भोपाल. पूर्व सीएम और कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए कहा है कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार को बचाने के लिए उन्होंने बहुत कोशिश की थी, लेकिन वे सफल नहीं हो सके. उन्होंने कहा कि सरकार गिर जाने के लिए मुझे दोषी बताया गया, लेकिन यह सही नहीं है. उन्होंने कहा कि यह विचारधारा की लड़ाई नहीं, बल्कि अहं की लड़ाई के कारण हुआ. उन्होंने कहा कि मेरा ना तो माधवराव सिंधिया और ना ही उनके बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया से कोई विवाद था. अगर कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच मतभेद नहीं होते और कमलनाथ ग्वालियर-चंबल संभाग से जुड़ी मांगों को लेकर बनी सहमति का पालन करते तो कांग्रेस सरकार बनी रहती. एक चैनल को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि यह क्लैशेज ऑफ पर्सनालिटीज था.
दिग्विजय सिंह ने कहा कि मैं एक उद्योगपति जिनके कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया दोनों से गहरे संबंध थे; के पास गया और मैंने उनसे कहा कि इन दोनों की लड़ाई में हमारी सरकार गिर जाएगी. आप कुछ करें; तब उन्होंने डिनर पर कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया दोनों को आमने सामने किया और यहां कुछ बातों पर सहमति बनी और उस पर साइन भी हुए, लेकिन कमलनाथ ने बाद में उसे मानने से इनकार कर दिया और बात फिर बिगड़ गई. दिग्विजय सिंह ने बताया कि उस डिनर में मैं भी शामिल था और ग्वालियर चंबल को लेकर सहमति बनाई गई थी; लेकिन बाद में उसका पालन नहीं हुआ.
मैंने जिन पर सबसे ज्यादा भरोसा किया; उन्हीं ने…
दिग्विजय सिंह ने कहा कि सरकार गिर जाने का दोषी मैं नहीं हूं, सच्चाई तो यह है कि मैंने जिन पर सबसे ज्यादा भरोसा किया; उन्हीं ने मेरे साथ धोखा कर दिया. मध्य प्रदेश की राजनीति में हुई बड़ी उथल-पुथल के बाद मार्च 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया और अपने साथ 22 विधायकों का समर्थन भी खींच लिया. इस कदम ने तत्कालीन कमलनाथ सरकार को अल्पमत में ला दिया था. बहुमत साबित न कर पाने की स्थिति में कमलनाथ को इस्तीफा देना पड़ा और बाद में शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में भाजपा की वापसी हुई।

