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28 सालों से अधूरा, 1100 लोगों के घरों का सपना

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इंदौर

वैसे ये आम बोरी हैं, लेकिन इनमें कैद दस्तावेज कागज के टुकड़े नहीं बल्कि 28 साल से अधूरे घरों के सपने हैं। जो 1100 परिवारों ने देखे थे। उम्मीद थी, मजदूर पंचायत संस्था की पुष्पविहार कॉलोनी में घर होगा, जिसके लिए सारी जमा पूंजी निकाल दी थी। मंगलवार को दस्तावेज कोषालय से कलेक्टोरेट लाए गए हैं। नए सिरे से जांच शुरू की जा रही है। उम्मीद है, ये बोरियां जब खुलेंगी तो उनमें से लोगों के सपने साकार होकर निकलेंगे।

1055 करोड़ मुआवजा बना IDA 1 करोड़ भी न दे सका

मेरी उम्र 73 साल हो चुकी है। 1988 से प्लॉट का इंतजार कर रहा हूं। आईडीए स्कीम नहीं लाता तो हम कब से यहां अपने मकान बना लेते। देरी हुई तो कुछ गुंडे, माफिया भी आ गए।

– एम के मिश्रा, पीडि़त व संघर्ष समिति के महासचिव

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