*मंडी सचिव द्वारा कर्मचारियों और कुछ व्यापारियों पर दबाव बनाकर गलत बयान दिलाये जा रहे हैं*
*मंडी सचिव का इंदौर से जाना तय, कर्मचारी व्यापारी और हम्माल बगैर दबाव में मंडी की व्यवस्था सुधारने की किसान संगठनों की लड़ाई में सहयोगी बने*
इंदौर। इंदौर की तीनों मंडियों की व्यवस्था सुधारे जाने की मांग को लेकर आंदोलन रत किसान संगठनों ने आज निर्णय लिया है कि मंडी सचिव कि गलत बयानी और मंडी में कार्यरत अन्य लोगों पर दबाव डालकर किसान नेताओं के खिलाफ बयान बाजी करवाने वालों के खिलाफ किसान संगठन मानहानि का प्रकरण दायर करेंगे। संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े किसान संगठनों का कहना है कि मंडी सचिव नरेश परमार का इंदौर से जाना तय है संभवत 27 फरवरी तक उनको इंदौर से हटाए जाने के आदेश निकल जाएंगे। अत: जो भी लोग मंडी सचिव के इशारे पर और दबाव में आकर किसान नेताओं के खिलाफ उल जलूल और तथ्य विपरीत बयान दे रहे हैं ,उन्हें इस बात को समझ लेना चाहिए की नरेश परमार के जाने के बाद उन्हें कोई बचाने नहीं आएगा।
किसान नेता रामस्वरूप मंत्री, बबलू जाधव और शैलेंद्र पटेल ने बताया कि किसान संगठनों ने चोइथराम मंडी में चाकू बाजी की घटना के बाद 12 तारीख को प्रदर्शन किया था । 12 तारीख से 20 तारीख तक मंडी सचिव नरेश परमार किसान नेताओं पर दबाव बनाने के लिए उन्हें फोन करते रहे तथा इसी बीच तीन बार भोपाल के चक्कर लगा आये । नरेश परमार अपने आप को पूर्व में निवर्तमान कृषि मंत्री कमल पटेल,और अब भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बीडी शर्मा का आदमी बताते हैं और इसी के चलते चार बार भोपाल जाकर उनके खिलाफ हो रही शिकायतों को दबाने की कोशिश करते रहे तथा सरकार से संरक्षण मांगते रहे लेकिन जब भोपाल से उन्हें संरक्षण नहीं मिला तो फिर उन्होंने मजबूरी में 20 तारीख को अपने अधीनस्थ चोइथराम मंडी प्रभारी राजू कुवाल से झूठी रिपोर्ट राजेंद्र नगर थाने में करवाई और किसान नेताओं पर एफआईआर दर्ज करवाई । यह भी किसान नेताओं पर एक दबाव बनाने का हथकंडा था, जिसे किसान नेताओं ने सिरे से खारिज कर दिया ।नेताओं ने अपने बयान में कहा है कि वह किसानों और मजदूरों की लड़ाई लड़ते हुए कई बार जेल गए हैं ।जेल से उन्हें डर नहीं लगता है लेकिन कोई भी यदि उन्हें डराने की कोशिश करेगा तो उसका परिणाम उसे भुगतना पड़ेगा।
सान संघर्ष समिति के मालवा निमाड़ संयोजक रामस्वरूप मंत्री, भारतीय किसान मजदूर सेना के बबलू जाधव एवं शैलेंद्र पटेल ने सभी मंडी कर्मचारी, व्यापारियों और हम्माल संगठनों के पदाधिकारी से अपील की है कि वह मंडी सचिव के दबाव में आए बगैर सत्यता को उजागर करें और केवल भ्रष्ट मंडी सचिव को बचाने के लिए बयान बाजी ना करें, अन्यथा उन्हें भी कोर्ट में अपने बयानों की सत्यता प्रमाणित करना पड़ेगी । कल जिन व्यापारियों ने लक्ष्मी नगर मंडी में पत्रकार वार्ता कर किसान नेताओं के खिलाफ बयान बाजी की है उनमें कुछ वे लोग शामिल हैं जिनके यहां पर किसान का उपज का ट्रेक्टर चौरी कर माल तुला था और बाद में मामला उजागर होने पर इन्हीं मंडी सचिव ने उस व्यापारी से किसान को भुगतान कराया था, लेकिन उस व्यापारी के खिलाफ मंडी सचिव ने कोई कार्रवाई नहीं की थी। यह उनके भ्रष्टाचार का जीता जागता प्रमाण है । वही लोग किसान संगठनों के खिलाफ बयान बाजी कर रहे हैं जो किसी न किसी तरह से मंडी सचिव से दबे हुए हैं और मंडियों में अवैध कामकाज करते हैं ।
किसान संगठन सब्जी मंडी और फूल मंडी में आड़त प्रथा का लगातार विरोध करते रहे हैं क्योंकि इससे किसानों का शोषण होता है और लंबी लड़ाई के बाद आड़त प्रथा बंद कराई थी लेकिन मंडी सचिव ने किसान नेताओं के खिलाफ कार्रवाई के लिए कलेक्टर को जो पत्र लिखा है उसमें साफ कहा गया है कि आढ़तियों के माध्यम से मंडी शुल्क की वसूली की प्रथा चलाई जाना चाहिए और तमाम फुटकर व्यापारियों और अन्य को मंडियों से बाहर कर दिया जाना चाहिए। सभी का प्रवेश मंडी में बंद होना चाहिए। मंडी सचिन की ऐसा साजिश को सभी को समझना चाहिए तथा किसान संगठनों मैं इंदौर की मंदिरों को बचाने का जो अभियान छेड़ा है उसमें सहयोगी बनना चाहिए। यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया और कानून के विपरीत भी है और मंडियों को बर्बाद करने की एक साजिश भी। मंडी सचिव के पत्र की लिखावट से समझ जाना चाहिए कि वह मंडियों को किस तरह से बर्बाद करना चाहते हैं।

