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विधायक वाजिब अली पर ईडी और हुडला पर सीबीआई की कार्यवाही से राजस्थान में राज्यसभा का चुनाव हुआ रोचक

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एस पी मित्तल, अजमेर

राजस्थान में भी राज्यसभा की चार सीटों के लिए 10 जून को मतदान होना है। लेकिन इससे पहले ही राजधानी जयपुर में केंद्रीय जांच एजेंसियों और अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार में घमासान शुरू हो गया है। मीडिया किंग सुभाष चंद्रा के निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर नामांकन करने से राजस्थान के एक एक विधायक का महत्व हो गया है। सबसे ज्यादा भाव 13 निर्दलीय और छोटे राजनीतिक दलों के विधायकों के हो गए हैं। कांग्रेस को अपने तीसरे उम्मीदवार को जीताने के लिए 21 वोटों का जुगाड़ करने की जरूरत है, जबकि निर्दलीय सुभाष चंद्रा को जीत के लिए 11 विधायकों का जुगाड़ करना है। जीत के लिए 41 वोट चाहिए, जबकि चंद्रा के पास भाजपा के सरप्लस 30 वोट हैं। चंद्रा को हनुमान बेनीवाल की पार्टी के तीनों विधायकों, बसपा वाले तीन, बीटीपी के दो, निर्दलीयों तीन कम्युनिस्ट पार्टी का एक तथा दो अन्य विधायकों का समर्थन बताया जा रहा है। 2 जून को राजधानी जयपुर में राजनीतिक माहौल तब गर्म हो गया, जब निर्दलीय विधायक ओम प्रकाश हुड़ला को सीबीआई और बसपा के कांग्रेस में शामिल हुए विधायक वाजिब अली को ईडी के नोटिस मिलने की खबरें सामने आई। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने आरोप लगाया कि राज्यसभा चुनाव के मौके पर विधायकों को डराने धमकाने के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है। डोटासरा ने कहा कि जयपुर की अनेक होटलों में केंद्रीय जांच एजेंसियों के अधिकारी डेरा डाले हुए हैं। मीडिया को ऐसे अधिकारियों की जांच पड़ताल करनी चाहिए। डोटासरा के इस बयान के साथ ही यह खबर आई कि जयपुर पुलिस पूरे महानगर में अपराधियों को पकडने के लिए अभियान चला रही है। कोई तीन हजार पुलिस कर्मियों को होटल, रेस्टोरेंट व अन्य स्थानों की जांच पड़ताल का काम सौंपा गया है। जानकार सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार को एक जून को ही सूचना मिल गई थी कि केंद्रीय जांच एजेंसियां जयपुर में सक्रिय हैं। एजेंसियों के अधिकारियों के बारे में जानकारी एकत्रित करने के लिए ही जयपुर पुलिस ने एक बड़ा अभियान चलाया। हालांकि यह अभियान अपराधियों के विरुद्ध बताया गया, लेकिन इसका असली मकसद केंद्रीय जांच एजेंसियों के अधिकारियों के बारे में पता लगाने का था। इस बीच 2 जून का कांग्रेस समर्थक सभी विधायकों को सिविल लाइन स्थित मुख्यमंत्री के सरकारी आवास पर एकत्रित किया गया और अब यहीं से विधायकों को उदयपुर भेजा जा रहा है। ये विधायक आगामी 9 जून तक उदयपुर की होटलों में ही रहेंगे। 10 जून को जब राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान होगा, तब इन विधायकों को जयपुर लाया जाएगा। सीएम गहलोत का प्रयास है कि 10 जून से पहले पहले उदयपुर में 125 विधायक एकत्रित कर लिए जाए। ताकि कांग्रेस के तीनों उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित हो सके। इसके लिए सीएम गहलोत की ओर से कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है। सीएम गहलोत अपने प्रशासनिक तंत्र के माध्यम से केंद्रीय जांच एजेंसियों को किसी भी विधायक को ले जाने का मौका नहीं देना चाहते हैं।

विधायक हुड़ला का मीणा पर हमला:

भाजपा पृष्ठभूमि वाले निर्दलीय विधायक ओम प्रकाश हुड़ला ने सीबीआई के नोटिस के मामले में भाजपा सांसद किरोड़ी लाल मीणा पर हमला किया है। हुड़ला ने कहा कि सीबीआई का नोटिस सांसद मीणा ने ही दिलवाया है। मीणा मुझे दबा कर राज्यसभा के चुनाव में वोट हासिल नहीं कर सकते हैं। वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में भी किरोडी लाल मीणा की वजह से ही मुझे भाजपा का उम्मीदवार नहीं बनाया गया। लेकिन मैंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर ही चुनाव जीता। हुड़ला ने बताया कि गत विधानसभा के चुनाव में मीणा के कहने पर 17 टिकट दिए गए थे, लेकिन  मीणा सहित सभी उम्मीदवार चुनाव हार गए। भाजपा दबाव की राजनीति करते हुए मीणा ने राज्यसभा के सांसद का पद हासिल कर लिया, जबकि मीणा की गतिविधियों से भाजपा को भारी नुकसान हो रहा है। मीणा पीड़ित व्यक्तियों को राहत दिलाने का दावा करते हैं, जबकि उनके भतीजे संजय और उनकी पत्नी खुद प्रताड़ित है। मेरे पास मीणा के भतीजे संजय के मैसेज मोबाइल में सुरक्षित हैं। मीणा जब अपने परिवार के सदस्यों को ही संतुष्ट नहीं कर सकते तो फिर दूसरे लोगों की क्या मदद करेंगे? विधायक बनने के बाद मैंने साढ़े तीन वर्ष तक किरोड़ी लाल मीणा के खिलाफ एक शब्द भी नहीं कहा, लेकिन आज जब मुझे सीबीआई का नोटिस भिजवाया गया है तो अब मैं मीणा को नहीं छोड़ूंगा। मीणा ने यदि हिम्मत हो तो वे महुआ विधानसभा क्षेत्र से मेरे सामने चुनाव लड़े। मैं निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में ही किरोड़ी लाल को हरा दूंगा। हुड़ला ने कहा कि निर्दलीय विधायक के तौर पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मुझे संरक्षण दिया है। आज जब नोटिस मिलने की बात सामने आई तो भी सीएम गहलोत ने फोन पर मेरी हिम्मत बढ़ाई। हुड़ला ने कहा कि सीबीआई ने हत्या के जिस प्रकरण में नोटिस भिजवाया है, उसमें राज्य पुलिस पहले ही जांच कर चुकी है। इस जांच में मैं और मेरे परिवार के सदस्य निर्दोष पाए गए हैं।

आरएएस का तबादला:

सीएम अशोक गहलोत और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डोटासरा भले ही भाजपा पर केंद्रीय जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाए, लेकिन राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी अकील अहमद खान का तबादला राज्य की कांग्रेस सरकार की नीयत पर सवाल उठता है। 31 मई को एआईएमआईएम के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने जयपुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष जमिल अहमद खान को नियुक्त किया, अलगे ही दिन राज्य सरकार ने जमिल अहमद के भाई अकील अहमद का तबादला जयपुर स्थित वक्फ बोर्ड के सीईओ के पद से बांसवाड़ा स्थित महिला एवं बाल विकास विभाग के उपनिदेशक के पद पर कर दिया। असल में  अकील के भाई जमिल को एआईएमआईएम का अध्यक्ष बनाए जाने से सरकार में बैठे लोग नाखुश हो गए। बांसवाड़ा में जिस पद पर अकील की नियुक्ति की गई है, वह संभाग स्तर का पद है, जबकि वक्फ बोर्ड के सीईओ का पद राज्य स्तरीय है। अकील अहमद का तबादला तब किया गया है, जब उन्होंने वीआरएस के लिए आवेदन कर रखा है। राज्य  सरकार ने अकील अहमद के आवेदन को अभी तक स्वीकार नहीं किया गया है। जानकार सूत्रों के अनुसार यदि अकील अहमद को सरकारी पद छोड़ने की अनुमति मिल जाती तो वे ही एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष बनते। अकील अहमद के भाई शकील अहमद टोंक जिले के उनियारा से डीएसपी के पद पर नियुक्त हैं।

विधायक टाक रिसोर्ट में पहुंचे:

किशनगढ़ के निर्दलीय विधायक सुरेश टाक अब उदयपुर स्थित ताज अरावली रिसोर्ट में पहुंच गए हैं। 31 मई की रात को भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया से मुलाकात के बाद सीएम अशोक गहलोत के निर्देश पर सुरेश टाक को एक जून को ही रिसोर्ट में पहुंचा दिया गया है। माना जा रहा है कि कांग्रेस समर्थक सभी विधायकों को किसी रिसोर्ट में रखा जाएगा। इस रिसोर्ट में 175 आलीशान कमरे हैं। रिसोर्ट में पांच सितारा होटल की सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। सुरेश टाक के साथ ही निर्दलीय विधायक खुशवीर जोजावर और बाबूलाल नागर भी रिसोर्ट में हैं। 

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