*4 घंटे तक रुकी रही नीलामी*
*समर्थन मूल्य से ही होगी नीलामी शुरू*
इंदौर ।गेहूं की आवक लगातार मंडी में बढ़ रही है। आज जब 4 दिनों बाद मंडी खुली तो सुबह लक्ष्मी नगर अनाज मंडी में 500 से ज्यादा ट्रैक्टर ट्राली और अन्य वाहनों में गेहूं की भारी आवक हुई थी। सुबह जब नीलामी शुरू हुई तो पूर्व में किए गए निर्णय अनुसार निर्धारित समर्थन मूल्य₹2125 के बजाय 1600-1700 में नीलामी शुरू हुई। जिससे किसानों में आक्रोश फैल गया। अच्छी क्वालिटी का गेंहू भी व्यापारी कम भाव पर खरीदने की कोशिश में थे । जिसे नीलामी कर रहे मंडी कर्मचारियों का समर्थन मिल रहा था। इससे आक्रोशित किसानों ने मंडी के गेट बंद कर सड़क पर चक्का जाम कर दिया।

करीब 500 की तादाद में किसानों ने दोपहर 3:30 बजे तक चक्का जाम किया।
संयुक्त किसान मोर्चा के नेता रामस्वरूप मंत्री, बबलू जाधव, लाखन सिंह डाबी आदि ने बताया कि 4 दिन पूर्व ही जब हडताल हुई थी , तब भी हमने मंडी प्रशासन को कहा था कि गेहूं की आवक बढ़ने पर यदि नीलामी सही तरीके से नहीं हुई तो विवाद और ज्यादा बढ़ेंगे । उस वक्त भी बैठक में तय किया गया था की नीलामी में बोली समर्थन मूल्य से ही लगाई जाएगी, लेकिन आज फिर मंडी कर्मचारियों ने उस वादे का उल्लंघन किया। संयुक्त किसान मोर्चा ने तभी कहा था कि मंडी समिति को गेहूं के समर्थन मूल्य ₹2125 से ही नीलामी शुरू करना चाहिए । जिसे मंडी प्रशासन, मंडी सचिव नरेश परमार और एसडीएम सिकरवार ने मंजूर भी किया था। लेकिन आज मंडी खुली तो फिर ढाक के तीन पात की स्थिति बन गई। जिससे किसानों में आक्रोश फैल गया। किसानों का कहना था कि क्वालिटी चेक करने के लिए मंडी समिति के पास कोई व्यवस्था नहीं है। इसलिए कृषि विभाग के अधिकारी को बुलाकर गेहूं की क्वालिटी तय की जाना चाहिए। करीब 5 घंटे तक सड़क पर बैठकर किसानों ने नारेबाजी की दो दौर की चर्चा भी मंडी सचिव श्री नरेश परमार और एसडीएम सिकरवार से की और आखिर में तय हुआ की नीलामी समर्थन मूल्य से ही शुरू की जाएगी। उसके बाद नीलामी शुरू हुई।
संयुक्त किसान मोर्चा के नेता रामस्वरूप मंत्री और बबलू जाधव ने कहां है कि मध्य प्रदेश सरकार ने जब 2125 रुपए समर्थन मूल्य घोषित किया है तो फिर उससे नीचे गेंहू क्यों बेचा जा रहा है। यदि समर्थन मूल्य पर गेहूं बिकेगा तो ना तो किसानों में असंतोष होगा और ना ही विवाद की स्थिति बनेगी। जिस तरह से किसी भी सरकारी टेंडर का एक निर्धारित मूल्य होता है। और उससे कम का जब टेंडर भरा जाता है तो वह टेंडर मंजूर नहीं होता है ।उसी तरह से समर्थन मूल्य का भी मामला है। सरकार ने जब घोषित कर दिया है कि गेहूं का समर्थन मूल्य किसी भी स्थिति में ₹2125 से नीचे नहीं होगा, तो फिर आखिर मंडी समिति किसानों का गेहूं कम कीमत पर क्यों बिकवाना चाहता है। आपने मांग की है कि आए दिनों के विवाद रोकने के लिए निर्धारित समर्थन मूल्य पर ही गेहूं की बिक्री हो तभी किसानों के आक्रोश को शांत किया जा सकेगा।