुकी थी। विंग से जुड़े लोगों के राम रहीम से मिलने की चर्चाएं जब तब उड़ती रहीं, लेकिन किसी ने भी इसकी पुष्टि नहीं की कि किन-किन लोगों ने राम रहीम से मुलाकात की।

हाईकोर्ट के एक्शन का कितना डर?
नाम चर्चा घर की चारों तरफ से किलेबंदी की गई थी। गेट पर हरियाणा पुलिस के जवान तैनात रहते थे। छत को चारों तरफ से तंबुओं से घेरा गया था ताकि अंदर का नजारा किसी कीमत पर न दिखाई दे।

चुनाव के बीच राम रहीम को मिली पैरोल का मामला पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में भी जा पहुंचा। कोर्ट ने हरियाणा सरकार से जवाब तलब कर लिया। कोर्ट की सख्ती के डर से राम रहीम ने ज्यादा सक्रियता नहीं दिखाई।

जेल जैसा क्यों बीता जेल के बाहर का दौर?
जेल से बाहर राम रहीम के बीते 21 दिन भी कैद से कुछ अलग नहीं रहे। केवल जगह ही बदली, क्योंकि राम रहीम से मिलने के लिए न तो भक्त आ सकते थे, न ही बाबा को कहीं आने जाने की आजादी थी। यहां तक कि डेरा के सबसे बड़े केंद्र सिरसा में भी बाबा के भक्त उसका इंतजार ही करते रह गए।

डेरे पर चारों तरफ पुलिस का पहरा था। राम रहीम की चुनिंदा लोगों से मुलाकात कराई गई। एक तरह से राम रहीम को जेल से बाहर लाने का मामला पूरी तरह रणनीतिक बनकर रह गया। यहां तक कि राम रहीम अपने भक्तों को कोई संदेश भी नहीं दे सका।

राम रहीम के गुरुग्राम स्थित नाम चर्चा घर पर जो भी गतिविधियां रहीं, वे पंजाब चुनाव खत्म होने के साथ ही लगभग बंद हो गईं। लोगों का भी आना जाना कम हो गया। यहां तक कि राम रहीम से मिलने के लिए परिवार के लोग भी कम ही आते। एक तरह से राम रहीम यहां अकेला रह गया।

पहले क्यों रद्द हुईं फरलो अर्जियां?
पहले कई बार जब भी राम रहीम ने पैरोल के लिए अर्जी लगाई तो हरियाणा की भाजपा सरकार ने सुरक्षा वजहों को बताकर अर्जी खारिज कर दी। चुनाव के दौरान राम रहीम को किस आधार पर पैरोल दी गई, इस पर तमाम सवाल उठे। चर्चा रही कि डेरा के 40 लाख फॉलोअर्स की सहानुभूति पाने के लिए भाजपा ने ये राम रहीम को पैरोल दिलाया। 10 मार्च को आने वाले चुनाव नतीजे बताएंगे कि भाजपा को इसका फायदा पहुंचा या और नुकसान हो गया।

21 दिनों के दौरान न भक्त राम रहीम से मिल पाए और न बाबा ही किसी और डेरे पर जा सका।

आखिरी दिन तक जश्न भी नहीं मनाने दिया गया?
रविवार यानी 27 फरवरी को राम रहीम की पैरोल का आखिरी दिन था। चर्चा रही कि शाम को राम रहीम के परिजन और कुछ करीबी लोग मिलकर नाम चर्चा घर में पार्टी का कर सकते हैं। कुछ गाड़ियों का काफिला भी यहां आता दिखा, लेकिन पुलिस सूत्रों के मुताबिक जश्न जैसा कुछ भी नहीं हुआ।

VVIP सुरक्षा से भी कोई संदेश दिया गया?
आज पूरी सुरक्षा के बीच राम रहीम को रोहतक की सुनारिया जेल वापस पहुंचा दिया गया। इस दौरान गुरुग्राम के सेक्टर 50 स्थित नाम चर्चा घर से मानेसर टोल, पचगांव चौराहा, कुंडली- मानेसर- पलवल हाइवे से रोहतक ले जाया गया। इस दौरान सिक्योरिटी वीवीआईपी के दौरे जितनी ही सख्त रही। टोल पर वीआईपी लाइन खुली रखी गई ताकि गाड़ियां ना रुकें। रोहतक एसपी पर सुरक्षा की बड़ी जिम्मेदारी रही। जेल की तरफ के सभी रास्ते बंद रखे गए। राम रहीम की जेड प्लस सुरक्षा भी कायम रही। गुरुग्राम के अलावा झज्जर, और रोहतक पुलिस पूरी तरह मुस्तैद रही। वहीं इंटेलिजेंस और डीजीपी भी उसकी जेल वापसी पर नजर बनाए रहे।

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