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*डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों से अमेरिका में उथलपुथल,जीडीपी में गिरावट, मंदी की आशंका*

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नई दिल्ली: राष्ट्रपतिडोनाल्ड ट्रंप की नीतियों ने दुनिया की सबसे बड़ी इकॉनमी वाले देश अमेरिका में उथलपुथल मचा रखी है। ट्रेजरी यील्ड में हाल में आई तेजी से ट्रंप प्रशासन को भी यह अहसास हो चुका है कि विभिन्न देशों के साथ ट्रेड डील से ही काम नहीं चलेगा। अमेरिका की इकॉनमी को अब मंदी ही बचा सकती है। कई साल की महंगाई और फ्री मनी के बाद अब यही सबसे बेहतर समाधान दिख रहा है। मंदी एक ही झटके में ट्रंप के सभी आर्थिक लक्ष्य हासिल हो जाएंगे। इससे मंदी से महंगाई, ट्रेजरी यील्ड और ट्रेड डेफिसिट में गिरावट आएगी। महंगाई कम होने से फेड रिजर्व ब्याज दरों में कटौती करेगा। इससे अमेरिका को कर्ज के ब्याज के भुगतान में कम पैसा देना होगा। साथ ही मंदी से तेल की कीमतों में भी गिरावट आएगी।

अमेरिका में 30 साल के मैच्योरिटी वाले सरकारी बॉन्ड्स की यील्ड 5.09 फीसदी पहुंच चुकी है जो नवंबर 2023 के बाद सबसे अधिक है। फेड 2023 से चार बार ब्याज दर बढ़ा चुका है। उससे पहले जुलाई 2007 में 30 साल के मैच्योरिटी वाले सरकारी बॉन्ड्स की यील्ड इस स्तर पर पहुंची थी। अमेरिका का कर्ज तेजी से बढ़ रहा है और 2055 तक इसके देश की इकॉनमी का 220 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है। यह मौजूदा स्तर से करीब 100 फीसदी अधिक है। इसी तरह बजट डेफिसिट भी 2054 तक 12.3 फीसदी पहुंच सकता है जो मौजूदा स्तर से 5 फीसदी अधिक है।

अमेरिका का बढ़ता कर्ज

अमेरिका का कर्ज 36 ट्रिलियन डॉलर पहुंच चुका है। हाल में मूडीज ने अमेरिका के क्रेडिट रेटिंग को परफेक्ट से एक स्थान कम कर दिया है। 108 साल में पहली बार उसने अमेरिका का रेटिंग गिराई है। इसका अमेरिका पर व्यापक असर देखने को मिल सकता है। ट्रंप ने दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के साथ ही ताबड़तोड़ फैसले लिए हैं। इनमें 60 से अधिक देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ बढ़ाना शामिल है। फिलहाल इसमें 90 दिन की मोहलत दी गई है। लेकिन लागू होने के बाद अमेरिका में महंगाई बेकाबू हो सकती है। अगर ऐसा हुआ तो फेड रिजर्व ब्याज दरों में कटौती से परहेज कर सकता है।

चीन के साथ पिछले हफ्ते हुई ट्रेड डील में भी दरारें आने लगी हैं। अमेरिका और चीन ने एकदूसरे पर आरोप लगाने शुरू कर दिए हैं। चीन का आरोप है कि अमेरिका डील में बनी सहमति के अनुरूप काम नहीं कर रहा है। अमेरिका और चीन दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं। चीन का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर अमेरिका है। इसी तरह चीन भी अमेरिका के बड़े ट्रे़डिंग पार्टनर्स में से एक है। लेकिन पिछले कुछ समय से दोनों देशों के बीच ट्रेड वॉर चल रहा है। यानी चीन के साथ लंबे समय तक तनातनी बने रहने का खतरा है। ऐसे में मंदी ही अमेरिका के लिए बेहतर विकल्प लग रही है। लगातार दो तिमाहियों में गिरावट को मंदी कहा जाता है। अमेरिका में साल की पहली तिमाही में गिरावट रही थी।

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