नई दिल्ली. कभी कैश, कभी कार्ड और कभी एक्सचेंज रेट की टेंशन… विदेश यात्रा में भारतीय सैलानियों की ये परेशानी अब धीरे-धीरे इतिहास बनने वाली है. अब जापान में भी यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी यूपीआई (UPI) का ट्रायल शुरू हो रहा है और इसके साथ ही दुनिया एक बार फिर मान रही है कि भारत का डिजिटल पेमेंट सिस्टम किसी से कम नहीं. QR कोड स्कैन करो और पेमेंट फटाफट. जिस UPI ने भारत में दुकानदार से लेकर मॉल तक की तस्वीर बदल दी, वही सिस्टम अब ग्लोबल स्टेज पर अपनी ताकत दिखा रहा है.
जापान में यूपीआई ट्रायल के तहत भारतीय पर्यटक अपने भारतीय बैंक अकाउंट से जुड़े यूपीआई ऐप के जरिए QR कोड स्कैन कर सीधे भुगतान कर सकेंगे. जापान की आईटी सर्विसेज कंपनी एनआईटी डेटा (NTT Data), भारत की नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के साथ मिलकर इस पायलट प्रोजेक्ट पर काम कर रही है. दोनों संस्थाएं भारतीय और जापानी पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ने के तरीकों की तलाश कर रही हैं, ताकि सीमा पार डिजिटल भुगतान संभव हो सके.
जापान में बढ़ रही है भारतीय पर्यटकों की संख्या
जापान में यूपीआई ट्रायल ऐसे समय में आ रहा है, जब वहां भारतीय पर्यटकों की संख्या तेजी से बढ़ी है. साल 2025 में जापान आने वाले भारतीय पर्यटकों की संख्या 3.15 लाख के पार पहुंच गई, जिससे भारतीय जापान के सबसे तेजी से बढ़ते टूरिस्ट सेगमेंट में शामिल हो गए हैं
कैशलेस ट्रैवल को बढ़ावा
प्लूटस वन के फाउंडर और मैनेजिंग पार्टनर रोहित महाजन का कहना है कि जापान में यूपीआई शुरू होने से वहां के मर्टेट बदलते कंज्यूमर बिहेवियर के साथ खुद को ढाल सकेंगे. वहीं, आईएटीओ के अध्यक्ष रवि गोसाईं के मुताबिक, यह पहल न सिर्फ कैशलेस ट्रैवल को बढ़ावा देगी, बल्कि भारत-जापान के बीच पर्यटन और डिजिटल इकोनॉमी के रिश्तों को भी मजबूत करेगी.
भारत में 2026 में शुरू हुई थी यूपीआई
यूपीआई की शुरुआत साल 2016 में एक सरकारी पहल के रूप में हुई थी. यह सिस्टम मोबाइल ऐप के जरिए तुरंत और आमतौर पर बिना किसी चार्ज के पैसे ट्रांसफर करने की सुविधा देता है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि किसी भी UPI ऐप से QR कोड स्कैन कर या यूपीआई आईडी या यूपीआई नंबर पर भुगतान किया जा सकता है..

