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 मशहूर डॉ. अजमेर निवासी केएस यादव चले गए और किसी को पता भी नहीं चला

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एस पी मित्तल, अजमेर

मनुष्य के जीवन में कैसे कैसे दिन आएंगे यह ईश्वर ही जानता है। 6 मार्च को राजस्थान के मशहूर अजमेर निवासी डॉ. केएस यादव का 85 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। परिवार के 20-25 लोगों ने एकत्रित होकर डॉ. यादव का पुष्कर रोड स्थित श्मशान स्थल पर अंतिम संस्कार कर दिया। डॉ. यादव के निधन को लेकर प्रमुख दैनिक समाचार पत्रों में दो लाइन की खबर भी प्रकाशित नहीं हुई। एक समय था, जब यही अखबार वाले कचहरी रोड स्थित प्रताप मेमोरियल अस्पताल के विज्ञापन लेने के लिए डॉ. यादव के सामने गिड़गिड़ाते थे। अजमेर ही नहीं बल्कि राजस्थान में ऐसे हजारों मरीज होंगे, जो आज भी डॉ. यादव के कारण जिंदा हैं। इसे डॉ. यादव पर ईश्वर की कृपा ही माना जाएगा कि वे अपने अनुभव से अंतिम सांस लेने वाले मरीज में भी वर्षों तक की जान डाल देते थे। आज डॉ. यादव भले ही गुमनामी की जिंदगी जीते हुए चले गए हों, लेकिन एक समय था, तब डॉ. केएस यादव के नाम की तूती पूरे राजस्थान में बोलती थी। अच्छे इलाज के लिए लोग जयपुर, जोधपुर, उदयपुर आदि बड़े शहरों से अजमेर आते थे। डॉ. यादव को दिखाने के लिए एक सप्ताह पहले समय निर्धारित करना होता था। डॉ. यादव के कचहरी रोड स्थित प्रताप मेमोरियल अस्पताल में ऐसी आधुनिक मशीनें थी, जो बड़े शहरों के चिकित्सकों के पास भी नहीं थी। डॉ. यादव ने अपनी काबिलियत से प्रताप मेमोरियल अस्पताल को पूरे प्रदेश में मशहूर कर दिया था। डॉ. यादव जेएलएन अस्पताल की सरकारी नौकरी छोड़कर अपने अस्पताल की शुरुआत की थी। लेकिन इसे दुर्भाग्यपूर्ण ही कहा जाएगा कि अजमेर में चिकित्सा का जो साम्राज्य डॉ. यादव ने खड़ा किया, वह सब खंडहर हो गया है। डॉ. यादव की पत्नी श्रीमती सुशीला यादव भी स्त्री रोग विशेषज्ञ की प्रसिद्ध चिकित्सक रही हैं, लेकिन वे भी अब गुमनामी का जीवन जी रही हैं। जिन डॉ. यादव दम्पत्ति का अजमेर के सबसे व्यस्त कचहरी रोड पर आलीशान अस्पताल और आवास था, उस दम्पत्ति को फायसागर रोड स्थित गौरा गरीबा कब्रिस्तान से स्टे छोटे से मकान में रहने को मजबूर होना पड़ा। एक बेटे के निधन के बाद परिवार में पारिवारिक विवाद भी उत्पन्न हो गया, जिसकी वजह से करोड़ों रुपए की संपत्तियां विवादों में उलझ गई। डॉ. यादव के पारिवारिक मित्र एडवोकेट एसके सक्सेना को इस बात का अफसोस है कि डॉ. यादव के जिंदा रहते सम्पत्तियां का विवाद नहीं निपटा। एडवोकेट सक्सेना का कहना है कि डॉ. यादव एक जिंदादिल इंसान थे, लेकिन परिवार के हालातों की वजह से डॉ. यादव लाचार और बेबस देखे गए। लेकिन अजमेर के चिकित्सा के क्षेत्र में डॉ. यादव का नाम लंबे समय तक याद रखा जाएगा।

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