भोपाल। मप्र सरकार की आर्थिक तंगी का असर अब प्रदेश के उन इंजीनियरिंग की चुके युवाओं पर पड़ने लगा है, जो नौकरी न मिलने की वजह से ठेकेदारी के क्षेत्र में हाथ आजमाने की चाहत रखते हैं। दरअसल इस क्षेत्र में आने वाले इन युवाओं में से जो ठेकेदारी का काम करने लगे हैं, वे सरकारी भुगतान न होने की वजह से दोहरी मुसीबत में फंस गए हैं। जैसे-तैसे सरकारी काम का ठेका हासिल करने के बाद काम किया तो उनका भुगतान नहीं हो पा रहा है। वजह है बजट का न होना। ऐसे में खुद की पूंजी का जैसे -तैसे इंतजाम कर रोजगार शुरू किया था, लेकिन मुनाफा तो नहीं हुआ उल्टे जेब की पूंजी और फंस गई है। यही वजह है कि अब इस मामले में युवाओं का रुझान तेजी से कम हो रहा है। यही वजह है कि अब तो ठेकेदारी का पंजीयन कराने वाले युवाओं की संख्या में तेजी से कमी आई है। भोपाल में लोक निर्माण विभाग में सरकारी ठेकेदारी करने वाले एक युवा इंजीनियर ठेकेदार का कहना है कि काफी प्रयासों के बाद जब सरकारी नौकरी नहीं लगी तो घर चलाने के लिए ठेकेदारी का रास्ता चुना। 25 हजार रुपए में रजिस्ट्रेशन कराके छोटे-मोटे ठेके लेना शुरू किए लेकिन, अब यह ठेकेदारी भी भारी पड़ रही है। इसकी वजह है विभाग द्वारा लाखों का भुगतान नहीं किया जाना। उनका कहना है कि ठेकेदारों में प्रतिस्पर्धा बढ़ने की वजह से कम रेट में टेंडर भरे जा रहे हैं। कमीशन भी कम हो चुका है। प्रतिस्पर्धा बढ़ने से काम भी कम मिल रहे हैं। इस तरह की स्थिति प्रदेश के उन सभी सक्रिय 35 हजार से अधिक ठेकेदारों की है। यही वजह है कि अब नए पंजीयन में भी भारी गिरावट आई है। इस वर्ष जनवरी और फरवरी में महज 762 युवाओं ने ठेकेदार के लिए पंजीयन कराया है जबकि, बीते पांच सालों की अवधि में औसतन हर माह पांच सौ से अधिक लोग रजिस्ट्रेशन कराते थे।
यह हैं प्रमुख वजहें
ठेकेदारों में प्रतियोगिता बढ़ी।
कम रेट में लिए जा रहे ठेके।
मटेरियल के रेट बढ़ना और पूंजी नहीं होने का संकट।
सरकार की वित्तीय स्थिति ठीक नहीं।
छोटे-बड़े ठेकेदारों के भुगतान अटके।
सरकार ने सरल किए थे नियम
दरअसल प्रदेश की शिव सरकार ने बेरोजगारी को देखते हुए वर्ष 2015 में ठेकेदार बनने की प्रक्रिया कर सरलीकरण किया था। इसके तहत केन्द्रीय रजिस्ट्रेशन प्रणाली लागू कर मात्र 25 हजार रुपए में ठेकेदार बनने का रास्ता खोला था। खास बात यह है कि इसके लिए शैक्षणिक योग्यता का मापदंड भी समाप्त कर दिया गया था। इसके साथ ही एक पंजीयन पर किसी भी विभाग में ठेकेदारी करने की सुविधा दे दी गई। इस वजह से 2017 में रजिस्ट्रेशन संख्या दो गुना हो गई थी।
किस माह कितने पंजीयन
गंभीर आर्थिक संकट की वजह से सरकार ने ठेकेदारों के करोड़ों के भुगतान रोक दिए। इसकी वजह से वर्ष 2020 के मार्च माह में 295, अप्रैल में 12, मई में 186 और जून में 405 पंजीयन हुए। सीएम डैशबोर्ड के अनुसार प्रदेशभर में इस समय कुल 42,690 ठेकेदार (नए-पुराने) हैं।
युवाओं का ठेकेदारी से हुआ मोहभंग…मप्र सरकार की आर्थिक तंगी का असर

