राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली और अनुविभागीय अधिकारी की मनमानी से परेशान होकर खेमका परिवार ने आत्मदाह करने की सूचना कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक को दी है। वर्षो से खेमका परिवार की भूमि से संबंधित समस्या का निराकरण न होना तथा अन्य भूमि स्वामी के साथ मिलकर एक तरफा आदेश जारी करने से परेशान है। कलेक्ट्रेट कार्यालय के समक्ष 26 जनवरी को आत्मदाह करने की सूचना दी गई है।
अनूपपुर, तहसील व अनुविभाग दण्डाधिकारी (राजस्व) कार्यालय में भर्रेशाही और नियमों के विपरीत क्रियाकलापों का प्रकरण वर्षो से चली आ रही है। यहां चंद पैसों में नियम बदल जाते या फिर एक तरफा बिना सुनवाई के फैलने सुना दिये जाते है। आवेदन व निवेदन के बाद भी महीनों भूमि स्वामियों का सीमांकन नहीं होता तो वही भू-माफियाओं के लिए राजस्व अमला तत्काल सेवा उपलब्ध कराता है। कुछ ऐसे ही आरोपों के साथ खेमका परिवार कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर अनुविभागीय अधिकारी के मनमानी पर तत्काल रोक लगाये जाने अन्यथा आत्मदाह किये जाने की सूचना दी है।
यह है मामला :
आवेदक पुष्पा खेमका पति स्व. गोविन्द प्रसाद खेमका, विवेक खेमका, नीलेश खेमका पिता स्व. गोविन्द प्रसाद खेमका सभी निवासी अनूपपुर के द्वारा ग्राम सकरिया स्थिति भूमि की सीमांकन एवं नक्शा तर्मीम करने सहित उनकी वास्तविक भूमि बताये जाने की गुजारिश की गई थी, लेकिन द्वितीय पक्ष के साथ मिलकर जवाब तलब व बेदखल करने का षड्यंत्र रचा जा रहा है। आवेदन के माध्यम से उन्होंने बताया कि तहसीलदार तहसील अनूपपुर के समक्ष वृन्दावन चर्तुवेदी पिता अंबिका प्रसाद चतुर्वेदी द्वारा एक आवेदन पत्र भूमि स्थित ग्राम सकरिया आराजी खसरा नंबर 63/1 रकवा 0.263 हे. एंव खसरा नंबर 64/2 रकवा 0.288 हे. भूमि का अपने को भूमिस्वामी बताते हुए इस भूमि का नक्शा तर्मीम एंव सीमाकन कराया गोविन्द प्रसाद खेमका का अप्राधिकृत कब्जा पाये जाना कहते हुए एक आवेदन पत्र अंतर्गत धारा 250 म.प्र. भू.रा. संहिता के तहत पेश करते हुए गोविन्द प्रसाद खेमका को बेदखल कर कब्जा दिलाये जाने का अनुरोध किया गया था, इस पर कार्यवाही करते हुए तहसीलदार द्वारा निर्माण कार्य रोके जाने के आदेश देते हुए गोविन्द खेमका को जवाब हेतु तलब किया गया था।
प्रकरण को कर दिया समाप्त :
गोविन्द प्रसाद खेमका के द्वारा तहसीलदार के समक्ष उपस्थित होकर प्रकरण की प्रचलनशीलता पर आपत्ति पेश की, जिस पर सुनवाई करते हुए प्रकरण 4 मार्च 2013 को समाप्त कर दिया गया था। तहसीलदार के उक्त आदेश से परिवेदित होकर वृन्दावन चतुर्वेदी अनुविभागीय अधिकारी अनूपपुर के समक्ष अपील इस आधार पर पेश की थी कि वृन्दावन चतुर्वेदी द्वारा राजस्व प्रकरण क्रमांक 91/अ3/2011-12 आदेश दिनांक 8/8/12 के द्वारा उक्त विवादित भूमि का नक्शा तर्मिम कराया गया था तथा राजस्व प्रकरण क्रमांक 1/अ12/2016-17 आदेश दिनांक 30.11.16 के द्वारा भूमि का सीमाकन कराया गया था, सीमाकंन दिनांक से गोविन्द खेमका का कब्जा अप्राधिकृत हो गया है यह कब्जा दिलाया जावे।
मनमाना आदेश किया पारित :
अनुविभागीय अधिकारी द्वारा अपील में मात्र वृन्दावन चतुर्वेदी को ही साक्ष्य का अवसर दिया गया तथा आवेदकगण को प्रतिपरीक्षण का अवसर दिये बिना ही अपनी ओर से साक्ष्य पेश करने का एक भी अवसर दिये बिना ही राजस्व प्रकरण कमांक 91/अ 3/2011-12 में पारित आदेश दिनांक 8.8.12 एवं राजस्व प्रकरण कमांक 1/अ12/2016-17 में पारित आदेश दिनांक 30.11.16 जिसे अपर कलेक्टर द्वारा अपने राजस्व प्रकरण कमांक 0039ए0042 / निगरानी / 2020-2021 में पारित आदेश दिनांक 28/12/21 के द्वारा निरस्त कर दिये जाने के बाद भी हमे अपनी ही भूमि से बेदखल करने का मनमाना आदेश वृन्दावन चतुर्वेदी से मिल कर पारित कर दिया है। इस आदेश को स्थिगित कर आवेदक गण को अपील किये जाने का समय दिये जाने वाले आवेदन पर कोई विचार अनुविभागीय अधिकारी द्वारा नहीं किया जा रहा है तथा तहसीलदार को आदेश के अनुसार आवेदक गण को उनकी ही भूमि से बेदखल करने का आदेश दिया गया है, जिस पर तहसीलदार द्वारा नायब तहसीलदार एवं राजस्व निरिक्षकों की टीम बना कर आवेदक गण को पुलिस के माध्यम से उनकी ही भूमि पर से बेदखल करने का षड्यंत्र वृन्दावन चतुर्वेदी द्वारा रचा जा रहा है।
बलपूर्वक बेदखल करने का प्रयास :
वृन्दावन चतुर्वेदी की भूमि से लगी हुई खसरा नंबर 63/2 रकवा 0.235 हे. एवं खसरा नंबर 64/1 रकवा 0.223 हे. के आवेदक गण भूमि स्वामी है, जिस पर अपीलार्थीगण की पक्की ईट की बाउन्ड्री बनी हुई है, जिसे वृन्दावन चतुर्वेदी एवं उनके पुत्रो द्वारा बलपूर्वक आवेदक गण की बाउन्ड्री वाल तोडकर कर कब्जा करने का प्रयास किया गया। जिस पर गोविन्द प्रसाद खेमका ने एक व्यवहार वाद 103ए / 2016 का पेश किया गया था, जिसमे गोविन्द प्रसाद खेमकार के ओर से एक आवेदन पत्र अंतर्गत आदेश 39 नियम 1 व 2 सहपठित धारा 151 का पेश किया गया था, जिस पर सुनवाई करते हुए व्यवहार न्यायाधीश महोदय अनूपपुर द्वारा दिनांक 15.11.16 को वृन्दावन चतुर्वेदी के विरूद्ध अस्थाई निषेधाज्ञा का आदेश पारित किया गया था। यह आदेश आज भी प्रभावशील होने पर भी अनुविभागीय अधिकारी द्वारा इन तथ्यों को नजर अंदाज करते हुए बेदखली का आदेश मनमाना पारित किया है तथा गैर कानूनी तरीके से आवेदक गण को बलपूर्वक बेदखल करने हेतु वृन्दावन चतुर्वेदी एवं उनके पुत्र लगे हुए हैं।
आवेदक के आवेदन पर नहीं विचार :
जब वृन्दावन चतुर्वेदी के पुत्र लोग आवेदकगण की दीवाल तोड़ने आये थे, तब उनके विरुद्ध थाना कोतवाली में रिपोर्ट की गयी थी, जिस पर कार्यवाही करते हुए उनके विरुद्ध न्यायालय में चालान पेश किया गया था जो न्यायालय मे विचाराधीन है। आवेदक गण की ओर से अपनी ही लगी हुई भूमि खसरा नंबर 61/1 ग/1 एवं 6 /1 ग /2 का नाप किये जाने हेतु कई दिन पूर्व में भी आवेदन दिया गया है, जिस पर राजस्व अधिकारियों द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है तथा गलत आदेश के आधार पर वृन्दावन चतुर्वेदी से मिलकर गलत कार्यवाही करने हेतु तैयारी की जा रही है।
आत्मदाह करने को मजबूर :
आवेदक गण द्वारा अनुविभागीय अधिकारी के आदेश के विरूद्ध अपर कमीशनर संभाग शहडोल के समक्ष अपील भी पेश कर दी गयी है । जिसकी जानकारी वृन्दावन चतुर्वेदी को होने के बाद भी राजस्व अधिकारियों से मिल कर आवेदक गण को उनकी ही भूमि खसरा नंबर 63/2 एवं 64/1 जिस पर पक्की बाउन्ड्री वाल बनी हुई को तोड़ कर वृन्दावन चतुर्वेदी की भूमि बतायी जाकर उन्हें कब्जा दिलाये जाने का आदेश अनुविभागीय अधिकारी के निर्देश पर तहसीदार द्वारा जारी कर दिया गया है। विभिन्न न्यायालयों के आदेश के परिपेक्ष्य में तत्काल कब्जा दिलाये जाने की कार्यवाही पर रोक लगायी जाये अन्यथा आवेदक गण जिला कलेक्ट्रेट के सामने दिनांक 26 जनवरी 2022 को आत्मदाह करने को मजबूर होंगे।
इनका कहना है :
कार्यवाही नियमानुसार किया गया है, अगर उन्हें कोई समस्या है तो अग्रिम कार्यवाही हेतु आवेदन कर सकते हैं।
कमलेश पुरी, एसडीएम, अनूपपुर

