“डीएवीवी के रजिस्ट्रार अजय वर्मा एंव डिप्टी रजिस्ट्रार प्रज्वल खरे एंव वित्त नियंत्रक दिलीप वर्मा ने आशापुरी आउट सोर्सिंग प्रा. लिमिटेड कंपनी एंव कामथेन सिक्योरिटीज़ सर्विसेज़ के साथ मिलकर किया लाखों का घोटाला “
“डीएवीवी ने टेंडर दिया आशापुरी को 180 कर्मचारियों का लेकिन सिर्फ़ 65 कर्मचारी ही काम कर रहें वहीं कामथेन में 120 कर्मचारियों की जगह मात्र 50 सफ़ाई कर्मचारी ही काम कर रहें हैं”
“डीएवीवी का बजट भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा हैं”
“भ्रष्टाचार के खेल में डीएवीवी कार्य परिषद के सदस्य भी शामिल “
“कुलपति को पत्र लिखकर पूछे सवाल “
इंदौर,डीएवीवी भ्रष्टाचार का वट वृक्ष बन गया हैं।
शिक्षा के नाम पर एडमिशन और नम्बर बढाने के नाम पर कथित छात्र नेताओं का दलाली का अड्डा बने डीएवीवी में एक ग्रेड भ्रष्टाचार की जुड़ गई हैं।
म.प्र.कांग्रेस कमेटी के प्रदेशसचिव राकेश सिंह यादव ने आरोप लगाया की डीएवीवी भ्रष्टाचार की कान्हा- सरस्वती नाले से भी बदतर स्थिति में पहुँच गया हैं।
डीएवीवी के रजिस्ट्रार अजय वर्मा ,डिप्टी रजिस्ट्रार प्रज्वल खरे एंव वित्त नियंत्रक दिलीप वर्मा ने आशापुरी आउट सोर्सिंग प्रा.लिमिटेड एंव कामथेन सिक्योरिटीज़ कंपनी के साथ षड्यंत्र रचकर डीएवीवी में लाखों का घोटाला किया गया हैं।
सुनियोजित षड्यंत्र के अंतर्गत डीएवीवी में मात्र 60 कर्मचारियों की डिमांड थी।लेकिन भ्रष्टाचारीयों में मात्र 60 कर्मचारियों की डिमांड को 180 कर्मचारियों की फर्जी डिमांड बनाकर टेंडर कराकर आशापुरी कंपनी को काम दिया।
इस भ्रष्टाचार की योजना में डीएवीवी कार्य परिषद के सदस्य भी इन कंपनियों को सहमति देने एंव बिना टेंडर समय सीमा बढ़ाकर डीएवीवी में भ्रष्टाचार का इतिहास रचने में शामिल हैं।
इसके पश्चात डीएवीवी से 180 कर्मचारियों की बजट (तनख़्वाह) लेकर आशापुरी ने मात्र 60 कर्मचारियों को काम पर लगवाया एंव बिल का भुगतान पूरे 180 कर्मचारियों के लिए किया जाता हैं।
साफ़ और स्पष्ट हैं की 120 कर्मचारियों का प्रतिमाह का भुगतान डीएवीवी कार्य परिषद के सदस्य एंव भ्रष्ट डीएवीवी के अधिकारी कर्मचारी मिलकर हज़म कर जाते हैं।
सबसे बड़े आश्चर्य का विषय यह हैं की कामथेन सिक्योरिटीज़ कंपनी को छिंदवाड़ा एंव सिंगरोली में ब्लेक लिस्ट करने के बाद तीन वर्ष के लिए प्रतिबंधित किया गया था।क्योंकि यह कंपनी फ़र्ज़ी बिल बनाने और जीएसटी चोरी करने में माहिर है।
सारा सच कुलपति जानने के बाद भी ख़ामोश हैं।इसका सीधा अर्थ हैं की कुलपति रेणु जैन का भ्रष्टाचारीयों को खुला संरक्षण हैं।
डीएवीवी में भ्रष्टाचार के खिलाफ डीएवीवी रजिस्ट्रार अजय वर्मा,डिप्टी रजिस्ट्रार प्रज्वल खरे एंव वित्त नियंत्रक दिलीप वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम की धारा 7 एंव इस कृत्य को अपराधिक अवचार की श्रेणी में मानते हुए भ्रष्टाचार अधिनियम की धारा 13(2) के अंतर्गत एफ़आइआर दर्ज की जाना चाहिए।
कांग्रेस के प्रदेशसचिव यादव ने कुलपति रेणु जैन से पॉंच सवाल पूछे हैं-
1- क्या डीएवीवी कार्यपरिषद एंव भ्रष्ट रजिस्ट्रार अजय वर्मा,डिप्टी रजिस्ट्रार प्रज्वल खरे एंव वित्त नियंत्रक दिलीप वर्मा एंव आउटसोर्सिंग कंपनियों के काले कारनामों में शामिल हैं..?
2- डीएवीवी में क्या कुलपति आउटसोर्सिंग कंपनियों के टेंडर अनुसार नियुक्त कर्मचारियों की परेड मीडिया के समक्ष कराकर सच सामने लायेगी या ख़ामोश रहकर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देंगी..?
डीएवीवी में कितने कर्मचारी आउटसोर्सिंग कंपनी के काम कर रहें हैं इसका खुलासा पिछले आठ दिन की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग से तत्काल हो सकता हैं।क्या कुलपति ईमानदारी से सच बताने का साहस कर पायेंगी…?
3- आउटसोर्सिंग कंपनियों के कर्मचारियों की तनख़्वाह उनके एकाउन्ट में क्यों नहीं दी जाती हैं।
न उनका पीएफ जमा होता हैं न ही ईएसआईसी होता हैं।
जो कर्मचारी यूनिवर्सिटी में काम कर रहें हैं उनकी योग्यता का सत्यापन एंव पुलिस वेरिफ़िकेशन आज तक क्यों नहीं किया गया हैं..?
4- आउट सोर्सिंग कंपनी को बिना टेंडर करें कार्यपरिषद एंव भ्रष्ट डीएवीवी अधिकारियों एंव कर्मचारियों ने मिलकर ब्लेक लिस्ट कंपनी का कार्यकाल क्यों बढ़ाया..?
5- डिप्टी रजिस्ट्रार प्रज्वल खरे का ट्रांसफ़र उज्जैन हो जाने के बाद भी रिलीज़ क्यों नहीं किया गया हैं।क्या इसकी वजह डीएवीवी में भ्रष्टाचार का खेला हैं..?
डीएवीवी की कुलपति को नैतिकता के नाते सारे सवालों के जवाब लिखित में तथ्यों के साथ देना चाहिए।
कांग्रेस प्रदेशसचिव यादव ने सारे मामले की तथ्यों सहित लोकायुक्त,ईओडब्ल्यू,महामहिम राज्यपाल सहित मुख्यमंत्री के समक्ष दर्ज करायी हैं।

