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*कटघरे में रामदेव, लपेटे में धामी सरकार*

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सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि के विवादित विज्ञापन केस में बाबा रामदेव और बालकृष्ण के दूसरे माफीनामे को भी खारिज कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “हम अंधे नहीं हैं. वह इस मामले में उदार नहीं होना चाहते.”

सुप्रीम कोर्ट ने इतने लंबे समय तक पतंजली के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने के लिए उत्तराखंड लाइसेंसिंग प्राधिकरण को फटकार लगाते हुए आड़े हाथों लिया. SC ने कहा- “उत्तराखंड सरकार ने खतरनाक उत्पादों को बेचने के लिए रामदेव के साथ मिलीभगत की और लाखों भारतीयों के जीवन को खतरे में डाला.”

सुप्रीम कोर्ट को इस धोखाधड़ी के लिए सरकार को आपराधिक रूप से उत्तरदायी ठहराना चाहिए. इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि, “वह केंद्र के जवाब से भी संतुष्ट नहीं है.”

इसके अलावा, एससी ने भ्रामक चिकित्सा विज्ञापनों के लिए पतंजलि के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने के लिए उत्तराखंड राज्य के अधिकारियों को फटकार लगाई. न्यायाधीश कोहली ने कहा, “आपके अधिकारियों ने कुछ नहीं किया है.” वहीं न्यायाधीश अमानुल्लाह ने कहा, “हमें अधिकारियों के लिए ‘बोनाफाइड’ शब्द के इस्तेमाल पर कड़ी आपत्ति है. हम हल्के में नहीं लेंगे. हम तुम्हें टुकड़े-टुकड़े कर देंगे.”

जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस अमानतुल्लाह की बेंच ने पतंजलि के वकील विपिन सांघी और मुकुल रोहतगी से कहा कि, “आपने जानबूझकर कोर्ट के आदेश का उल्लंघन किया है, कार्रवाई के लिए तैयार रहें.”

कार्यवाही की शुरुआत में पीठ ने कहा कि, “रामदेव और बालकृष्ण ने पहले मीडिया में माफी मांगी. जब तक मामला अदालत में नहीं आया, अवमाननाकर्ताओं ने हमें हलफनामा भेजना उचित नहीं समझा. उन्होंने इसे पहले मीडिया को भेजा, कल शाम 7.30 बजे तक यह हमारे लिए अपलोड नहीं किया गया था. वे स्पष्ट रूप से प्रचार में विश्वास करते हैं.”

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