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दिग्विजयसिंह बोले- जबलपुर में 8 घंटे रहे अमित शाह, आदिवासियों की पीड़ा सुनने के लिए 5 मिनट का वक्त नहीं दिया

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दिग्विजय सिंह ने बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पर लगाया आदवासियों की जमीन पर कब्जा कर मकान बनवाने का आरोप

जबलपुर

आदिवासियों के मुद्दे पर 18 सितंबर को जबलपुर में खूब सियासी तीर चले। बीजेपी के बड़े नेता और देश के गृहमंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर आदवासी क्रांतिवीर नायकों को उचित सम्मान नहीं देने का बड़ा हमला बोला, तो कांग्रेस की ओर से पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने बीजेपी पर आरोपों की बौछार कर दी। बोले कि 15 सितंबर को गृहमंत्री को पत्र लिखकर 5 मिनट पन्ना के आदिवासी परिवारों की पीड़ा सुनने के लिए समय मांगा था। पर अफसोस 8 घंटे जबलपुर में रहे गृहमंत्री आदिवासियों की बातें तो खूब करते रहे, लेकिन मिलने का वक्त नहीं दिया।

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह पन्ना के आदिवासी परिवारों को लेकर पत्रकारों से मुखातिब थे। पन्ना के रानीपुर गांव के आदिवासी परिवारों की 18 एकड़ जमीन और मकान की फर्जी तरीके से पहले हीरालाल कोल के नाम पर रजिस्ट्री कराई गई और फिर उसे 90 लाख रुपए में बीजेपी के उपाध्यक्ष बने अंकुर त्रिवेदी और उनके पिता खुन्ना महाराज ने खरीद ली। सात महीने पहले ये सौदा हुआ। आरोप लगाया कि वहां बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा का मकान बन रहा है। बतौर सबूत मकान की फोटो और गरीब महिला के नाम पर बने शौचालय की फोटो भी दिखाई।

पन्ना से आए आदिवासी परिवार अपनी पीड़ा बताते हुए।

बीजेपी नेता आदिवासी की जमीन पर कब्जा कर रहे

दिग्विजय सिंह ने कहा कि एक तरफ पार्टी आदिवासियों की हितैषी होने का दंभ भरती है, और दूसरी ओर इस पार्टी के नेता उनकी जमीनों पर कब्जा कर रहे हैं। उन्होंने हीराबाई कोल सहित पीड़ित परिवार के लोगों को मीडिया के सामने पेश कर अपनी बात रखने का मौका भी दिया। साथ ही जबलपुर की कौशल्या गोटिया ने जबलपुर के पूर्व महापौर प्रभात साहू पर चांटी में आदिवासियों से कॉलेज और बिल्डिंग बनाना चाहते हैं। यहां भी जमीन पर कब्जा करने का खेल चल रहा है। गोसलपुर में छोटेलाल की जमीन राजीव चड्‌ढा ने कब्जा कर लिया था। पर हमने आवाज उठाई तब उसका कब्जा मिला। अधारताल सुहागी में बीजेपी के पूर्व जनपद अध्यक्ष संतोष उसरेठे ने आदिवासी चैतू की रोड से लगी जमीन पर कब्जा कर लिया है।

आदिवासी स्वाभिमानी होते हैं, अपनी लड़ाई लड़ना जानते हैं।

आदिवासी स्वाभिमानी होती हैं, हमारे विधायकों ने 10 करोड़ ठुकरा दिए

दिग्विजय सिंह ने कहा कि आदिवासी स्वाभिमानी होते हैं। राजा शंकरशाह-कुंवर रघुनाथ शाह को अंग्रेजों ने माफी मांगने की शर्त पर जीवनदान का प्रलोभन दिया था, लेकिन स्वाभिमानी राजा ने मृत्यु का वरण किया। इसी परंपरा को हमारे आदिवासी भाई अब भी निभा रहे हैं। पार्टी के 28 आदिवासी विधायकों को बीजेपी ने 10-10 करोड़ का आफर दिया था।

एक बिसाहूलाल सिंह को छोड़कर एक भी विधायक नहीं बिका। ये होती है आदिवासी पहचान और स्वाभिमान। बीजेपी ने कोई नई घोषणा नहीं की। हमारी 15 महीने की सरकार में ओमकार सिंह मरकाम ने वन विभाग से ये जमीन प्रेरणा स्थल को विकसित करने के लिए दिलाया था। उसी समय उन्होंने वहां स्मारक बनाने 5 करोड़ रुपए की राशि भी देने की घोषणा की थी।

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