बरलाई जागीर स्थित मालवा सहकारी शक्कर कारखाना की लगभग 33 हेक्टेयर भूमि को उद्योग विभाग को हस्तांतरित किए जाने की प्रस्तावित प्रक्रिया के विरोध में आज आपत्ति दर्ज कराने की अंतिम तिथि पर बड़ी संख्या में शेयरधारक किसान सांवेर एसडीएम कार्यालय पहुंचे। किसानों ने संगठित रूप से अपनी लिखित आपत्तियां प्रस्तुत कर भूमि हस्तांतरण के निर्णय पर पुनर्विचार की मांग की।
किसानों का कहना है कि यह भूमि उनकी अंशपूंजी, परिश्रम और वर्षों की सहभागिता से स्थापित सहकारी संस्था की संपत्ति है। बिना शेयरधारकों की सहमति के इसे किसी भी औद्योगिक अथवा निजी प्रयोजन के लिए हस्तांतरित करना न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि सहकारिता की मूल भावना के भी विपरीत है।
आज संयुक्त किसान मोर्चा के नेता श्री चंदनसिंह बड़वाया भी एसडीएम कार्यालय पहुंचे और उन्होंने स्वयं अपनी आपत्ति दर्ज कराई। इस अवसर पर संयुक्त किसान मोर्चा के नेता श्री रामस्वरूप मंत्री, किसान नेता श्री बबलू जाधव, श्री शैलेन्द्र पटेल बलराम नरवलिया सहित अनेक किसान उपस्थित रहे।
नेताओं ने संयुक्त रूप से कहा कि विकास और रोजगार सृजन का वे विरोध नहीं करते, किंतु जिन किसानों की भूमि और पूंजी के आधार पर यह परियोजना प्रस्तावित है, उनके अधिकारों, उचित मुआवजे और भविष्य की सुरक्षा को सुनिश्चित किए बिना किसी भी प्रकार का निर्णय स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने मांग दोहराई कि भूमि हस्तांतरण से पूर्व सभी शेयरधारक किसानों की सहमति ली जाए, वर्तमान बाजार मूल्य के अनुरूप उचित मुआवजा प्रदान किया जाए तथा प्रभावित परिवारों को प्रस्तावित उद्योग में प्राथमिकता के आधार पर रोजगार दिया जाए।
किसान नेताओं ने कहा कि यदि शासन-प्रशासन द्वारा किसानों की जायज़ मांगों पर गंभीरतापूर्वक विचार नहीं किया गया तो वे लोकतांत्रिक एवं विधिसम्मत तरीके से आगे की रणनीति तय करने के लिए बाध्य होंगे।
किसानों ने विश्वास जताया कि शासन उनकी भावनाओं और अधिकारों का सम्मान करते हुए न्यायपूर्ण निर्णय लेगा।

