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अजमेर में शांति और सद्भावना से निकला ईद मिलादुन्नबी का जुलूस

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एस पी मित्तल,अजमेर

अजमेर में पिछले दिनों जिन ख्वाजा साहब की दरगाह के बाहर सर तन से जुदा के नारे लगे उन्हें ख्वाजा साहब  की दरगाह के सामने से 9 अक्टूबर को ईद मिलादुन्नबी का जुलूस शांति और सद्भावना के साथ निकला। इस जुलूस का आयोजन प्रतिवर्ष सूफी इंटरनेशनल के द्वारा किया जाता है। जुलूस ढाई दिन के झौंपड़े से शुरू होकर ऋषि गांधी स्थित कुतुब साहब के चिल्ले पर पहुंचा। जुलूस जब ख्वाजा साहब की दरगाह के सामने से गुजरा तो खादिमों की दोनों संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने जुलूस का इस्तकबाल किया। इसी प्रकार दरगाह बाजार के दुकानदारों ने भी जुलूस का स्वागत किया। जुलूस में हिन्दू समुदाय के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। खादिमों की संस्था अंजुमन सैय्यद जादगान के अध्यक्ष गुलाम किबरिया, सचिव सरवर चिश्ती, शहर काजी तौफीक अहमद सिद्दीकी, सूफी इंटरनेशनल के अध्यक्ष सरवर सिद्दीकी, सचिव नवाब हिदायतुल्ला आदि ने कहा कि ख्वाजा साहब की दरगाह से दुनिया भर में शांति और मोहब्बत का संदेश दिया जाता है। यही वजह है कि ख्वाजा साहब की दरगाह को कौमी एकता के रूप में देखा जाता है। भारत में हिन्दू-मुस्लिम भाईचारा बना रहे इसकी सख्त जरूरत है। जुलूस के आयोजकों की हिदायत पर जुलूस में डीजे का उपयोग नहीं हुआ। अनेक लोग डीजे को इस्लाम विरोधी मानते हैं। सचिव हिदायतुल्ला ने बताया कि जुलूस के समापन पर शाकाहारी पुलाव का वितरण किया गया। इसके लिए खादिमों की दोनों अंजुमनों और अन्य संस्थाओं ने पुलाव तैयार करवाया। यह पहला अवसर रहा जब ईद मिलादुन्नबी के जुलूस में अन्य धर्मों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। इसका उद्देश्य यही रहा कि अजमेर से पूरे देश में सद्भावना का संदेश जाना चाहिए। जुलूस में बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भाग लिया। दरगाह के बाहर दस्तारबंदी भी की गई। जुलूस की व्यवस्था को संभालने के लिए पांच सौ से भी ज्यादा स्वयंसेवक मौजूद रहे। पुलिस ने भी ड्रोन के जरिए जुलूस की निगरानी का काम किया। जुलूस शांतिपूर्ण निकलने पर जिला प्रशासन ने भी राहत की सांस ली। जुलूस के दौरान मिलाद पार्टियां ने भी अपने हुनर का प्रदर्शन किया। जुलूस में ऊंट, घोड़े ढोल नगाड़े भी शामिल रहे। 

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