भोपालः मध्य प्रदेश कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा। पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ के कथित तानाशाही रवैये के खिलाफ अन्य वरिष्ठ नेता लामबंद हो रहे हैं। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिल चुके हैं। एक और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय सिंह राहुल ने भी सोनिया से मिलने का समय मांगा है। प्रदेश अध्यक्ष रह चुके सुरेश पचौरी भी कमलनाथ के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं।
पार्टी के असंतुष्ट नेताओं का आरोप है कि कमलनाथ उन्हें तवज्जो नहीं देते। पार्टी से संबंधित मामलों में उनकी राय तो नहीं ही ली जाती, अपने समर्थकों को परेशान करने का आरोप भी उन्होंने लगाया है। इसकी शुरुआत पिछले साल अक्टूबर में खंडवा लोकसभा सीट के लिए हुए उपचुनाव के समय ही हो गई थी, लेकिन हाल के दिनों में इसमें तेजी आई है।
चरम पर गुटबाजी
प्रदेश कांग्रेस ने जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को संगठित करने के लिए घर चलो, घर-घर चलो अभियान शुरू किया तो अरुण यादव, अजय सिंह और सुरेश पचौरी इससे दूर रहे। इसके बाद जब अरुण यादव ने भोपाल में होली मिलन कार्यक्रम आयोजित किया तो कमलनाथ और उनके करीबी नेता इसमें शामिल नहीं हुए। कारण यह बताया गया कि कमलनाथ उस दिन राज्य से बाहर थे। खास बात यह कि अरुण यादव ने यह कार्यक्रम उस दिन किया, जिस दिन कांग्रेस पूरे राज्य में लोकतंत्र सम्मान दिवस मना रही थी। यह कार्यक्रम प्रदेश में कमलनाथ की सरकार गिरने के दो साल पूरे होने पर बीजेपी के खरीद-फरोख्त के खिलाफ आयोजित किया गया था।
अरुण यादव का अंतिम समय में कटा टिकट
कमलनाथ के खिलाफ अरुण यादव की नाराजगी पिछले साल अक्टूबर से ही सामने आती रही है जब उन्हें खंडवा लोकसभा सीट के लिए हुए उपचुनाव में टिकट नहीं मिल पाया था। यादव कई महीने पहले से ही इसकी तैयारियों में लगे थे और टिकट के लिए खुल कर अपनी दावेदारी पेश कर चुके थे। अंतिम समय में कांग्रेस का टिकट एक ऐसे वयोवृद्ध नेता को दिया गया जो पिछले डेढ़ दशक से चुनावी राजनीति से दूर था। दिग्विजय सिंह का समर्थक माने जाने वाले प्रत्याशी को उपचुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा। बाद में जब कमलनाथ से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने यह कहकर टाल दिया कि यादव ने उनसे टिकट मांगा ही नहीं था।
सोनिया से कमलनाथ की शिकायत
यादव की नाराजगी का कारण केवल यही नहीं है। उपचुनाव के लिए प्रचार के हीच में ही उनके समर्थक विधायक सचिन बिरला ने कांग्रेस छोड़ बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर ली। नतीजे आने के बाद कमलनाथ ने खंडवा और खरगोन में चार पार्टी पदाधिकारियों को उनके पद से हटा दिया। उन पर पार्टी प्रत्याशी के खिलाफ काम करने का आरोप था। इसके बाद से यादव लगातार कमलनाथ के खिलाफ अपनी नाराजगी जताते रहे हैं। होली मिलन कार्यक्रम के बाद उनके सब्र का पैमाना टूट गया और उन्होंने पार्टी आलाकमान से मिलकर उनकी शिकायत कर दी।
दिग्विजय के रुख पर संशय
प्रदेश कांग्रेस में बड़े भाई-छोटे भाई की जोड़ी के रूप में मशहूर कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के बीच भी तनाव के संकेत मिल रहे हैं। इसकी शुरुआत करीब दो महीने पहले तब हुई थी जब दिग्विजय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मिलने धरने पर बैठे थे और उधर शिवराज ने एयरपोर्ट पर कमलनाथ से मुलाकात कर ली थी। तब दिग्विजय ने कहा था कि उन्हें क्या सीएम से मिलने के लिए कमलनाथ की मदद लेनी पड़ेगी। बताया यह भी जा रहा है कि सोनिया से मिलने से पहले दिग्विजय और अरुण यादव के बीच बंद कमरे में मुलाकात भी हुई थी।
लगाम नहीं लगी तो मुश्किल
कमलनाथ कांग्रेस आलाकमान के करीब हैं और उन्हें गांधी परिवार का विश्वास भी हासिल है। इसलिए असंतुष्ट नेताओं की कोशिशों का क्या नतीजा होगा, यह कहना मुश्किल है। लेकिन यह तय है कि यदि पार्टी नेतृत्व ने समय रहते गुटबाजी पर लगाम नहीं लगाई 2023 के विधानसभा चुनावों में पार्टी की जीत की राह मुश्किल हो सकती है।
