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प्रधानमंत्री और सोनिया गांधी की ओर से भेजी गई चादरों की वजह से ख्वाजा साहब की दरगाह पर आने वाले जायरीन परेशान हुए

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एस पी मित्तल, अजमेर

अजमेर में इन दिनों सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती का छह दिवसीय सालाना उर्स भर रहा है। दो फरवरी से शुरू हुआ उर्स 8 फरवरी को कुल की रस्म के साथ संपन्न होगा। उर्स में शरीक होने के लिए देश भर से जायरीन अजमेर आए हैं। 6 फरवरी को भी ख्वाजा साहब की दरगाह पर जायरीन की जबरदस्त भीड़ रही। इसी भीड़ में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी की ओर से सूफी परंपरा के अनुरूप पवित्र मजार पर चादर पेश की गई। पीएम मोदी की चादर को केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलात मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी और सोनिया गांधी की चादर को राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत लेकर आए। गहलोत के साथ कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अजय माकन भी थे। वीआईपी व्यक्तियों को जायरीन की भीड़ में कोई परेशानी न हो, इसके लिए दरगाह के आसपास के रास्तों को रोका गया। एक रास्ता ऐसा बनाया जिसमें सिर्फ वीआईपी व्यक्तियों के वाहन ही दौड़ सके। तय कार्यक्रम के अनुसार सुबह साढ़े 11 बजे पीएम मोदी और दोपहर साढ़े 12 बजे सोनिया गांधी की ओर से चादर पेश होनी थी।

पीएम मोदी की चादर को लेकर जब केंद्रीय मंत्री नकवी आए तो प्रशासन ने देहली गेट से लेकर दरगाह के मुख्य दरवाजे  तक जायरीन का आवागमन बंद कर दिया। प्रशासन की योजना थी कि एक बार के बंद में ही सीएम अशोक गहलोत के काफिले को भी दरगाह तक ले आया जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। नकवी के लिए प्रातः साढ़े 11 बजे से दोपहर एक बजे तक दरगाह क्षेत्र में यातायात को बंद रखा गया, लेकिन जब सीएम गहलोत का काफिला नहीं आया तो बंद रास्तों को जायरीन के लिए खोलना पड़ा। असल में सीएम गहलोत का काफिला पहले सर्किट हाउस चले गया। सर्किट हाउस में विलंब होने की वजह से दरगाह में दोपहर की नमाज का समय हो गया। यही वजह रही कि सीएम गहलोत ने सोनिया गांधी की चादर को नमाज के बाद दोपहर ढाई बजे पेश किया। इसके लिए प्रशासन को दोबारा से दरगाह क्षेत्र के रास्तों को बंद करना पड़ा। दो दो बार रास्ते बंद होने से उर्स में आने वाले जायरीन को परेशानी हुई। दरगाह का खादिम समुदाय पहले भी आग्रह कर चुका है कि वीआईपी व्यक्तियों की चादर को उर्स के शुरुआत के समय ही पेश कर दिया जााए। ताकि जायरीन को परेशानी नहीं हो। 6 फरवरी को उर्स का चौथ दिन रहा इसलिए दरगाह के अंदर और आसपास के दो तीन किलोमीटर के क्षेत्र में जायरीन की भीड़ रही। भीड़ में रास्तों का जाम कर जायरीन को रोकना पुलिस के चुनौतीपूर्ण काम रहा। कई स्थानों पर पुलिस कर्मियों को जायरीन से उलझते हुए देखा गया। ख्वाजा साहब के सालाना उर्स के मौके पर पीएम मोदी और सोनिया गांधी ने अपने संदेश भी जारी किए हैं। मोदी ने अपने संदेश में कहा है कि ख्वाजा साहब के उर्स विश्व भर में उनके अनुयायियों को बधाई एवं शुभाकामनाएं। दुनिया को मानवता का संदेश देने वाले महान सूफी संत के उर्स के अवसर पर  अजमेर शरीफ में चादर भेजते हुए मैं उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता हंू। अनेकता में एकता भारत की पहचान है। देश में विभिन्न पंथों सम्प्रदायों एवं मान्यताओं का सद्भाव पूर्ण सअस्तित्व हमारी विशिष्टता है। गरीब नवाज के आदर्शों एवं विचारों से पीडिय़ों को निरंतन प्रेरणा मिलती रहेगी, समरस्ता और भाई चारे की मिसाल का यह उत्सव श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास को और प्रगाड़ बनाएगा। इसी प्रकार सोनिया गांधी ने भी अपने संदेश में उर्स में शरीक होने वाले जायरीन को मुबारकबाद दी है। सोनिया गांधी ने ख्वाजा साहब की दरगाह को कौमी एकता का प्रतीक बताया। 

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