*भूमि अधिग्रहण की अन्याय पूर्ण नीति बंद करें सरकार अन्यथा किसान विद्रोह को होंगे मजबूर*
इंदौर।(चंदन बड़वाया)।पूर्वी आउटर रिंग रोड परियोजना के अंतर्गत देवास ज़िले के ग्राम नागौरा निवासी किसान माखनलाल पिता तुलसीराम की उपजाऊ भूमि का अधिग्रहण होनेवाला है। एनएचएआई एवं राजस्व विभाग के अधिकारी बीते कुछ दिनों से लगातार उनके खेत पर पहुंच कर किसान को धमका रहे थे। अपनी पुश्तैनी ज़मीन जाने की आशंका और लगातार प्रशासनिक दबाव से माखनलाल मानसिक तनाव में आ गए और उन्हें अटेक आ गया। परिजनों द्वारा उन्हें तत्काल मेदांता अस्पताल, इंदौर ले जाया गया, जहाँ उनका उपचार जारी है। डॉक्टरों द्वारा बताया गया कि स्थिति नाजुक बनी हुई है।
यह घटना सरकार की किसान विरोधी नीतियों का प्रत्यक्ष उदाहरण है। पूर्वी रिंग रोड के लिए ज़मीनों का अधिग्रहण कौड़ियों के दाम पर किया जा रहा है। किसानों की ज़मीनों की गाइडलाइन दरें जानबूझकर बेहद कम रखी गई हैं, जिससे उन्हें उचित मुआवज़ा नहीं मिल पा रहा है।
संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं — रामस्वरूप मंत्री, बबलू जाधव, चंदनसिंह बड़वाया, संतोष सोमतिया, शैलेंद्र पटेल एवं अन्य ने कहा कि यह घटना सरकार की गलत और असंवेदनशील नीतियों का परिणाम है। विकास के नाम पर किसानों की आजीविका छीनना न केवल अन्यायपूर्ण बल्कि अमानवीय कृत्य है।
मोर्चा के नेताओं ने चेतावनी दी है कि —
“यदि किसानों की ज़मीनों का बाज़ार मूल्य से चार गुना मुआवज़ा नहीं दिया गया और किसानों की सहमति के बिना भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी रही, तो संयुक्त किसान मोर्चा इस मुद्दे को राज्यव्यापी आंदोलन के रूप में उठाएगा।”
यह घटना सरकार को यह सोचने पर विवश करती है कि विकास का अर्थ केवल सड़कों और इमारतों का निर्माण नहीं, बल्कि किसानों की सुरक्षा, सम्मान और न्याय भी है।

