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देश में कमर्शियल सिलेंडर की कमी का असर,लोकसभा में बोले हरदीप सिंह पुरी-सप्लाई पूरी तरह सामान्य 

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एलपीजी सिलेंडर को लेकर देश के अलग-अलग शहरों में अलग तस्वीर दिख रही है. जहां गाजियाबाद के लोनी प्लांट से रोजाना 70 हजार घरेलू सिलेंडर की सप्लाई सामान्य बताई जा रही है, वहीं दिल्ली और लखनऊ में कमर्शियल गैस की कमी से रेस्टोरेंट कारोबार प्रभावित हो रहा है. कई जगहों पर होटल दोबारा लकड़ी-कोयले की भट्टी पर खाना पकाने लगे हैं और सिलेंडर की ब्लैक मार्केटिंग के आरोप भी सामने आए हैं.

अमेरिका और इजरायल के खिलाफ ईरान की लड़ाई के के बीच भारत में एलपीजी को लेकर अफवाहों और कमी की खबरों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. कई शहरों में सिलेंडर की उपलब्धता को लेकर अलग-अलग तस्वीर सामने आ रही है. जहां एक तरफ गाजियाबाद के लोनी स्थित भारत गैस प्लांट के अधिकारियों ने साफ कहा है कि घरेलू एलपीजी की सप्लाई पूरी तरह सामान्य है और रोजाना करीब 70 हजार सिलेंडर उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली और हरियाणा के डिस्ट्रीब्यूटर्स को भेजे जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कई शहरों में कमर्शियल सिलेंडर की कमी का असर दिखाई देने लगा है.

लखनऊ में इसका असर सीधे रेस्टोरेंट कारोबार पर पड़ा है. एलपीजी सिलेंडर आसानी से न मिलने के कारण कई होटल और ढाबों ने एक बार फिर पुराने तरीके अपनाने शुरू कर दिए हैं. कई जगहों पर अब लकड़ी और कोयले की भट्टी पर मटन और चिकन पकाया जा रहा है. रेस्टोरेंट मालिकों का कहना है कि करीब एक दशक पहले तक वे इसी तरह खाना बनाते थे, लेकिन गैस के इस्तेमाल के बाद यह तरीका लगभग खत्म हो गया था.

राजधानी दिल्ली में भी गैस एजेंसियों के बाहर लोगों की भीड़ देखने को मिली, जहां हालात संभालने के लिए पुलिस तक तैनात करनी पड़ी. वहीं कमर्शियल एलपीजी की कमी के चलते कम से कम 12 रेस्टोरेंट अस्थायी रूप से बंद हो गए हैं. इस बीच सिलेंडरों की ब्लैक मार्केटिंग के आरोप भी सामने आए हैं, जहां एक सिलेंडर के लिए 5000 रुपये तक मांगे जाने की बात कही जा रही है.

तेल और गैस की किल्‍लत पर क्‍या बोले कांग्रेस नेता मनीष‍ तिवारी?

कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा, “सबसे बड़ा सवाल भारत की ऊर्जा सुरक्षा का है, भारत के दृष्टिकोण से मूल मुद्दा यह है कि कितने भारतीय ध्वजवाहक जहाज या भारत के लिए माल ले जाने वाले कितने तेल टैंकरों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की अनुमति है. आखिरकार कच्चे तेल का एक बैरल अब सौ डॉलर के करीब पहुंच रहा है. अगर मिडिल ईस्ट में लड़ाई का शांतिपूर्ण हल निकलता है तो हर कोई बहुत खुश होगा. लेकिन भारत सरकार को सबसे पहले दो बातों पर ध्यान देना चाहिए, पहला, खाड़ी देशों में रहने वाली लोगों की बड़ी आबादी की सुरक्षा और संरक्षा सुनिश्चित करना और यह पक्का करना कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा कमज़ोर न हो. इस मामले में सरकार को सदन में एक बहुत ही पार्दर्शी बयान देना चाहिए कि हमारे सामरिक पेट्रोलियम भंडार की क्या स्थिति है.”

 ‘पहले स्‍ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से 45% कच्चा तेल और 60% एलपीजी आती थी अब…’, संसद में हरदीप सिंह पुरी ने स्‍पष्‍ट की भारत की स्थिति

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने लोकसभा में देश की ऊर्जा सुरक्षा पर ऐतिहासिक बयान देते हुए कहा कि भारत ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली आपूर्ति से भी अधिक मात्रा में कच्चे तेल का वैकल्पिक इंतजाम कर लिया है. संकट से पहले भारत अपनी जरूरत का 45% कच्चा तेल और 60% एलपीजी खाड़ी देशों से आयात करता था, जिसे अब अमेरिका, नॉर्वे, कनाडा, अल्जीरिया और रूस जैसे देशों से आयात कर डायवर्सिफाई (विविधतापूर्ण) कर दिया गया है. हरदीप पुरी ने भरोसा दिलाया कि संघर्ष लंबा खिंचने की स्थिति में भी भारत के पास पर्याप्त स्टॉक और वैकल्पिक मार्ग मौजूद हैं।

 गैस की कालाबाजारी पर सरकार की चुप्पी चिंताजनक, सपा सांसद डिंपल यादव का केंद्र पर हमला

समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने देश में एलपीजी की किल्लत और बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि सरकार जमीनी हकीकत और लोगों की समस्याओं को स्वीकार ही नहीं कर रही है. डिंपल यादव ने सवाल उठाया कि जब कमर्शियल और घरेलू गैस की भारी कालाबाजारी हो रही है और लोग आपस में लड़ रहे हैं, तो सरकार समाधान कैसे निकालेगी? उन्होंने गैस के साथ-साथ हवाई टिकटों की बढ़ती कीमतों पर भी चिंता जताई और पूछा कि आम आदमी पर इस बोझ का मुनाफा कौन कमा रहा है? डिंपल ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ के नारे पर तंज कसते हुए कहा कि महज दो हफ्तों के संकट ने सरकार की निर्भरता की पोल खोल दी है. उन्होंने सरकार से जवाब मांगा कि आखिर युवाओं और आम जनता को इस संकट से उबारने के लिए उनकी क्या तैयारी है.

ईरान संकट पर भारत की ‘हाई-पावर’ कमेटी: अमित शाह की अगुवाई में 3 दिग्गजों ने संभाली कमान!

ईरान संकट के चलते उत्पन्न वैश्विक परिस्थितियों पर भारत सरकार पूरी तरह मुस्तैद है. सरकार के तीन वरिष्ठ मंत्रियों का एक उच्चस्तरीय समूह स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रहा है. इस शक्तिशाली समिति की अध्यक्षता गृह मंत्री अमित शाह कर रहे हैं, जिसमें विदेश मंत्री एस. जयशंकर और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी सदस्य के रूप में शामिल हैं. यह मंत्री समूह अब तक कई दौर की महत्वपूर्ण बैठकें कर चुका है, जिसका मुख्य उद्देश्य देश की ऊर्जा सुरक्षा और कूटनीतिक हितों की रक्षा करना है. यह समूह भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए अन्य संबंधित मंत्रालयों, विभागों और राज्य सरकारों के साथ निरंतर समन्वय स्थापित करेगा. सरकार की इस सक्रियता का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता का असर भारत की घरेलू आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर न पड़े.

‘पहले 27 देशों से पेट्रोल-डीजल आता था अब 40’, हरदीप सिंह पूरी ने बताया पिछली सरकार की तुलना में अब क्‍या है अंतर?

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने लोकसभा में देश की ऊर्जा सुरक्षा पर महत्वपूर्ण बयान देते हुए कहा कि सरकार ने रणनीतिक कदम उठाते हुए तेल आयात के स्रोतों को 27 से बढ़ाकर 40 देशों तक पहुचा दिया है, जिससे पेट्रोल, डीजल, केरोसिन और एटीएफ की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित हुई है. पुरी ने रेखांकित किया कि इतिहास में पहली बार ‘स्ट्रेट’ (समुद्री मार्ग) बंद होने जैसी चुनौतीपूर्ण स्थितियों का सामना करना पड़ रहा है, जिसे भारत सफलतापूर्वक नेविगेट कर रहा है. जहां पड़ोसी देशों में ईंधन संकट के कारण स्कूल तक बंद करने पड़े, वहीं भारत ने प्राथमिकता के आधार पर नेचुरल गैस की सप्लाई को बेहतर ढंग से मैनेज किया है. सरकार के इन दूरदर्शी फैसलों ने वैश्विक संकट के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था और आम जनता को बड़ी राहत दी है.

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