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पारिवारिक विवादों का समाजिक जाजम पर निदान, अनुकरणीय अभियान

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अभी तक 25 पारिवारिक विवादों का निराकरण करा चुकी, कोली/कोरी समाज की महापंचायत*

*इन्दौर (प्रकाश महावर कोली)।**समाज के पारिवारिक विवादों का निपटान समाज में ही करना तथा सदस्यों को थाने व कोर्ट कचहरी के चक्कर से बचाना एवं समाज मे शांति, प्रेम व भाईचारा स्थापित करना तथा समाज को संगठित करना है। इसी उद्देश्य को लेकर कोली/कोरी समाज के मुख्य संगठन कोरी धीमान समाज समाज 11 पंच कमेटी समाज हित में विगत कई वर्षों से प्रयासरत होकर पारिवारिक विवादों में सुलह कराने का अनुकरणीय अभियान चला रही है।

*इसी प्रयास की कड़ी में कमेटी से जुड़े विभिन्न घटकों की महापंचायत की अतिआवश्यक बैठकसमाज की धर्मशाला 33 मित्र नगर बड़ी ग्वालटोली पर पति-पत्नी विवाद निपटारे हेतु पंचायत का आयोजन रखा गया, महापंचायत के संरक्षक एवं पूर्व पार्षद श्री घनश्याम शेर व समाज के वरिष्ठ पत्रकार श्री प्रकाश महावर कोली की उपस्थिति में पंचायत प्रारंभ की गई, उपस्थित पंचों द्वारा दोनों पक्षों के विवादों को सुना गया। पत्नी पक्ष ने कहा कि मेरी उम्र 55 साल हो गई है, मैंने पति का हर समय साथ दिया। मेरे पति 2 साल पूर्व रिटायर हो गए हैं। मेरे बेटा व बेटी भी है, बेटे की शादी कर दी गई है। बहु साथ में रहती है वह झगड़ा करती है बेटी इंदौर में रहती है उसकी शादी नहीं हुई है। रिटायर होने पर मैंने अपने पति से पूछा कि मेरे नाम से क्या-क्या है, कितना रुपया मिला है! वह मुझे कुछ नहीं बताते और गुस्सा करते हैं! मैं कहती हूं की बहू को अलग कर दो वह कुछ नहीं बोलते हैं। मैं परेशान हो गई हूं। भोपाल से आकर इंदौर में बेटी के पास रह रही हूं। मैंने महापंचायत में आवेदन दिया है। प्रमुख पंच मेरे पति को समझाएं पंचों ने पति से जवाब सवाल किए कहा कि इस उम्र में आपस में विवाद करना अच्छा नहीं, आप एक सम्मानित व्यक्ति है, पत्नी के सवालों का संतुष्टि पूर्वक जवाब दें, उन्होंने पंचगण की समझाइश को  माना और कहा कि मैं भी विवाद नहीं चाहता हूं , मेरे बाद सब मेरी पत्नी का ही तो है।पंचों ने  कहा कि खुल कर बताएं उनका भ्रम दूर करें, उनके नाम से क्या क्या है, और उन्हें कितना खर्चा देंगे, उन्होंने पंचों की समझाए व सलाह से सहमत होकर बताया कि 15 लाख की एफडी हम दोनों के नाम की है। जो 2 वर्ष बात पूर्ण होना है।

मेरे बाद मेरे मकान में पत्नी का अधिकार है, रही खर्चे की बात मैं अभी तक 5000 देता था घर चलाने वास्ते, इनको हाथ कर्ज नहीं बचता है, तो अब मैं ₹3000 रुपए प्रतिमाह अलग से दूंगा, तथा बहू-सास आपस में ना लड़े, उसके लिए मकान के ऊपर मकान बनाकर दूंगा, ताकि आपस में झगड़ा ना हो हम दोनों अब आपस में मिलजुल कर रहेंगे। लड़की की भी शादी करेंगे और बेटा बहू को भी समझा कर एक ही मकान में संगठित रहेंगे, दोनों पक्षों ने पंचों की समझाइश व सुझाव को माना इस पर सभी पंचों ने  महापंचायत की ओर से  परिवार संगठित रहकर खुशहाल रहे यह  शुभकामनाएँ दी।पंचायत में कोरोना महामारी के नियमों का पालन करते हुए महापंचायत के 11 समूह के प्रमुख पंचगण तथा समाज के नवयुवक मंडल के प्रतिनिधि उपस्थित हुए। सभी पंचों का आभार महापंचायत के अध्यक्ष दिनेश वर्मा ने माना!

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