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कॉर्पोरेट और टैक्स चोरों को छूट देने वाला शहर मुखी, किसान-मजदूर-गरीब विरोधी निराशाजनक बजट

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किसानों की आय दोगुनी करने का वायदा भूल गए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

14 करोड़ किसान परिवारों के लिए ‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि’ का बजट में आवंटन नहीं

शेयर धारकों को 8 लाख करोड़ का नुक़सान

संत शिरोमणि रविदास का बेगमपुरा का सपना वित्तमंत्री ने चूर चूर कर दिया– डॉ सुनीलम

किसान संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष, पूर्व विधायक डॉ सुनीलम ने आम बजट को कॉर्पोरेट ड्रिवन, शहर-मुखी तथा टैक्स चोरों को छूट देने वाला किसान-मजदूर-गरीब विरोधी निराशाजनक बजट बताया है।उन्हें कहा कि प्रधानमंत्री के रिफॉर्म एक्सप्रेस में किसानों का कोई स्थान नहीं है।
सवा घंटे के बजट भाषण में वित्त मंत्री ने 11:45 से 11:47 बजे के बीच मात्र 2 मिनट के लिए किसानों का उल्लेख किया है, जिसमें उच्च कीमतों वाली फसलों को पैदा करने वाले किसानों का उल्लेख किया है ।
डॉ सुनीलम ने कहा कि आम किसान गेहूं , धान, मक्का, ज्वार, बाजरा, रागी, सरसों, मूंगफली, सोयाबीन पैदा करता है, काजू, चंदन और कोको नहीं, जिसका उल्लेख वित्त मंत्री ने अपने भाषण में किया है।
बजट आने के बाद बी एस ई सेंसेक्स 2300 अंक गिर गया और एन एस ई निफ्टी 750 अंक गिर गया। जिससे शेयर धारकों को 8 लाख करोड़ का नुक़सान पहुंचा।
डॉ सुनीलम ने कहा कि 28 फरवरी 2016 को प्रधानमंत्री ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा था जो वास्तविकता में आधी रह गई है। इसी तरह प्रधानमंत्री ने 1 दिसंबर 2018 को 14 करोड़ किसान परिवारों को सालाना 6000 रूपये ‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि’ देने का वायदा किया था लेकिन 3 करोड़ किसान परिवारों को भी पूरी 21 किस्तें उपलब्ध नहीं कराई जा सकीं हैं। 14 करोड़ परिवारों के लिए कम से कम सालाना 6000 रूपये के 84,000 करोड़ की जरूरत होगी, जिसका बजट में कोई इंतजाम नहीं किया गया है।
देश के किसानों की मुख्य मांग एमएसपी की कानूनी गारंटी, कर्जा मुक्ति और किसान पेंशन है जिसका बजट में कोई जिक्र तक नहीं किया गया है। केंद्र सरकार कर्मचारियों के लिए अब तक आठ वेतन आयोग बना चुकी है। सरकार को हर किसान परिवार की न्यूनतम आय तय करने के लिए कम से कम पहले ‘किसान आयोग’ का गठन कर देना चाहिए था। देश भर में हजारों करोड़ रूपया फसल बीमा और राजस्व मुआवजा का भुगतान लंबित है। कम से कम बकाया राशि और राजस्व मुआवजा देने का आवंटन तो किया जाना चाहिए था ।
आम बजट में 7% आर्थिक वृद्धि का उल्लेख किया गया है लेकिन देश के 25 करोड़ बेरोजगारों में से 7% बेरोजगारों के रोजगार का या उन्हें बेरोजगारी भत्ता देने तक का बजट में प्रबंध नहीं किया गया है। हालांकि भाषण में वित्त मंत्री ने कहा है कि यह युवा शक्ति ड्रिवन बजट है।
डॉ सुनीलम ने कहा कि भारत संघवाद पर टिका हुआ है परंतु दक्षिणी राज्यों के साथ किये जा रहे आर्थिक भेदभाव को खत्म करने के लिए बजट में कोई प्रावधान नहीं किया गया है । कम से कम सरकार को विपक्षी पार्टियों द्वारा चलाई जा रही राज्य सरकारों की लंबित बकाया राशि के भुगतान की मांग हेतु बजट में आवंटन कर यह स्पष्ट करना चाहिए था कि केंद्र सरकार विपक्ष की राज्य सरकारों के साथ भेदभाव नहीं कर रही है।
डॉ सुनीलम ने कहा कि वित्त मंत्री ने रविदास जयंती का तो जिक्र किया परंतु संत शिरोमणि रविदास के बेगमपुरा के सपने को पूरा करने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया है। बजट में देश के साढ़े छह लाख गांवों में से एक गांव या एक शहर को बेगमपुरा बनाने के लिए बजट का इंतजाम नही है। इसके विपरीत केंद्र सरकार ने सांसदों द्वारा गांव गोद लिए जाने की योजना समाप्त कर दी है। कम से कम पूरे बजट में एक शहर, एक गांव या एक मोहल्ला बेगमपुरा की तर्ज पर बनाने का प्रयास तो सरकार को करना ही चाहिए था।

भागवत परिहार
कार्यालय सचिव, किसंस, मुलतापी
9752922320

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