एसडीएम के ड्रायवर को आधी रात के बाद अपनी पुत्रवधु को ले जाना पड़ा प्राइवेट अस्पताल*
महू। नगर प्रतिनिधि
महू के शासकीय डॉ अम्बेडकर अस्पताल में शुक्रवार ९ सितम्बर को ही एसडीएम अक्षत जैन बड़े खुश दिखाई दे रहे थे जब अस्पताल में मंत्री उषा ठाकुर द्वारा १ करोड़ १६ लाख रुपए की लागत से बने पीआईसीयू और आईसीयू का शुभारम्भ किया जा रहा था और यह संदेश दिया जा रहा था कि अब गम्भीर मरीज को भी इंदौर अस्पताल के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा। लेकिन मात्र १२ घंटे के भीतर ही अस्पताल के प्रभारी ने ही प्रसूति के लिये आई महिला के प्रसव होने के बाद हालत बिगड़ने पर निजी अस्पताल में भेजने को मजबूर कर दिया। प्रसव पीड़ा के बाद अचानक भागदौड़ करके निजी अस्पताल में भेजने में उस महिला की बेबसी को समझा जा सकता है। यह मामला और कोई नहीं एसडीएम अक्षत जैन के ड्रायवर की पुत्र वधु का ही रहा जिसे लेकर प्रभारी डॉक्टर एच आर वर्मा ने गम्भीर हालत के बावजूद इलाज के नाम पर हाथ ऊंचे करते हुए केस को निजी अस्पताल में भिजवा दिया जहाँ महिला अब खतरे से बाहर बताई गई।
१० सितम्बर की सुबह साढ़े छ बजे प्रिय पाठक कार्यालय से चंद कदम दूरी पर स्थित गेटवेल अस्पताल के बाहर राजेश चौहान परेशानी में चाय गुमटी पर नजर आए। आपको बता दें कि राजेश चौहान महू एसडीएम अक्षत जैन के शासकीय वाहन के चालक हैं। प्रिय पाठक ने उनसे प्रश्न किया कि इतनी सुबह परेशानी में क्यों हो, इस पर राजेश चौहान ने दुखी होकर कहा कि मेरी बहू शिवानी को अलसुबह यहाँ गेटवेल अस्पताल लाना पड़ा जिसे कल रात ढाई बजे शासकीय आम्बेडकर अस्पताल में प्रसव कराया गया था। सुनकर चौंकना स्वाभाविक था – सक्षम साधनों से सुसज्जित अस्पताल से यहाँ लाना पड़ा, क्यों? इस पर राजेश ने किस्सा यूं सुनाया – मेरी पुत्र वधु शिवानी को जो कि महूगांव की निवासी है को प्रसव पीड़ा होने के बाद महू शास. अम्बेडकर अस्पताल लाया गया। यहाँ डॉ सीमा सोनी (डॉ हंसराज वर्मा की पत्नी) की नाइट ड्युटी थी, लेकिन वें वहाँ उपस्थित नहीं थी। इस प्रकार डिलेवरी नर्सों आदि ने करवाई। थोड़ी ही देर में पुत्र रत्न की प्राप्ति से हमारे चेहरे खिल गए लेकिन पता चला कि शिवानी को तेजी से खून बहना शुरु हो गया है। डॉ सीमा सोनी को उनके क्वार्टर जाकर नींद से उठाकर जानकारी दी गई वे किसी तरह अस्पताल आईं और मामला प्रभारी डॉ हंसराज वर्मा तक पहॅुचा। आपस में पत्नी से गुफ्तगूं करने के बाद डॉ हंसराज वर्मा राजेश चौहान से बोले कि खून बंद नहीं हो रहा है ऐसे में मरीज की जान को खतरा हो सकता है, तुम ऐसा करो इन्हें रेडक्रास अस्पताल या किसी प्राइवेट अस्पताल में ले जाओ। सुनकर राजेश अवाक रह गया कि साधन सम्पन्न अस्पताल और इतना मजबूर.. अक्षम…! जहाँ कल ही हमारे साब की उपस्थिति में पीआईसीयू और आईसीयू की सुविधा दी गई! मरता क्या न करता अपनी पुत्र वधु को इस हालत में तुरंत गेटवेल अस्पताल चना गोदाम महू लाए और भर्ती कराया गया। सुबह तक हालत में सुधार आया। राजेश बताता है कि डॉ अम्बेडकर अस्पताल तो मरीजों की सेवा के नाम पर बकवास अस्पताल है जब मेरी बहू निजी अस्पताल में चंद घंटों में ही राहत पा सकती थी तो ये काम शासकीय अस्पताल में प्रभारी डॉ वर्मा और उसकी डॉ पत्नी के रहते क्यों नहीं हुआ? यह पूछने पर कि सारा मामला आपने अपने साब एसडीएम जैन को क्यों नहीं बताया, वो मायूस होकर बोला – साब को आधी रात को उठाना मुनासिब नहीं समझा….!
मामले में डॉ अंबेडकर अस्पताल के प्रभारी डॉ एच आर वर्मा से उनके मो. नंबर 9977273709 पर बात करना चाही मगर उन्होंने लम्बी रिंग जाने के बाद भी कॉल नहीं उठाया।

