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रिकॉर्ड मैन्युफैक्चरिंग के बावजूद देश में फिर वेंटिलेटर का संकट; सरकार ने खरीदे, लेकिन अस्पतालों में लगाए नहीं

Frank Schleibach, head physician of anaesthesiology, shows the functioning of a ventilator in the Viersen General Hospital in North Rhine-Westphalia, Germany on March 20, 2020.

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मार्च 2020 की बात है। पूरी दुनिया में कोरोना के केस तेजी से बढ़ रहे थे। उसी रफ्तार से बढ़ रही थी वेंटिलेटर की मांग। मौके की नजाकत को समझते हुए सरकार एक्शन मोड में आ गई। अधिकारियों, कॉर्पोरेट घरानों और वेंटिलेटर मैन्युफैक्चरर्स के साथ बैठक की। सभी ने इस चुनौती को स्वीकार किया और रिकॉर्ड टाइम में 3.96 लाख वेंटिलेटर बना दिए।

सरकार ने जून 2020 में पीएम केयर फंड से 50 हजार वेंटिलेटर्स की सप्लाई का ऑर्डर भी दिया, लेकिन आगे चलकर हालात सुधरने से इनकी मांग घट गई। लिहाजा देश में वेंटिलेटर्स का जखीरा लग गया। इस वक्त देश कोरोना की दूसरी लहर पर सवार है। 14 अप्रैल को पिछले 24 घंटे में पहली बार रिकॉर्ड 1 लाख 85 हजार 104 नए मामले सामने आए। इसलिए देश में एक बार फिर वेंटिलेटर्स की कमी की खबरें आ रही हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब वेंटिलेटर्स इतने बड़े पैमाने पर बनाए गए तो दोबारा क्यों खड़ा हुआ संकट?

कोरोना की दूसरी लहर और वेंटिलेटर की कमी

50 हजार से 3.96 लाख वेंटिलेटर का सफर
एसोसिएशन ऑफ इंडियन मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री (AiMed) ने मार्च 2020 के आखिर में वेंटिलेटर बनाने वाली यूनिट का दौरा किया। उस वक्त प्रति महीने 5500 से 5750 वेंटिलेटर प्रति महीने बनाने की क्षमता थी। AiMed के फोरम को-ऑर्डिनेटर राजीव नाथ ने एक प्रेस नोट में कहा था कि मई तक इस क्षमता को बढ़ाकर 50 हजार प्रति महीने कर लिया जाएगा।

केंद्र सरकार ने जून 2020 में 50 हजार वेंटिलेटर्स की सप्लाई का ऑर्डर दिया। इसके लिए पीएम केयर फंड से 2 हजार करोड़ रुपए जारी किए गए थे। इनमें 30 हजार वेंटिलेटर्स भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) से, 10 हजार AgVa हेल्थकेयर से, 5,650 AMTZ बेसिक से, 4000 वेंटिलेटर AMTZ हाई एंड से और 350 वेंटिलेटर अलायड मेडिकल से खरीदे गए।

जब इतने वेंटिलेटर खरीदे तो फिर अस्पतालों में कमी क्यों?

दूसरी लहर की तैयारी में कहां हुई चूक?
वेंटिलेटर्स के मौजूदा संकट पर राजीव नाथ का कहना है कि जब कोविड-19 के केस कम हो रहे थे, सरकार को वेंटिलेटर खरीद कर अपनी क्षमता बढ़ा लेनी चाहिए थी। दूसरी लहर की तैयारी करनी थी, लेकिन सरकार ने स्टॉक को मैनुफैक्चरर के पास ही छोड़ दिया। मांग कम होने से कंपनियों को आर्थिक संकट का भी सामना करना पड़ रहा है। उनकी बनाई डिवाइस गोदामों में धूल फांक रही हैं।

स्कैनरे टेक्नोलॉजी के फाउंडर विश्वप्रसाद अल्वा कहते हैं, ये सिर्फ कोविड-19 की दूसरी लहर की बात नहीं है। सरकार को ऐसी इमरजेंसी के लिए तैयार रहना चाहिए, जहां वेंटिलेटर की मांग अचानक बढ़ जाती है। सरकार की जिम्मेदारी है कि जो करीब 60 हजार वेंटिलेटर्स खरीदे गए हैं, उन्हें अस्पतालों में लगाया जाए और नियमित रूप से देखभाल हो, वर्ना ये स्टॉक भी खराब हो जाएगा।

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