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विद्युत कम्पनी के निजीकरण को लेकर अधिकारी/कर्मचारी संयुक्त मोर्चा का प्रभावी धरना प्रदर्शन

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इन्दौर *मध्यप्रदेश विद्युत निजीकरण विरोधी संयुक्त मोर्चा द्वारा बिजली के निजीकरण के विरोध में मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के मुख्य गेट के सामने मंगलवार को विद्युत कर्मचारियों के संयुक्त मोर्चा के तत्वावधान में धरना प्रदर्शन किया गया, जहां सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की गई। विद्युत अधिकार व कर्मचारी संगठनों के द्वारा किए गए आंदोलन में मोर्चा के कर्मचारी नेताओं द्वारा कहा गया कि यदि केन्द्र व प्रदेश की भाजपा सरकार निजी करण नहीं रोकती है और उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देगी तो आने वाले समय में उनका मोर्चा बड़ा आंदोलन करेगा, जहां कामकाज बंद कर दिया जाएगा, जिससे प्रदेश में अंधेरा भी हो सकता है। निजीकरण के विरोध में ऊर्जा परिसर के सामने संगठन के लोगों ने जमकर नारेबाजी भी की जहां हाथ में धरना के पर्चे लेकर जमकर भाजपा सरकार को आड़े हाथ लिया।

*मध्य प्रदेश विद्युत अधिकारी कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के जीके वैष्णव एवं मुकेश मेहना ने बताया कि मध्यप्रदेश विद्युत अधिकारी कर्मचारी संयुक्त मोर्चा विद्युत कंपनियों के 17 प्रमुख संगठनों का महागठबंधन है, जो केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित विद्युत अधिनियम 2021 जोकि विद्युत कंपनियों के निजीकरण को बढ़ावा देगा, उसका लगातार विरोध करता आ रहा है साथ ही विद्युत कंपनियों में कार्यरत नियमित संविदा आउटसोर्स कर्मियों के प्रमुख मांगों को लेकर निराकरण हेतु शासन प्रशासन से लगातार पत्राचार कर शांतिपूर्वक निराकरण हेतु प्रयासरत है, परंतु खेद का विषय है कि केंद्र सरकार के आश्वासन के बाद भी मानसून सत्र में पपविद्युत सुधार अधिनियम 2021 लाना जन भावनाओं के विरुद्ध है एवं संपूर्ण प्रदेश में विद्युत कर्मी आक्रोशित हैं, विद्युत कंपनियों के निजीकरण के विरोध में संयुक्त मोर्चा लगातार जिला एवं प्रदेश स्तर पर आंदोलित होकर मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री के साथ ही ऊर्जा मंत्री को भी पत्राचार के माध्यम से अपनी मांगों से अवगत करा चुका है, बावजूद इसके मुख्यमंत्री एवं ऊर्जा मंत्री कुंभकरण की नींद में सोए हुए हैं। श्री वैष्णव एवं मेहना तथा संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष शम्भू सिंह ने बताया कि विद्युत कर्मचारी संयुक्त मोर्चा विद्युत कंपनियों के निजीकरण के विरोध में लगातार आंदोलित है हमारी प्रमुख मांगे. *विद्युत कंपनियों का निजीकरण नहीं किया जाए, एकतरफा विद्युत सुधार अधिनियम 2021 संसद में पारित नहीं किया जाए, संविदा कर्मियों का नियमितीकरण किया जाए, आउट सोर्स कंपनियों का विद्युत कंपनियों में संविलियन किया जाए 45 वर्ष से अधिक कम शैक्षणिक योग्यता का हवाला देकर आउटसोर्स कर्मचारियों को नौकरी से नहीं निकाला जाए, बिजली कर्मियों को कोरोना योद्धा घोषित कर परिवार को ₹50 लाख की आर्थिक सहायता प्रदान की जाए तथा आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति की जाए, बिजली कर्मियों को केंद्र के समान महंगाई भत्ता दिया जाए। विगत वर्षों से रोकी गई वेतनवृद्ध तत्काल प्रदान की जाए, विद्युत कर्मियों की लंबित वेतन विसंगतियां दूर किया जाए।* इन्हीं मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन के पश्चात मुख्यमंत्री एवं ऊर्जा मंत्री के नाम विद्युत मंडल के प्रबंधक को ज्ञापन सौंपा गया।

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