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निकाय चुनाव में भी भाजपा के पुराने दिग्गजों के दूर होंगे मुगालते

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भोपाल।  अपनी टीम देरी से गठित कर पाने की वजह से अब भाजपा प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा उसे पूरी सक्रियता के साथ मैदान में उतारने की तैयारी कर रहे हैं। इस नई टीम को तीन माह बाद प्रदेश में होने वाले नगरीय निकाय चुनाव में अपने राजनैतिक कौशल की परीक्षा देना है। इसमें पार्टी को पूर्व की ही तरह सफलता दिलाने के लिए टीम को लक्ष्य देने का फैसला कर लिया गया है, सिर्फ इसकी घोषणा की जानी है। उधर संगठन ने इन चुनावों में अधिकांश जगहों पर नए चेहरों को उतारने का भी तय कर लिया है। इस वजह से सांसदों, विधायकों और हरल्ले नेताओं को भी अब मौका नहीं मिल सकेगा। यही नहीं टिकट तय करने से पहले प्रदेश संगठन द्वारा स्थानीय पदाधिकारियों से भी राय मशविरा किया जाएगा। शर्मा की नई टीम को अब लंबे समय तक पूरी तरह से सक्रिय रहना होगा। इसकी शुरूआत इसी हफ्ते में आयोजित किए जा रहे दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर से होने जा रही है।
प्रशिक्षण के समय उन्हें संगठन के कामकाज की दिशा बताने के साथ ही लक्ष्य भी दे दिया जाएगा। वीडी की नई टीम की नगरीय निकाय चुनाव पहली बड़ी परीक्षा है। शर्मा द्वारा अपनी टीम के साथ ही मोर्चा अध्यक्षों की भी घोषणा की जा चुकी है। इन सभी के लिए भोपाल में आयोजित किए जा रहे प्रशिक्षण के दौरान ही सभी महामंत्रियों के बीच कामकाज का बंटवारा भी किया जाना है। इन्हें संभाग स्तर पर कामकाज का जिम्मा दिया जाना है। इसके साथ ही प्रत्येक जिलों की जिम्मेदारी के साथ ही नगरीय निकायों में पार्टी की जीत का लक्ष्य भी दिया जाएगा।

निकाय चुनावों के माध्यम से नए चेहरों को आगे लाने और पार्टी के लिए दूसरी लाइन तैयार करने की शुरूआत भी प्रदेश में निकाय चुनाव से की जाने की तैयारी है। यही वजह है कि अब संगठन अपने विधायक, पूर्व सांसद और पूर्व विधायकों के साथ ही अब हारने वाले नेताओं को टिकट न देने का तय कर चुकी है। इन की जगह पर अब उन कार्यकर्ताओं को टिकट देने की तैयारी है, जो पार्टी में लंबे समय से अच्छा काम कर रहे हैं। इसकी भी अधिकृत घोषणा प्रदेश पदाधिकारियों और जिलाध्यक्षों की बैठक में किया जाएगा। दरअसल बीते एक दशक से प्रदेश में सत्ता व संगठन एक व्यक्ति एक पद के सिद्धान्त को पूरी तरह से भूल चुकी है। इसकी वजह से ही पार्टी नगर निगमों में विधायकों, पूर्व सांसदों और पूर्व विधायकों को टिकट देती रही है। इससे कई दावेदारों का हक मारा जाता रहा है। यही वजह है कि अब पार्टी नए चेहरों पर दांव लगाने जा रही है, जिससे सभी को मौका मिल सके। संगठन पुराना परिणाम दोहराने के लिए अभी से मेयर के टिकट के लिए सर्वे का काम शुरू कर चुकी है। इसके अलावा नगरपालिकाओं और नगर परिषदों के अध्यक्ष प्रत्याशियों के लिए भी संगठन मंत्रियों से तीन से पांच नाम भेजने को कहा गया है। यह नाम भी संभागीय संगठन मंत्री जिलों के दौरों के साथ ही स्थानीय जिलाध्यक्ष और मंडल अध्यक्षों से चर्चा कर भेजेंगे।

जल्द गठित होंगीं अंत्योदय समितियां
निकाय चुनाव से पहले प्रदेश में अंत्योदय समितियों का गठन भी कर दिया जाएगा। यह समितियां ग्राम पंचायत से लेकर जिला पंचायत और नगर परिषद से लेकर नगर निगमों तक में बनाई जानी है। इसके माध्यम से सत्ता में कार्यकर्ताओं की भागीदारी बढ़ाना है। ग्राम पंचायत में पांच जनपद, नगर परिषद में सात और नगर निगमों और जिला पंचायतों में ग्यारह-ग्यारह सदस्यों की नियुक्ति की जाना है। इसके लिए संगठन द्वारा जिलों से नाम मंगाए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि यह समितियां विस सत्र से पहले गठित कर दी जाएंगी ।क्रियता पर पूरा जोर
संगठन अब पूरा जोर पार्टी की सक्रियता पर लगाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए अपनी टीम को लगातार निचले स्तर तक दौरे करने का कहा जाएगा। इसके अलावा पार्टी कार्यक्रमों से भी पदाधिकारियों को जोड़ने की तैयारी है। पूरे साल चलने वाले पार्टी के सभी प्रमुख कार्यक्रमों को सफल बनाने में भी इन पदाधिकारियों की भूमिका होगी। इसमें अधिक से अधिक लोगों को पार्टी से जोड़ने का मुख्य लक्ष्य होगा। इसके अलावा कार्यक्रमों की मॉनीटरिंग भी इनके जिम्मे रहेगी।

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