_भाजपा प्रदेश प्रवक्ता नरेंद्र सलूजा का हार्ट अटैक से असामयिक निधन, स्तब्ध प्रदेश_
_कमलनाथ, शिवराज, मुख्यमंत्री डॉ यादव सहित अनेक नेताओ ने प्रकट की गहरी संवेदनाए_
_तीन साल में भाजपा के तीन प्रवक्ताओं का अकस्मात देहावसान_
_उमेश शर्मा, गोविंद मालू के बाद सलूजा के निधन से ग़मगीन भाजपा_
_सीहोर से शादी से लौटकर बिगड़ी तबीयत, अमेरिका से बेटी के आने के बाद होगा अंतिम संस्कार_
*_26 नवंबर 2022 की तारीख़ याद आ गई। कमलनाथ जी के नेतृत्व में समूची कांग्रेस मध्यप्रदेश की सत्ता में आने की आतुर थी। प्रदेश का राजनीतिक माहौल और कांग्रेस की तैयारियां इस आतुरता को सही भी साबित कर रही थी। दूसरी तरफ़ राहुल गांधी की भारत जोड़ों यात्रा मध्यप्रदेश की तरफ़ बढ़ रही थी। कांग्रेस जबरदस्त रूप से तत्कालीन शिवराज सरकार पर हमलावर थी। नीत नए हमलों की कमान एक तरह से नरेंद्र सलूजा के हाथों में थी। वे दिन निकलते ही ऐसा कुछ कर जाते कि भाजपा का शेष दिन उस पर प्रतिक्रिया में ही बीत जाता। ऐसे समय जब भारत जोड़ो यात्रा ने प्रदेश की धरती पर प्रवेश किया तो तब के चतुर सुजान सीएम शिवराज सिंह ने कांग्रेस के हमले की धार ही मोड़ दी। वे सलुजा को भाजपा में ले आये। तब इसी ख़ुलासा फर्स्ट ने लिखा था- कांग्रेस ने खो दिया असरदार ‘सरदार’। क्या पता था कि महज़ ढाई साल में दोनों दलों को मिलकर एक असरदार ‘ सरदार ‘ को खोना पड़ेगा। अफ़सोस अब ये ‘सरदार’ धरा पर नज़र नही आएगा ऒर सिर्फ़ गगन से ही मुस्कुराता चेहरा नज़र आएगा।_*
_है ईश्वर ये क्या हो रहा? ये कैसा न्याय प्रभु आपका? क्यो ऐसे दिन देखने पड़ रहें हैं प्रभु? ऐसा क्या गुनाह हुआ हैं हम सबसे? पहले वाणी पुत्र उमेश शर्मा, फ़िर गोविंद मालू औऱ अब नरेंद्र सलूजा का अवसान। तीन साल से भी कम समय में तीन तीन वाणी पुत्रो के जीवन की डोर प्रभु आपने आसमान में बैठकर संभाल जरूर ली लेक़िन धरती पर तो आपने सन्नाटा बिखेर दिया। तीनों सरस्वती पुत्र, शब्द ब्रह्म की साधना में ही तो निमग्न थे। किसी को इल्म ही नही कि शब्द साधना करते करते अक्षर विराम पा जाएंगे। लिखते लिखतें, बोलते बोलते एकाएक नरेंद्र सलूजा की मुखर आवाज़ भी वैसे ही थम गई, जैसे दो उनके समकक्ष साथियों की थम गई थी। सलूजा के निधन की ख़बर ने तो अहिल्या नगरी इंदौर ही नही, समूचे प्रदेश को स्तब्ध कर दिया। जिसने सुना, सन्नाटे में खींचा गया। ‘वीरजी’ की मृत्यु की ख़बर ने कानों को सुन्न और ह्रदय को हिलाकर रख दिया। नरेंद्र सलूजा के रूप में एक असरदार ‘ सरदार ‘ ख़ामोश हो गया। पीछे छोड़ गया ये ‘ सरदार ‘ अपनी मनमोहक मुस्कान व मिलनसार व्यवहार।_
_दोपहर 3 बजे तक सोशल मीडिया पर सब कुछ सामान्य था। युद्ध की बाते, भगवान परशुराम की जयंती और मन्त्री महोदय का जन्मदिन ही स्क्रीन पर मंडरा रहा था। महज एक घण्टे, यानी 4 बजते बजते तो जैसे सब कुछ पलभर में बदल गया। अखबारनवीसों की तरफ से ख़बर आई, वह भी डरते डरते कि सलूजा जी को लेकर अच्छी ख़बर नही हैं। फ़िर किसी ने हिम्मत जुटाकर वह संदेश जारी किया, जिसने सबकों जड़वत कर दिया। जिसने सुना, अवाक रह गया। मुंह खुला का खुला रह गया और आंखे भीग गई। आंखों के सामने गर्मजोशी से भरा वह मुस्कुराता चेहरा बरबस आ गया जिसकी पहचान इंदौर के नरेंद्र सलूजा के रूप में थी। वे कहने को भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता जरूर थे लेक़िन उनका नाता सभी दल, नेताओ से स्नेह बंधन का था। तभी तो कमलनाथजी से लेकर शिवराज जी व मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव तक स्वयम को ग़मज़दा होने से रोक नही पाए। पूर्व मुख्यमंत्री व वर्तमान में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने उन्हें अपना परम मित्र बताया तो सीएम डॉ यादव ने उन्हें सच्चा साथी करार दिया। ख़ुलासा फर्स्ट परिवार भाई नरेंद्र सलूजा जी के निधन पर नम आंखों से अश्रुपूरित श्रद्धासुमन समर्पित करता हैं।_
काश, समय पर अस्पताल चले जाते*
_सलूजा की तबियत एकाएक बिगड़ी। वे सीहोर शादी में गए थे। वहां उन्हें कुछ असहज सा लगा। साथ के मित्रों ने उन्हें अस्पताल चलने की सलाह दी लेक़िन वे बोले कुछ नही, हो जाएगा सब ठीक। एसिडिटी मानकर उन्हें एक टेबलेट ले ली और ब्याह सम्पन्न करवाया। बुधवार वे इंदौर लौटे। जीवन संगिनी को तबियत का बताया तो उन्होंने कहा भी कि पहले अस्पताल चलते है लेक़िन जीवटता के धनी नरेंद्र सलूजा ने इंकार कर दिया। भोजन पर वे बैठे कि उन्हें उल्टी हुई। अचेत हुए। अस्पताल जब तक लेकर पहुचें तो पता चला कि वे अब हम सबके बीच नही रहे। जिसने सुना, सन्न रह गया। पूरी भाजपा सदमे में चली गईं। पार्टी नेता दौड़े अस्पताल लेक़िन सिवाय पार्थिव देह को मरचुरी में रखवाने के वे कुछ भी नही कर पाए। सलूजा की राजनीति का एक लंबा वक्त कांग्रेस में बीता था। लिहाज़ा वे जाते जाते भी दलगत राजनीति की सीमाओं को लांघकर गए। आज कांग्रेस, भाजपा, दोनों मिलकर ग़मगीन हैं।_

