अग्नि आलोक

*“शहर की सांसें मत रोकिए” — हुकुमचंद मिल सिटी फॉरेस्ट को बचाने नागरिकों की हुंकार*

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इंदौर के दिल में बसे हुकुमचंद मिल के प्राकृतिक सिटी फॉरेस्ट पर मंडरा रहे खतरे के खिलाफ आज एक बार फिर नागरिकों की आवाज गूंजी। हाउसिंग बोर्ड द्वारा इस हरित धरोहर को काटकर निर्माण कार्य किए जाने के प्रस्ताव के विरोध में, शहर के पर्यावरण प्रेमी नागरिकों ने शाम 5 बजे से 6 बजे  तक राजवाड़ा चौक पर मानव श्रृंखला बना कर संदेश दिया—”पेड़ बचेंगे तो इंदौर बचेगा”।

यह सिटी फॉरेस्ट केवल पेड़ों का समूह नहीं, बल्कि हजारों पक्षियों, जीव-जंतुओं का घर और शहर की आबोहवा का रक्षक है। नागरिकों का कहना था कि यदि यह वन क्षेत्र नष्ट हुआ तो आने वाली पीढ़ियों को केवल प्रदूषण और कंक्रीट का जंगल मिलेगा।

मानव श्रृंखला में ओ. पी. जोशी, शिवाजी मोहिते, रामेश्वर गुप्ता, , दिलीप वाघेला, अजय लागू, अभय जैन, अरविंद पोरवाल, विश्वनाथ कदम, शैला शिंत्रे, संदीप खानवलकर, प्रकाश पाठक , रामस्वरूप  मंत्री,  प्रणीता दीक्षित,  स्वप्निल व्यास, रुद्रपाल यादव, शचीकांत मनीष काले, प्रमोद नामदेव , डॉ सम्यक जैन , शबाना पारेख, चन्द्रशेखर गवली,  प्रकाश सोनी, जावेद आलम, आराध्य दीक्षित, आशीष राय, डॉ श्रष्ठी सहित बड़ी संख्या में पर्यावरण प्रेमी शामिल हुए। सभी ने प्रशासन से मांग की कि इस प्राकृतिक सिटी फॉरेस्ट को स्थायी रूप से संरक्षित क्षेत्र घोषित किया जाए और यहां किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य तुरंत रोका जाए।

नागरिकों का स्पष्ट संदेश था— “हमें फ्लैट नहीं, हमें ऑक्सीजन चाहिए।”

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