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*तरंग फार्मा का तरंगित जहर:नशे का काला कारोबार, क्या भांग की तस्करी भी कर रहा है धनोतिया परिवार?*

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कुछ समय पहले ही फर्जीवाड़े के चक्कर में तरंग का लाइसेंस हुआ था निलंबित, फिर वही हरकतें शुरू प्रशासन ने कुछ समय पहले अमानक स्तर की औषधि-वटी व मुनक्का बनाने वाली 15 इकाइयों के लाइसेंस निलंबित कर दिए थे….इनके यहां बनाई जा रही मुनक्का की जांच में भांग की मात्रा मानक से अधिक मिली थी…..पाचक गोलियों के बहाने ये गोलियां युवा वर्ग को नशे की गिरफ्त में ले जा रही हैं….निलंबित लाइसेंस में काला घोड़ा, सनन, तरंग और मस्ताना जैसे नाम शामिल थे…..

शहर में नशीले पदार्थों पर रोक के लिए की गई कार्रवाई में पता चला कि अवैध भांग का उपयोग मुनक्का बनाने वाले कर रहे हैं….

तत्कालीन कलेक्टर मनीष सिंह के निर्देश पर इन इकाइयों के सैंपल जांच के लिए औषधि विभाग को भेजे गए तो सभी नमूने अमानक स्तर के मिले…. इनमें अधिक मात्रा में भांग के साथ ही अन्य प्रकार की नशीली वस्तुओं की मिलावट भी मिली…..

तत्कालीन सहायक आबकारी आयुक्त राजेश राठौर ने बताया कि सभी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था….जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर लाइसेंस निलंबित कर दिए गए थे…..

इनमें महेश अग्रवाल द्वारा संचालित मीनार फार्मा, काला घोड़ा मुनक्का, हीरालाल पंजवानी द्वारा संचालित विश्वास सेवा सदन व कल्याण सेवा सदन मस्ताना मुनक्का, लता मेहता द्वारा संचालित मेहता आयुर्वेदिक संस्थान सनन मुनक्का,

नरेन्द्र सिंह सोलंकी द्वारा संचालित माहेश्वरी मुनक्का, शुभम राठौर एवं साहित्य मिश्रा की धनश्री प्रोडक्ट्स, अनूप कुमार गुरबानी की अटल मुनक्का व मनभावन मुनक्का, रमेश वैष्णव की वैष्णव आयुर्वेदिक फार्मेसी, लोकेन्द्र गर्ग की एसएस मुनक्का, गौरव वसैनी की शिवम मार्केटिंग,

गोपाल धनोतिया की तरंग फार्मा, रतनलाल वैष्णव

की शुक्ला आयुर्वेदिक फार्मेसी, राजेश पंवार व हसन अली की वर्धमान उद्योग पर कार्रवाई की गई थी….

धनौतिया की हरकतें जारी?

विश्वकर्मा नगर से लेकर पूरे अन्नपूर्णा

इलाके और इंदौर तक में हाथोंहाथ उठाया गया…. कई फोन कॉल्स भी आए जिसमें अधिकतर धनोतिया परिवार की अंदरखाने शिकायत और शहर में जगह जगह बिक रही अवैध भांग की शिकायत शामिल थी….

तरंग और धनोतिया परिवार के करीबियों का आरोप है कि धनोतिया एक बार फिर उन्हीं हरकतों पर उतर आया है जिसकी वजह से यहां पहले ही कार्रवाई हुई थी….यानी’ तरंग फार्मा’ के उत्पाद कागज पर ‘विजया घृत’, ‘विजया वटी’, ‘भांग अर्क’ जैसे शुद्ध देसी और परंपरागत दिखते हैं…..

लेकिन असल में इन्हें एक खास फॉर्म में तैयार किया जा रहा है ताकि लोगों को नशे की लत लगे और बिक्री बढ़े…..ये सब दवाओं के नाम पर लाइसेंस लेकर, धीरे-धीर एक नशा नेटवर्क का रूप ले चुका है….

भांग तस्करी?

साल 2022 में ही इंदौर क्राइम ब्रांच ने आयुर्वेदिक औषधि के निर्माण की आड़ में 16,200 किलोग्राम भांग के अवैध भंडारण का खुलासा करते हुए इसी तरंग फार्मा के कारखाने से पांच लोगों को गिरफ्तार किया था….

पुलिस की अपराध निरोधक शाखा के तत्कालीन अतिरिक्त उपायुक्त गुरुप्रसाद पाराशर ने बताया कि मुखबिर की सूचना पर विश्वकर्मा नगर गोदाम पर छापा मारा गया था, तो वहां 270 बोरियों में 16,200 किलोग्राम भांग का भंडार मिला….

भांग की इस बड़ी खेप की कीमत नशे के काले बाजार में करीब 50 लाख रुपये आंकी गई….. अतिरिक्त उपायुक्त ने बताया, “पुलिस ने मौके से एक मालवाहक ऑटो रिक्शा भी जब्त कियाजिसका इस्तेमाल इंदौर और आस-पास के जिलों में भांग की तस्करी के लिए किया जा रहा था….”

उनका कहना था कि, “शुरुआती जांच में हमें पता चला है कि गोदाम में भांग का अवैध भंडारण मुनक्का नाम की तथाकथित आयुर्वेदिक दवा बनाने की आड़ में किया गया था….

हालांकि, हमें मौके पर भांग के भंडारण और इस दवा के निर्माण का कोई वैध लाइसेंस नहीं मिला।” अब यहां इस मामले में भी तरंग के पुराने

कर्मचारियों ने बताया कि धनोतिया परिवार अब भी अधिकारियों और नशा तस्करों कीमदद से भांग की अवैध सप्लाई चेन दौड़ा रहा है…..

यानी कि जो हरकतें पहले छुप छुपाकर की जाती है.

अब पुलिस रिकॉर्ड में नाम आने के बाद धनोतिया

के दिल से वह बचा खुचा डर भी खत्म हो गया है….. इस सनसनीखेज आरोप के बाद एक बार फिर इंदौर प्रप्तासन और क्राइम ब्रांच को मामले में जांच पड़ताल करना चाहिए कि आखिर किन अधिकारियों और इस गंदे तालाब की बड़ी मछलियां की तह पर धनोतिया की यह हरकतें सालों से जारी है….

और आखिर कैसे पिछले 25 सालों से यह नशा फैक्ट्री रहवासी इलाके में चल रही है….

तरंग फार्मा का तरंगित जहरा

जिस ‘नशा उद्योग’ को सांवेर रोड़ जैसे किसी बाहरी औद्योगिक क्षेत्र में होना चाहिए था, वह शांत रहवासी इलाके की नाक में भांग का चूत भर रहा है.

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