संयुक्त किसान मोर्चा, मध्यप्रदेश ने जागृत आदिवासी दलित संगठन की नेत्री माधुरी बहन का बुरहानपुर जिला प्रशासन द्वारा जिला बदर किए जाने को मध्य प्रदेश सरकार द्वारा आदिवासियों की आवाज कुचलने का सुनियोजित षड्यंत्र बताते हुए मुख्यमंत्री से माधुरी बहन के खिलाफ जिला बदर की कार्यवाही करने वाले जिलाधीश को निलंबित करने की मांग करते हुए कहा है कि संयुक्त किसान मोर्चा मध्यप्रदेश, सरकार की इस दमनात्मक कार्यवाही को बर्दाश्त नहीं करेगा।

संयुक्त किसान मोर्चा की 11 सदस्यीय समन्वय समिति की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि पहले सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के माध्यम से 24 लाख आदिवासियों को खदेड़ने की असफल कोशिश की थी लेकिन आदिवासी संगठनों के प्रतिरोध के चलते केंद्र सरकार को यह कार्यवाही रोकने पड़ी। लेकिन अब भारतीय जनता पार्टी राज्य सरकारों के माध्यम से आदिवासियों को वन अधिकार कानून के तहत पट्टा देने की बजाय उन्हें अपनी राज्य सरकारों के माध्यम से खदेड़ रही हैं ।
संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा है कि प्रशासन द्वारा महीनों अवैध वन कटाई पर कोई भी कार्यवाही नहीं की गई और कटाई को बढ़ते रहने दिया गया और लगभग 15,000 से ज्यादा एकड़ जंगल काट दिया गया। जैसे ही जागृत आदिवासी दलित संगठन के सदस्यों ने शासन-प्रशासन की आपराधिक निष्क्रियता पर सवाल उठाया गया, वैसे ही दमनात्मक कार्यवाहियां शुरू कर दी गई। इस हमले में अवैध वन कटाई के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व कर रहे आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ताओं पर फर्जी आरोप लगाकर गिरफ्तार किया गया, उनके घरों को भी अवैध रूप से तोड़ा गया और अब संगठन की नेत्री माधुरी बहन को जिला बदर कर जागरूक आदिवासियों को दबाने का शर्मनाक प्रयास किया जा रहा है, जिससे शासन-प्रशासन का आदिवासी विरोधी चेहरा एक बार फिर साफ हो चुका है।
संयुक्त किसान मोर्चा ने बुरहानपुर प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा है कि इस मुद्दे पर 12 जुलाई को दिल्ली में होने वाली संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में चर्चा कर आगामी कार्यक्रम की घोषणा की जाएगी।
(संयुक्त किसान मोर्चा समन्वय समिति की ओर से भागवत परिहार द्वारा जारी)