मध्य प्रदेश के दमोह स्थित मिशन अस्पताल में सात मरीजों की मौत के मामले में आरोपी फर्जी हृदय रोग विशेषज्ञ नरेंद्र यादव उर्फ नरेंद्र जॉन केम को जिला अदालत में पेश किया गया। दमोह पुलिस ने आरोपी डॉक्टर की रिमांड पूरी होने के बाद गुरुवार न्यायालय में पेश किया। इस दौरान छत्तीसगढ़ पुलिस ने बिलासपुर के एक पुराने केस में रिमांड की मांग की, जिसे मंजूर कर आरोपी को चार दिन की रिमांड पर सौंप दिया गया है।
हार्ट सर्जरी के बाद मरीजों की मौत का मामला
दरअसल, दमोह के मिशन अस्पताल में हुई हार्ट सर्जरी के बाद सात मरीजों की मौत ने प्रदेशभर को झकझोर कर रख दिया है। इन मौतों का जिम्मेदार बताया गया फर्जी कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर नरेंद्र जॉन केम अब कई राज्यों की पुलिस के रडार पर है। दमोह पुलिस ने आरोपी डॉक्टर नरेंद्र की जेल रिमांड खत्म होने के बाद गुरुवार दोपहर 4 बजे कोर्ट में पेश किया। जहां सुनवाई में आरोपी को छत्तीसगढ़ पुलिस को सौंप दिया गया है।को
र्ट ने डॉक्टर नरेंद्र को छत्तीसगढ़ पुलिस को सौंपा
दरअसल, छत्तीसगढ़ के बिलासपुर के हास्पिटल में भी मौतों के मामले में डॉक्टर नरेंद्र जॉन केन आरोपी है, इस मामले में डॉक्टर के खिलाफ केस दर्ज दर्ज है। इस केस में छत्तीसगढ़ के बिलासपुर के सरकंडा थाने की पुलिस भी कोर्ट पहुंची। पुलिस ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट स्नेहा सिंह की कोर्ट में रिमांड के लिए आवेदन दिया था। जिसके बाद मामले में सुनवाई हुई और आरोपी को बिलासपुर पुलिस को सौंप दिया गया। इस दौरान अदालत की अनुमति पर वकील की फीस व कपड़े खरीदने डॉक्टर ने चैक दिया।
आरोपी ने लीगल एडवाइजर को दिया चेक
कोर्ट में सुनवाई के दौरान आरोपी डॉक्टर ने अपने अधिवक्ता सचिन नायक की फीस और अन्य जरूरी खर्चों के लिए लीगल एडवाइजर मनीष नगाइच को एक लाख रुपए का चेक सौंपा। इस पर सीजीएम स्नेहा सिंह ने डॉक्टर से सवाल किया कि वह मनीष नगाइच को जानते भी हैं या नहीं। डॉक्टर का जवाब था कि उन्हें कई भुगतानों की जरूरत है और उन्हें अधिवक्ता पर भरोसा है।
इलाज के दौरान हुई थी पूर्व विधानसभा अध्यक्ष की मौत
पुलिस के अनुसार इस केस से जुड़ा दूसरा मामला छत्तीसगढ़ के सरकंडा थाना क्षेत्र से है, जहां पूर्व विधानसभा अध्यक्ष राजेंद्र शुक्ला की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। वहां भी डॉक्टर एन. जॉन केम के खिलाफ एफआईआर दर्ज है। छत्तीसगढ़ पुलिस ने रिमांड पर लेने की कोर्ट से अनुमति मांगी, जिसे मंजूर कर लिया गया।
छत्तीसगढ़ की कोर्ट से तय होगी आरोपी की रिमांड
आरोपी डॉक्टर की डिमांड पर मामले की पैरवी अधिवक्ता मनीष नगाइच ने की। कोर्ट ने डॉक्टर का मेडिकल परीक्षण कराने के बाद उन्हें चार दिन की रिमांड पर छत्तीसगढ़ पुलिस को सौंप दिया। कोर्ट यह भी तय करेगा कि अगली सुनवाई में रिमांड बढ़ाई जाएगी या आरोपी को फिर से दमोह जेल भेजा जाएगा। कोर्ट में पेशी के दौरान आरोपी डॉक्टर ने कहा कि वह पूरी तरह से न्यायिक प्रक्रिया का पालन करूंगा और जांच में सहयोग दिया जाएगा, छत्तीसगढ़ पुलिस ने इस मामले में सार्वजनिक रूप से कुछ भी कहने से परहेज किया है।
फर्जी डॉक्टर ने कर डाले 15 हार्ट ऑपरेशन: दमोह में 7 की मौत
मध्यप्रदेश के दमोह के मिशन अस्पताल में लंदन के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. एनजोन केम के नाम पर फर्जी डॉक्टर ने ढाई महीने में 15 हार्ट ऑपरेशन कर दिए। आरोप है कि दिसंबर 2024 से फरवरी 2025 के बीच हुए इन ऑपरेशनों में 7 मरीजों की मौत हो गई। हालांकि, दमोह के CMHO डॉ. मुकेश जैन और DHO डॉ. विक्रम चौहान की जांच में दो मौतों की पुष्टि की गई है।
मामले का खुलासा होने के बाद आरोपी डॉ. नरेंद्र यादव फरार हो गया है। राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने घटना को गंभीरता से लिया है। आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो बोले- आयोग की दो सदस्यीय टीम रविवार को दमोह आएगी। इसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।’
कलेक्टर बोले जांच हो रही है
कलेक्टर सुधीर कोचर ने कहा कि इस मामले की जांच जारी है। वहीं, अस्पताल प्रबंधक पुष्पा खरे का कहना है कि गलत जानकारी दी जा रही है। जब मौत की वजह जानने के लिए डॉक्टर से संपर्क किया गया, तो वह वहां से भाग गए।
ब्लॉकेज बताकर ऑपरेशन किया और मौत
दमोह की रहने वाली रहीसा बेगम को 12 जनवरी को सीने में दर्द हुआ। उनके बेटे नबी ने बताया कि मां को पहले जिला अस्पताल और फिर मिशन अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां इलाज के नाम पर 50 हजार रुपए लिए गए। रिपोर्ट में दो नसों में 90 प्रतिशत ब्लॉकेज का जिक्र किया गया। 15 जनवरी को उनका ऑपरेशन हुआ, लेकिन कुछ ही घंटों बाद उनकी मौत हो गई।
… तो डॉक्टर गाड़ी लेकर भाग गया
नबी ने कहा, ‘डॉ. यादव इलाज के नाम पर सिर्फ दवाएं मंगवाते रहे। ऑपरेशन के दिन मरीजों की लाइन लगी थी, जैसे कोई ट्रेनिंग चल रही हो। जब मौत के बाद फाइल मांगी, तो अस्पताल ने देने से मना कर दिया। जब हमने मौत की वजह जानने की कोशिश की, तो डॉक्टर गाड़ी लेकर भाग गए।’
गैस की समस्या थी, हार्ट का ऑपरेशन कर दिया गया, मौत
पटेरा ब्लॉक के मंगल सिंह को 4 फरवरी 2025 को गैस की दिक्कत हुई। उनके बेटे जितेंद्र सिंह ने उन्हें मिशन अस्पताल ले जाया। एंजियोग्राफी की गई और रिपोर्ट में कहा गया कि हार्ट का ऑपरेशन करना पड़ेगा। ऑपरेशन के कुछ घंटों बाद ही उनकी मौत हो गई।
वक्त पर डिस्चार्ज करवा लिया, जान बच गई
31 जनवरी को जब आशाराम की तबीयत खराब हुई, तो उन्हें मिशन हॉस्पिटल लाया गया। जांच में हार्ट अटैक का पता चला। 50 हजार रुपए जमा किए गए, लेकिन परिजनों को एंजियोग्राफी की रिपोर्ट और वीडियो नहीं दिखाए गए। शक होने पर उन्होंने तुरंत डिस्चार्ज करवा कर जबलपुर मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया। वहां बिना किसी ऑपरेशन के ही इलाज से उनकी हालत में सुधार हुआ।
…सोचकर डर लगता है
परिजन कृष्ण ने कहा, ‘मिशन अस्पताल में आयुष्मान कार्ड के नाम पर कई दवाएं लिखी गईं और बिल बना दिए गए। इलाज से ज्यादा ध्यान पैसे कमाने पर था। अगर समय पर बाहर नहीं ले जाते, तो क्या होता, ये सोचकर डर लगता है।’

