5 नवंबर, 2021 को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तराखंड के केदारनाथ पहुंचे थे. जैसा अक्सर होता है कि भारतीय मीडिया ने इसकी पल-पल की कवरेज लाइव दिखाई. इसके अलावा इसी भ्रमण को लेकर उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने लोगों को मैसेज भी भेजा. जिसपर 49.73 लाख रुपये खर्च हुए हैं.
ये कोई अकेला मामला नहीं है. इसी तर्ज पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कई बार मैसेज भेजे हैं. ये ऐसे मैसेज हैं जो आपने शायद पढ़े भी न हों. लेकिन इन मैसेजेस को आप तक पहुंचाने में सरकार ने लाखों रुपये खर्च कर दिए हैं.
दरअसल, बीते साल 13 जुलाई 2024 को हरेला पर्व के मौके पर प्रदेशवासियों को व्हाट्सएप के जरिए बधाई संदेश भेजे गए. इस पर 37.48 लाख रुपये खर्च किए गए. यही नहीं इसके ठीक एक महीने बाद एक बार फिर 13 अगस्त को हरेला पर बधाई संदेश भेजा, इस बार भी 37.45 लाख रुपये खर्च किए गए यानी एक हरेला त्यौहार के मौके पर मुख्यमंत्री ने जनता को दो बार बधाई दी, जिसपर 75 लाख रुपये खर्च किए.
इसी तरह अगर आप पीवीआर सिनेमा हॉल में फिल्म देखने गए हों तो उत्तराखंड सरकार का विज्ञापन देखा ही होगा. धामी सरकार ने साल 2023-24 में इस तरह के विज्ञापनों पर 17.44 करोड़ रुपये खर्च किए है.
यह तो बस कुछेक उदाहरण हैं.
पिछले पांच सालों में उत्तराखंड की भारतीय जनता पार्टी सरकार ने विज्ञापनों पर कुल 1001.07 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. इस हिसाब से औसतन प्रति दिन लगभग 55 लाख रुपये सिर्फ प्रचार-प्रसार पर खर्च किए गए.
न्यूज़लॉन्ड्री के पास वित्त वर्ष 2020-21 से लेकर 2024-25 तक उत्तराखंड सरकार द्वारा विज्ञापनों पर किए गए खर्च के दस्तावेज मौजूद हैं. ये आंकड़ें बताते हैं कि पुष्कर सिंह धामी के मुख्यमंत्री बनने से पहले विज्ञापनों पर सरकार कम खर्च करती थी, लेकिन उनके सत्ता में आने के बाद खर्च तेजी से बढ़ा है.
2020-21 में जब प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत थे, उस वर्ष विज्ञापनों पर कुल खर्च 77.71 करोड़ रुपये था. मार्च, 2021 में त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस्तीफा दे दिया. उनकी जगह तीरथ सिंह रावत मुख्यमंत्री बने. फिर रावत ने भी 4 जुलाई 2021 को इस्तीफा दे दिया और पुष्कर सिंह धामी प्रदेश के मुख्यमंत्री बने.
धामी के मुख्यमंत्री बनने के बाद साल 2021-22 में विज्ञापनों पर यही खर्च चार गुना तक बढ़ कर 227.35 करोड़ रुपये हो गया. और बीते साल यानि 2024-25 में यह खर्च 290.29 करोड़ रुपये तक पहुंच गया.
इस तरह उत्तराखंड राज्य सरकार ने विज्ञापनों पर काफी पैसा खर्च किया. स्टोरी के इस हिस्से में हम आपको टेलीविजन मीडिया पर हुए खर्च पर विस्तार से बात करेंगे.
पांच सालों में 426 करोड़ से ज्यादा का विज्ञापन
पिछले पांच सालों में उत्तराखंड सरकार ने टेलीविजन मीडिया को दिए गए विज्ञापनों पर लगभग 427 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. इसमें से 402 करोड़ रुपये बीते चार सालों में दिए गए हैं. इन चार सालों के दौरान धामी मुख्यमंत्री की कुर्सी पर थे, सिवाय 2021-22 के तीन महीने को छोड़कर जब तीरथ सिंह रावत सीएम थे.
धामी के कार्यकाल में समाचार पत्रों (129.6 करोड़ रुपये), डिजिटल (61.9 करोड़ रुपये), रेडियो (30.9 करोड़ रुपये), फिल्म (23.4 करोड़ रुपये), एसएमएस (40.4 करोड़ रुपये), आउटडोर विज्ञापन (49.5 करोड़ रुपये), पुस्तिकाओं (56 करोड़ रुपये) और समाचार पत्र एजेंसियों (128.7 करोड़ रुपये) पर कुल 923 करोड़ रुपये खर्च किए गए.
बीजेपी सरकार ने सिर्फ प्रदेश के क्षेत्रीय और राष्ट्रीय समाचार चैनलों को विज्ञापन दिए बल्कि नागालैंड, ओडिशा और असम सहित देश के विभिन्न हिस्सों में संचालित छोटे-बड़े समाचार चैनलों को भर-भर के विज्ञापन दिए हैं.
इन चार सालों में, राष्ट्रीय चैनलों को कुल 105.7 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ. इनमें सबसे ज्यादा न्यूज़ 18 इंडिया को मिले हैं. जो बीते चार सालों से लगातार शीर्ष पर है. मालूम हो कि रिलायंस के स्वामित्व वाले नेटवर्क 18 समूह को अकेले 2024-25 में 5.69 करोड़ रुपये प्राप्त हुए.
वहीं, बीते वित्तीय वर्ष 2024-25 में, टाइम्स नाउ को 4.79 करोड़ रुपये, जबकि आजतक सहित टीवी टुडे नेटवर्क को 4.62 करोड़ रुपये मिलने का जिक्र है. इस साल एनडीटीवी ने भी लाभार्थी के रूप में पहली बार महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसने अडाणी समूह द्वारा अधिग्रहण के कुछ महीनों बाद 2.88 करोड़ रुपये कमाए.
वहीं, क्षेत्रीय चैनलों को कुल 296.8 करोड़ रुपये दिए गए, जो राष्ट्रीय चैनलों को दी गई राशि से कहीं ज़्यादा है. दरअसल, 2021-22 में, जब राज्य के विधानसभा चुनावों हो रहे थे तो इन चैनलों को 98.79 करोड़ रुपये का विज्ञापन दिया गया. कुल 38 क्षेत्रीय चैनलों को ये सरकारी धन मिला, जिनमें से छह चैनलों को 4 करोड़ रुपये और 9 चैनलों को 3 करोड़ रुपये से ज़्यादा मिले.
